आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया अब रफ्तार पकड़ सकती है। दरअसल, सरकार ने आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने के प्लान के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) का एप्रूवल पहले ही ले लिया है। उम्मीद है कि अब आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी रखने वाले संभावित खरीदारों की तरफ से ड्यू डिलिजेंस नवंबर में शुरू हो जाएगा। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली लगाने वाले बैंकों या संस्थानों का ड्यू डिलिजेंस पहले ही पूरा कर लिया है।
फाइनेंस मिनिस्ट्री जल्द प्रक्रिया पूरी करना चाहती है
आम तौर पर इस तरह की रणनीतिक बिक्री में आरबीआई से एप्रूवल लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। लेकिन, आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में रणनीतिक हिस्सेदारी का मामला थोड़ा अलग है। इसलिए सरकार ने इसके लिए पहले से ही आरबीआई की मंजूरी हासिल कर ली है। अधिकारी ने कहा कि इससे IDBI Bank बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने में देर नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि फाइनेंस मिनिस्ट्री भी इस प्रोसेस को जल्द पूरा करना चाहती है।
बोली लगाने वाले बैंकों को लीगल डॉक्युमेंट्स देखने का मौका मिलेगा
ड्यू डिलिजेंस प्रोसेस के दौरान बोली लगाने वाले बैंकों को आईडीबीआई बैंक के लीगल डॉक्युमेंटस को देखने का मौका मिलेगा। वे चाहें तो आईडीबीआई बैंक से जुड़ी अतिरिक्त जानकारियां भी मांग सकते हैं। उन्हें ये जानकारियां डेटा रूम से उपलब्ध करा दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बिडर्स (बोली लगाने वाले बैंक) को इस प्रक्रिया में किसी तरह की दिक्कत नहीं आए। फाइनेंस मिनिस्ट्री अपनी तरफ से प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं चाहती है।
बैंकिंग सेक्टर के नियमन की जिम्मेदारी आरबीआई पर
उन्होंने कहा, "आरबीआई बैंकिंग सेक्टर का रेगुलेटर है। वह बैंकों को लाइसेंस जारी करता है। बैंकिंग सेक्टर में किसी अधिग्रहण पर उसकी करीब नजरें होंगी। केंद्रीय बैंक पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक बिक्री पूरी तरह फिट एंड प्रॉपर हो। इसलिए इस मामले में आरबीआई की मंजूरी पहले से ही ले ली गई है ताकि बाद में किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।"
आगे प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा आने की उम्मीद नहीं
सरकार का आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक बिक्री के लिए पहले से ही आरबीआई का मंजूरी ले लेना काफी अहम है। इसकी वजह यह है कि आईडीबीआई बैंक की स्थिति थोड़ी अलग है। ऊपर जानकारी वाले देने वाले अधिकारी ने कहा कि आरबीआई से 'फिट एंड प्रॉपर' का क्लियरेंस ले लेना जरूरी था। इसके बगैर बाद में प्रक्रिया में अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता था।
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RBI, सरकार और सेबी ने मिलकर तय किया है प्रोसेस
आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक बिक्री की शर्तें तय करने के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री, आरबीआई और सेबी ने मिलकर काम किया है। इसके बाद प्रोसेस को फाइनल किया गया है। इससे बैंकिंग सेक्टर में होने वाले एक बड़े ट्रांजेक्शन के लिए जमीन तैयार हुई है।