इन चार वजहों से भहराकर गिर पड़ेगा शेयर मार्केट? HSBC ने जताई आशंका

Stock Market Risk: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने घरेलू स्टॉक मार्केट की तेजी को लेकर एक कैलकुलेशन किया है और पाया कि कम से कम चार ऐसी बातें हैं जो मार्केट की तेजी के रास्ते में ब्रेकर का काम कर रही हैं। जानिए ये कौन-कौन से फैक्टर्स हैं और मार्केट को ऊपर ले जाने के लिए कौन-कौन से फैक्टर्स हैं?

अपडेटेड Sep 02, 2025 पर 2:07 PM
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Stock Market Risk: पिछले कुछ समय से शेयर मार्केट वापसी की कोशिशें कर रहा है तो इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अब मार्केट वापसी करेगा?

Stock Market Risk: पिछले कुछ समय से शेयर मार्केट वापसी की कोशिशें कर रहा है तो इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अब मार्केट वापसी करेगा? इसे लेकर वैश्विक ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने भी अपना कैलकुलेशन किया है और पाया कि कम से कम चार ऐसी बातें हैं जो मार्केट की तेजी के रास्ते में ब्रेकर काम कर रही हैं तो दूसरी तरफ पांच बातें मार्केट के पक्ष में हैं यानी कि मार्केट को प्रभावित करने वाले इस समय अहम नौ फैक्टर्स में पांच मार्केट को आगे ले जाने का दम रखते हैं। HSBC का मानना है कि निकट टर्म में तेजी की गुंजाइश सीमित है और इसी वजह से इसे न्यूट्रल रेटिंग दी है।

इन वजहों से मार्केट पर दबाव

कमाई पर रिस्क

इस साल 2025 के लिए ग्रोथ के अनुमान पहले ही कम हो चुके हैं हैं। अब अगले सला की बात करें तो एचएसबीसी का मानना है कि अगले वर्ष 2026 में कंपनियों की कमाई की 16% ग्रोथ के अनुमान में कटौती की तलवार तब तक लटकी हुई है, जब तक कि मांग में सुधार के स्पष्ट संकेत न दिखाई दें।


शेयरों की भारी सप्लाई

प्रमोटर्स की बिक्री जारी है, बड़े-बड़े निवेशक होल्डिंग हल्की कर रहे हैं तो दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों की खरीदारी सुस्त है। इससे वैल्यूएशन पर दबाव पड़ रहा है।

कॉम्पटीशन से मार्जिन पर दबाव

विभिन्न सेक्टर्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से मुनाफे में गिरावट की आशंका है जिससे वैल्यूएशन पर भी दबाव दिख सकता है।

प्राइवेट कैपेक्स में सुस्ती

निजी तौर पर पूंजी निवेश फिलहाल एनर्जी और माइनिंग सेक्टर तक सीमित है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटस गुड्स सेक्टर में इसकी चाल सुस्त है।

इन बातों से मिल रहा सपोर्ट

मौद्रिक नीतियां

ब्याज दरों में कटौती और महंगाई दर में नरमी से बैंकों पर दबाव हल्का हो सकता है। बैंक इसलिए मार्केट के लिए काफी अहम हैं क्योंकि मार्केट में सबसे अधिक वेटेज इसी का है।

राजकोषीय प्रोत्साहन

टैक्स में कटौती जैसे अहम कदमों से खपत को बढ़ावा मिल सकता है। इससे ग्रोथ की धीरे-धीरे रिकवरी को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

वैल्यूएशन में सुधार

शॉर्ट रन में रेटिंग में अधिक बढ़ोतरी संभव नहीं है, लेकिन घरेलू मांग से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।

टैरिफ का कम असर

अमेरिकी टैरिफ का भारतीय स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कंपनियों पर प्रत्यक्ष रूप से बहुत ही कम असर की उम्मीद है।

चाइनीज मार्केट से अब कोई खतरा नहीं

अभी तक माना जाता रहा है कि भारत और चीन के मार्केट में एक ऊपर जाएगा तो दूसरा नीचे लेकिन एचएसबीसी का मानना है कि भारत और चीन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं क्योंकि विदेशी निवेशकों की होल्डिंग में ज्यादा ओवरलैप नहीं है।

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