वैश्विक अनिश्चितता जारी रहने के बावजूद भारत में स्टैबिलिटी बनी हुई है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर निमेश शाह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, पश्चिम में बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने दुनिया में अनिश्चितता बढ़ाई है। लेकिन, इंडिया अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में है।
ग्लोबल मार्केट्स के सामने कई तरह की चुनौतियां
उन्होंने मनीकंट्रोल FiDEX कार्यक्रम में कहा कि ग्लोबल मार्केट्स कई तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। लेकिन, इंडिया के इकोनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत हैं। फिस्कल और करेंट अकाउंट डेफिसिट कंट्रोल में है। बैंकों की बैलेंसशीट अच्छी है। कंपनियों पर कर्ज का बोझ अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा, "बहुत ज्यादा अनिश्चितता वाली दुनिया में हम एक स्टेबल द्वीप में है, जिसे भारत कहा जाता है।"
इंडियन इकोनॉमी में घरेलू मांग की बड़ी हिस्सेदारी
शाह के मुताबिक, इंडिया की इकोनॉ़मी में घरेलू मांग की बड़ी हिस्सेदारी है, जिससे यह विदेशी झटकों से कुछ हद तक सुरक्षित है। सर्विस के एक्सपोर्ट्स में भारत मजबूत स्थिति में है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स सीमित है। इसका मतलब है कि ग्लोबल टैरिफ का भारत की इंडस्ट्रीज पर अपेक्षाकृत कम सीधा असर पड़ता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि दुनिया में फाइनेंशियल मार्केट्स एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन पर दुनिया में होने वाली घटनाओं खासकर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट मूवमेंट का असर पड़ता रहेगा।
अब भारतीय कंपनियों के शेयर ज्यादा महंगे नहीं
उन्होंने कहा कि मार्केट की वैल्यूएशन के बारे में उन्होंने कहा कि 2024 में भारतीय शेयर महंगे थे। लेकिन, अब स्थिति बेहतर है। पिछले दो सालों में कॉर्पोरेट अर्निंग्स बढ़ी है, जबकि मार्केट ज्यादातर फ्लैट रहा है। इससे वैल्यूएशंस हिस्टोरिकल एवरेज के करीब आ गई हैं। उन्होंने कहा, "पहले ग्लोबल मार्केट्स के मुकाबले हम महंगे थे। अब हम दुनिया के मुकाबले महंगे नहीं रह गए हैं। हम अपनी हिस्टोरिकल वैल्यूएशन रेंज के काफी करीब हैं।"
इंडियन इकोनॉमी की सेहत काफी मजबूत
शाह का मानना है कि सरकार ने इनकम टैक्स में कमी की है, जीएसटी घटाए हैं और लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय किए हैं। इन उपायों का असर तुरंत नहीं बल्कि अगले दो सालों में देखने को मिलेगा। इसके चलते FY26 और FY27 में अर्निंग्स ग्रोथ बढ़ सकती है। उन्होंने कंजम्प्शन बढ़ने के संकेतों के बारे में बताते हुए कहा कि सीमेंट की डिमांड बढ़ रही है। पावर की खपत मजबूत बनी हुई है। हाउसिंग एक्टिविटी बढ़ी है। ऑटो सेल्स में भी इजाफा हुआ है। इससे भारत की इकोनॉमी में मजबूती का पता चलता है।
सिप के जरिए हर महीने 30,000 करोड़ का निवेश
उन्होंने कहा कि घरेलू निवेशकों के बढ़ते पार्टिसिपेशन से मार्केट में स्थितियां बदल रही हैं। 2018 में म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों की संख्या करीब एक करोड़ थी। आज यह करीब छह करोड़ है। रह महीने SIP के जरिए 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश हो रहा है। उनका मानना है कि इस डोमेस्टिक सेविंग्स से घरेलू संस्थागत निवेशकों की भूमिका बढ़ रही है। आज विदेशी फंड पैसे निकालना चाहते हैं तो वे निकाल सकते हैं, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशक काफी मजबूत हैं।
निवेश में अनुशासन बरतने की सलाह
उन्होंने निवेशकों को शेयर या गोल्ड में निवेश में अनुशासन बरतने की सलाह दी। उनका मानना है कि निवेशकों को लक्ष्य को ध्यान में रख निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा, "आपको कार चलाने के लिए रियर व्यू मिरर देखने की जरूरत नहीं है।" उनका मतलब पिछले रिटर्न के आधार पर निवेश के ऐलोकेशन से था।