IDBI Bank Stake Sale: सरकार ने नए सिरे से वैल्यूएशन आंकना किया शुरू, क्या फिर मंगाएगी बोलियां?
IDBI Bank Stake Sale: बैंक में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री की प्रक्रिया लंबे वक्त से अटकी हुई है। इस साल मार्च महीने की शुरुआत में इस प्रस्तावित बिक्री को रद्द कर दिया गया। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं
IDBI Bank में LIC के पास 49.24 प्रतिशत और भारत सरकार के पास 45.48 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
सरकार ने नए सिरे से IDBI Bank की वैल्यूएशन को आंकना शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया लगभग एक महीने में पूरी होगी। उसके बाद ही इसमें सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोलियां आमंत्रित करने पर कोई फैसला लिया जाएगा। इससे इस बैंक की विनिवेश प्रक्रिया में बदलाव के संकेत मिलते हैं। यह नया मूल्यांकन भविष्य में होने वाली किसी भी हिस्सेदारी बिक्री के लिए एक बेंचमार्क का काम करेगा। वर्तमान में IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल 5.29 प्रतिशत है। सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका बैंक पर नियंत्रण है। वहीं, भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है।
एक सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया, "इस सौदे के लिए अभी समय काफी मुश्किल है। हम अभी भी मूल्यांकन की प्रक्रिया में हैं और अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस नए मूल्यांकन को पूरा होने में ही लगभग एक महीना लगेगा, और उसके बाद ही हम कोई फैसला लेने की स्थिति में होंगे।" अधिकारी के मुताबिक, "इस चरण पर, अभी यह तय नहीं किया गया है कि क्या फिर से 'एक्सप्रेशंस ऑफ इंट्रेस्ट' आमंत्रित किए जाएंगे या नहीं। हम इस बारे में तभी विचार करेंगे जब मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और हमें आगे की राह के बारे में अधिक स्पष्टता मिल जाएगी।"
यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि रणनीतिक बिक्री के पिछले दौर से उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। इसके चलते केंद्र सरकार को बाजार की कमजोर स्थिति को देखते हुए कीमतों से जुड़ी अपनी उम्मीदों पर फिर से विचार करना पड़ा।
मार्च में रद्द हो गई थी IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री
विनिवेश के तहत सरकार IDBI Bank में अपनी और LIC की हिस्सेदारी में से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इस साल मार्च महीने की शुरुआत में इस प्रस्तावित बिक्री को रद्द कर दिया गया। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं। ये संभावित खरीदार एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स थे।
क्या शेयर की कीमत बन रही है बाधा
IDBI Bank के शेयर की कीमतों में भारी गिरावट आई है। विनिवेश को लेकर जब सबसे ज्यादा उत्साह था, तब शेयर की कीमत लगभग 118 रुपये थी। कीमत अब घटकर 70 रुपये के निचले स्तर पर आ गई है, क्योंकि इस सौदे की गति धीमी पड़ गई है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि मौजूदा बाजार मूल्य इस सौदे को आगे बढ़ाने में एक बड़ी बाधा बन रहा है। अधिकारी का कहना है, "शेयर की मौजूदा कीमत भी काफी कम है, और इस बात को भी ध्यान में रखना होगा। आप मूल्यांकन से जुड़ी उम्मीदों को एक समान किए बिना इस तरह के सौदे को आगे नहीं बढ़ा सकते, खासकर तब जब बाजार की स्थितियां बहुत ज्यादा अनुकूल न हों।"
IDBI Bank के शेयर की कीमतों में आई गिरावट ने सरकार के लिए मोलभाव करने की गुंजाइश को काफी कम कर दिया है। इससे यह चिंता भी बढ़ गई है कि यदि मौजूदा स्तरों पर ही बिक्री को आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे आम शेयरधारकों के निवेश की वैल्यू में कमी आ सकती है।
IDBI बैंक के विनिवेश की अगली कोशिश ज्यादा सोची-समझी होने की उम्मीद है। इस बार कीमतों में अंदाजे पर होने वाले उतार-चढ़ाव से बचने और यह पक्का करने पर जोर होगा कि वैल्यूएशन बुनियादी बातों के हिसाब से ही रहे। अधिकारी ने आगे कहा, “आगे चलकर, हमारा तरीका ज्यादा नपा-तुला होना चाहिए। हमें बहुत जल्दी उम्मीदें जगाने के बजाय चुपचाप काम करना होगा। इस समय, आगे बढ़ने का यही सबसे सही तरीका लगता है।”
IDBI Bank में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री की प्रक्रिया लंबे वक्त से अटकी हुई है। सरकार का प्लान IDBI Bank में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का था। वहीं LIC, बैंक में 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही थी। सरकार ने सबसे पहले साल 2016 में घोषणा की थी कि वह IDBI Bank का प्राइवेटाइजेशन करना चाहती है। यह विचार सबसे पहले फरवरी 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट भाषण में आधिकारिक तौर पर दिया था। बैंक में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की पहली कोशिश मूल्यांकन संबंधी चिंताओं के कारण नाकाम हो गई थी।
हालांकि, सरकार ने बाद में कंट्रोलिंग स्टेक LIC को बेच दिया। जनवरी 2019 में LIC ने IDBI Bank को भारी खराब ऋणों (bad loans) से बचाने के लिए लगभग 21,624 करोड़ रुपये में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली। इसके बाद बैंक प्राइवेट सेक्टर का बैंक बन गया। दिसंबर 2020 में बैंक में LIC की हिस्सेदारी घटकर 49.24 प्रतिशत हो गई।
दूसरी बार कब आया प्रपोजल
इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2020 में वित्त वर्ष 2021 का बजट पेश करते हुए बैंक में सरकारी हिस्सेदारी और कम करने का प्रपोजल रखा। IDBI Bank के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया को औपचारिक गति तब मिली, जब आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मई 2021 में बैंक में मैनेजमेंट कंट्रोल के ट्रांसफर के साथ-साथ रणनीतिक विनिवेश के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में LIC के साथ मिलकर इस बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EoI) आमंत्रित किए। अक्टूबर 2022 में ही KPMG India को लेनदेन सलाहकार (Transaction Advisor) नियुक्त किया गया। फरवरी 2026 में एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स से वित्तीय बोलियां मिलीं।
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