भारतीय शेयर बाजार ऊंची उड़ान भरने को तैयार, ICICI Securities ने बताई वजह

ICICI Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार की वैल्यूएशंस अब अट्रैक्टिव दिख रही है। प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल करीब 24 गुना से घटकर करीब 18 गुना पर आ गया है। नॉमिनल प्रॉफिट ग्रोथ में इम्प्रूवमेंट है। कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने के संकेत हैं

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 1:01 PM
अमेरिका-ईरान में डील से शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिख रही है। 25 जून को 12:45 बजे निफ्टी 0.72 फीसदी यानी 172 अंक के उछाल के साथ 24,192 पर चल रहा था।

भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन अब खत्म होने जा रहे हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है। उसने बताया है कि बाजार अब मुश्किल दौर से बाहर आ रहा है। भारतीय बाजार कई वजहों से दबाव में था। इनमें ज्यादा वैल्यूएशंस, कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ, जियोपॉलिटिकल टेंशन, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और एआई का आईटी शेयरों पर असर शामिल थे। अब हालात बदलते दिख रहे हैं।

बाजार के लिए अब स्थितियां हुईं अनुकूल

ICICI Securities की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार की वैल्यूएशंस अब अट्रैक्टिव दिख रही है। प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल करीब 24 गुना से घटकर करीब 18 गुना पर आ गया है। नॉमिनल प्रॉफिट ग्रोथ में इम्प्रूवमेंट है। कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने के संकेत हैं। शेयर बाजारों पर सरकार की अनुकूल पॉलिसी का असर दिखेगा। सरकार ने बॉन्ड्स में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रही।


क्रूड में तेज गिरावट आने पर चढ़ता है बाजार

अमेरिका-ईरान के बीच डील से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। कीमत लड़ाई से पहले के अपने लेवल पर आ गई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी पर ब्रेक लगा है। 10 साल के सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड 6.9 फीसदी के नीचे आ गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी 50 और क्रूड ऑयल की कीमतों में उलट संबंध है। क्रूड ऑयल में नरमी का स्टॉक मार्केट्स पर पॉजिटिव असर पड़ता है।

बीते छह सेशंस में विदेशी निवेशकों की 90 करोड़ डॉलर की खरीदारी

इस रिपोर्ट के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों को लेकर उत्साह अब ठंडा पड़ रहा है। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों और दक्षिण कोरिया के चिप शेयरों पर दबाव देखने को मिला है। भारत में विदेशी निवेश का आधार व्यापक हो रहा है। NSDL के डेटा के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बीते छह ट्रेडिंग सेशंस में 90 करोड़ डॉलर के शेयर और 2 अरब डॉलर से ज्यादा के बॉन्ड्स खरीदे हैं।

अल-नीनो के असर पर टिकी निगाहें

हालांकि, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थितियां बेहतर होने के बावजूद कुछ रिस्क बने हुए हैं। इस साल अल-नीनो के असर मानसून में बारिश कम हो सकती है। इसका असर खरीफ की फसल पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी इस बारे में ज्यादा कुछ बताना मुश्किल है। देश में जलाशयों में पानी का स्तर पर्याप्त है। इस साल के आखिर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना बढ़ी है, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका में गैस की कीमतों में नरमी आ रही है।

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शेयर बाजारों में लगातार तेजी 

अमेरिका-ईरान में डील से शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिख रही है। 25 जून को 12:45 बजे निफ्टी 0.72 फीसदी यानी 172 अंक के उछाल के साथ 24,192 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.74 फीसदी यानी 584 अंक चढ़कर 77,573 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 0.66 फीसदी तेजी दिखी।

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