IRFC OFS: रिटेल इनवेस्टर्स के लिए खुला ओएफएस, क्या आपको पार्टिसिपेट करना चाहिए?

IRFC OFS: सरकार ने IFRC के ओएफएस के लिए प्रति शेयर 91 रुपये का प्राइस तय किया है। इस ओएफएस के जरिए सरकार 26.13 करोड़ से ज्यादा शेयर बेच रही है, जो IRFC में 2 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। सरकार को इस हिस्सेदारी को बेचने से 2,300 करोड़ रुपये मिलेंगे

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 12:04 PM
IRFC का शेयर 11:30 बजे 0.43 फीसदी गिरकर 92.10 रुपये पर चल रहा था।

IRFC OFS: इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईआरएफसी) का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) 25 जून को रिटेल इनवेस्टर्स के लिए खुल गया है। सरकार ओएफएस के जरिए आईआरएफसी में अपने 2 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच रही है। नॉन-रिटेल इनवेस्टर्स के लिए यह इश्यू 24 जून को खुल गया था।

25 जून को भी शेयरों पर दिखा दबाव

रिटेल इनवेस्टर्स के लिए यह OFS 25 जून को खुला है। 24 जून को ओएफएस खुलने के बाद शेयरों में बड़ी गिरावटआई थी। 25 जून को भी आईआरएफसी के शेयर पर दबाव दिखा। 11:30 बजे यह 0.43 फीसदी गिरकर 92.10 रुपये पर चल रहा था।


ओएफएस के लिए प्रति शेयर 91 रुपये कीमत तय

सरकार ने IFRC के ओएफएस के लिए प्रति शेयर 91 रुपये का प्राइस तय किया है। इस ओएफएस के जरिए सरकार 26.13 करोड़ से ज्यादा शेयर बेच रही है, जो IRFC में 2 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। सरकार को इस हिस्सेदारी को बेचने से 2,300 करोड़ रुपये मिलेंगे। शेयर की मौजूदा कीमत और OFS के लिए तय कीमत के बीच अब ज्यादा फर्क नहीं रह गया है।

नॉन-रिटेल कैटेगरी पूरी तरह सब्सक्राइब

24 जून को यह ओएफएस नॉन-रिटेल इनवेस्टर्स कैटेगरी में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। रिजर्व शेयरों के मुकाबले इस कैटेगरी को 1.86 गुना बिड्स मिली। इसके बाद सरकार ने ग्रीन-शू ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।ओएफएस के बाद आईआरएफसी के शेयरों का फ्री फ्लोट बढ़ेगा। शेयरों में लिक्विडिटी भी बढ़ेगी।

सरकार बेच रही ओएफएस में 2 फीसदी हिस्सेदारी

डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मॉनेटाइजेशन (DIPAM) के सेक्रेटरी अरुणीश चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया है कि सरकार आईआरएफसी में 1 फीसदी हिस्सेदारी का विनिवेश कर रही है। इसके अलावा 1 फीसदी का अतिरिक्त ग्रीन शू ऑप्शन भी होगा। दोनों मिलाकर सरकार कुल 2 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी।

क्या आपको OFS में पार्टिसिपेट करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईआरएफसी के शेयरों की कीमतों में बड़ी गिरावट की वजह से यह ओएफएस अब रिटेल इनवेस्टर्स के लिए अट्रैक्टिव नहीं रह गया है। खासकर शॉर्ट टर्म में ओएफएस में निवेश से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद नहीं की जा सकती। हालांकि, लंबी अवधि के लिहाज से ओएफएस में निवेश किया जा सकता है। सरकारी कंपनियों का डिविडेंड देने का रिकॉर्ड अच्छा है।

अब तक सरकार पांच सीपीएसई में बेच चुकी हिस्सेदारी

सरकार ने इस वित्त वर्ष में अब तक पांच सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE), बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों में हिस्सेदारी बेची है। इससे सरकार को करीब 16,480 करोड़ रुपये मिले हैं। सरकार को कोल इंडिया में हिस्सेदारी बेचने से 5,542 करोड़ रुपये मिले हैं। एनएचपीसी में हिस्सेदारी बेचने से 4,357 करोड़ रुपये मिले हैं।

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FY27 में  विनिवेश से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य

जीआईसी में हिस्सेदारी बेचने से 3,090 करोड़ रुपये मिले हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में हिस्सा बेचने से 2,266 करोड़ रुपये मिले हैं। एनएलसी इंडिया में विनिवेश से 1,223 करोड़ रुपये मिले हैं। सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट रखा है।

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