SEBI और Google की नई 'वेरिफाइड बैज' पहल से शेयर बाजार में फर्जी ऐप्स का खेल होगा खत्म! जानें कैसे सुरक्षित रहेंगे आपके पैसे

SEBI Verified Badge: सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने फर्जी ऐप्स को निवेशकों के भरोसे के लिए 'गंभीर खतरा' बताया है। भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए सेबी ने गूगल के साथ साझेदारी की है। अब गूगल AI का उपयोग करके उन 'फिनफ्लुएंसर्स' और सोशल मीडिया चैनलों की निगरानी करेगा जो निवेश ऐप्स के बारे में गलत जानकारी फैलाते हैं

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 11:47 AM
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सेबी अब तक 66 फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और 1.3 लाख से ज्यादा भ्रामक पेजों को इंटरनेट से हटवा चुका है

SEBI Verified Badge Initiative: शेयर बाजार में निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स पर लगाम लगाने के लिए SEBI ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्ले स्टोर पर केवल उन्हीं स्टॉक ट्रेडिंग ऐप्स को 'वेरिफाइड बैज' दिया जाएगा जो सेबी के पास रजिस्टर्ड हैं। इसके लिए सेबी ने Google के साथ हाथ मिलाया है। बता दें कि सेबी अब तक 66 फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और 1.3 लाख से ज्यादा भ्रामक पेजों को इंटरनेट से हटवा चुका है।

क्या है सेबी की नई 'Verified Badge' पहल?

डिजिटल दौर में असली और नकली ऐप्स के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है। अब गूगल प्ले स्टोर पर सेबी-रजिस्टर्ड संस्थाओं द्वारा संचालित ऐप्स के नाम के आगे एक 'वेरिफाइड' का निशान दिखाई देगा। शुरुआत में इसे 600 ब्रोकर ऐप्स के लिए लागू किया गया है। आने वाले समय में इसमें रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर (IA), ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों को भी जोड़ा जाएगा।


फिनफ्लुएंसर्स पर AI की नजर

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने फर्जी ऐप्स को निवेशकों के भरोसे के लिए 'गंभीर खतरा' बताया है। भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए सेबी ने गूगल से विशेष आग्रह किया है। इसी के तहत गूगल अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग करके उन 'फिनफ्लुएंसर्स' और सोशल मीडिया चैनलों की निगरानी करेगा जो निवेश ऐप्स के बारे में गलत जानकारी फैलाते हैं। अगर कोई अनधिकृत व्यक्ति किसी ऐप को गलत तरीके से प्रमोट करता है, तो उसे तकनीक के जरिए पकड़ा जाएगा।

क्या केवल 'वेरिफाइड बैज' काफी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बड़ी हैं। 'mFilterIt' के सीईओ अमित रिलन ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं:

  • हाइपर-रियलिस्टिक कंटेंट: आज AI के जरिए इतने असली लगने वाले वीडियो और पोस्ट बनाए जा रहे हैं कि लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं।
  • प्रमोशन का तरीका: रिलन के अनुसार, खतरा केवल फर्जी ऐप से नहीं है, बल्कि इस बात से भी है कि एक वैध ऐप को सोशल मीडिया पर किस तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
  • लगातार निगरानी: निवेशकों की सुरक्षा के लिए केवल बैज देना काफी नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इन ऐप्स का प्रचार किस आधार पर हो रहा है।

निवेशक क्या सावधानी बरतें?

बैज जरूर देखें: प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करते समय सेबी का 'Verified' मार्क चेक करें।

जल्दबाजी न करें: बड़े मुनाफे का लालच देने वाले विज्ञापनों या इन्फ्लुएंसर्स के दावों पर तुरंत भरोसा न करें।

सेबी की वेबसाइट: किसी भी ऐप या ब्रोकर की प्रमाणिकता जांचने के लिए सेबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उनका रजिस्ट्रेशन नंबर क्रॉस-चेक करें।

सेबी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों निवेशकों को एक सरल सिद्धांत रुकें, वेरीफाई करें और फिर आगे बढ़ने की सलाह दी है।

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