क्या प्राइवेट बैंकों में सुरक्षित है सरकार का पैसा? IDFC फर्स्ट बैंक मामले ने बढ़ाई टेंशन, उठ रहे कई सवाल
IDFC फर्स्ट बैंक इन दिनों मुश्किलों में हैं। बैंक ने पिछले वीकेंड खुलासा किया कि उसकी चंडीगढ़ की एक खास ब्रांच में 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आया है। यह फ्रॉड हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में पाया गया। इस खुलासे के बाद हरियाणा सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बैंक को अपने पैनल से हटा दिया। इसके बाद बैंक से करीब 200 करोड़ रुपये की निकासी हुई
हरियाणा सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए IDFC फर्स्ट बैंक को अपने पैनल से हटा दिया है
IDFC फर्स्ट बैंक इन दिनों मुश्किलों में हैं। बैंक ने पिछले वीकेंड खुलासा किया कि उसकी चंडीगढ़ की एक खास ब्रांच में 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड सामने आया है। यह फ्रॉड हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में पाया गया। इस खुलासे के बाद हरियाणा सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बैंक को अपने पैनल से हटा दिया। इसके बाद बैंक से करीब 200 करोड़ रुपये की निकासी हुई।
इसी तरह AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को भी झटका लगा। हरियाणा सरकार ने उसके साथ भी अपना खाता बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साफ किया है कि इस घटना से बैंकिंग सिस्टम को कोई व्यापक खतरा नहीं है। सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर है। लेकिन इन घटनाओं के पीछे एक और परेशान करने वाली बात है - सरकारी डिपार्टमेंट और प्राइवेट बैंकों के बीच खराब रिश्ता।
सरकारी खातों में प्राइवेट बैंकों की भूमिका पर बहस
यह घटनाएं इस बात की ओर भी इशारा करती हैं कि सरकारी कारोबार संभालने में निजी बैंकों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। IDFC फर्स्ट बैंक ऐसा पहला बैंक नहीं है जो फ्रॉड का शिकार हुआ हो। इससे पहले HDFC बैंक, ICICI बैंक और Axis बैंक जैसे बड़े प्राइवेट बैंक भी ऐसे मामलों का सामना कर चुके हैं।
IDFC फर्स्ट बैंक के मामले में हरियाणा सरकार की जमा राशि, बैंक की कुल डिपॉजिट का सिर्फ लगभग 0.5% थी, यानी रकम बहुत बड़ी नहीं थी। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस घटना से बैंक की साख को जो नुकसान हुआ है, उसे सुधारने में कई महीने लग सकते हैं।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड इंडिया के एक पूर्व बैंकर ने कहा, “IDFC मामले में जो हुआ है, वह सरकार और बैंक दोनों के लिए साख का नुकसान है। इससे बैंक की प्रक्रियाओं और सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं। अगर किसी संस्था में मजबूत सिस्टम, प्रोटोकॉल और जांच-परख की व्यवस्था नहीं हो, तो ऐसी घटनाएं सामने आती हैं।”
2021 में खुला था रास्ता
पहले प्राइवेट बैंकों को सरकारी कामकाज में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं थी। सरकारी लेन-देन और विभागों से जुड़े ज्यादातर काम सिर्फ पब्लिक सेक्टर के बैंकों (PSU बैंकों) के जरिए ही होते थे। लेकिन फरवरी 2021 में केंद्र सरकार ने यह पाबंदी हटा दी। सरकार का मकसद था कि सरकारी लेन-देन के मामले में सभी बैंकों को बराबरी का मौका मिले।
इस फैसले के बाद जो काम पहले सिर्फ सरकारी बैंकों तक सीमित थे, उनमें अब प्राइवेट सेक्टर के बैंक भी भाग ले सकते हैं और सरकारी खातों व लेन-देन को संभाल सकते हैं।
प्राइवेट बैंकों के लिए यह बड़ा अवसर था, क्योंकि इससे उनके CASA (करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट) रेशियो में सुधार हो सकता था। साथ ही, उन्हें ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचने और अपनी तकनीक के जरिए बेहतर सेवाएं देने का मौका भी मिला। CASA रेशियो जितना अधिक होता है, बैंक के लिए कम लागत पर फंड उपलब्ध कराना उतना आसान होता है। सरकारी खातों के जरिए निजी बैंकों को स्थिर और कम लागत वाले बड़े डिपॉजिट मिल सकते थे।
लेकिन संबंध रहे तनावपूर्ण
पिछले कुछ सालों में कई राज्यों ने प्राइवेट बैंकों को लेकर असंतोष जताया है। जून 2025 में ओडिशा सरकार ने HDFC बैंक, ICICI बैंक और Axis बैंक को अपने पैनल से हटा दिया था। आरोप था कि पिछले दो वित्त वर्षों में इन बैंकों ने सरकार की कुछ प्रमुख योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं किया। हालांकि बाद में जुलाई 2025 में यह आदेश वापस ले लिया गया और बैंकों को फिर से पैनल में शामिल कर लिया गया।
उसी साल जून में एक और मामला सामने आया, जब पंजाब सरकार ने HDFC बैंक को अपने पैनल से हटा दिया। राज्य सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे बैंक के साथ सरकारी लेन-देन बंद कर दें। आरोप था कि बैंक सहयोग नहीं कर रहा था और तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने में विफल रहा।
इससे पहले मार्च 2020 में महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने घोषणा की थी कि वह प्राइवेट और को-ऑपरेटिव्स बैंकों में मौजूद अपने सभी खाते बंद करेगी और पैसा केवल सरकारी बैंकों में ही रखेगी। उस समय तीन नगर निकायों के 1,110 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम एक बैंक में फंसी हुई थी।
यह फैसला उस समय आया था जब यस बैंक (Yes Bank) संकट में था। रिजर्व बैंक ने यस बैंक पर मोरेटोरियम लगा दिया था और निकासी की सीमा 5,000 रुपये तक तय कर दी थी, ताकि हालात और खराब न हों।
भरोसा अब भी सरकारी बैंकों पर ज्यादा
जब सरकारी विभागों का बड़ा पैसा दांव पर होता है, तो छोटी सी घटना भी नीतियों पर दोबारा सोचने की वजह बन सकती है। प्राइवेट बैंकों को सरकारी कामकाज में शामिल करने से उनके कैश मैनेजमेंट में जरूर सुधार हुआ है, लेकिन भरोसा एक बड़ा मुद्दा बना रहता है। इस मामले में सरकारी बैंकों को थोड़ी बढ़त मिलती है।
एक पूर्व बैंकर ने कहा, “आज भी कई जगह लोग निजी कंपनियों को पसंद करते हैं। लेकिन जब बात बैंकिंग या बीमा जैसी वित्तीय सेवाओं की आती है, तो SBI या LIC जैसी सरकारी संस्थाओं पर ज्यादा भरोसा किया जाता है। लोगों को लगता है कि प्राइवेट कंपनियां कभी क्लेम न भी मानें, लेकिन SBI या LIC अपना वादा जरूर निभाएंगी।”
मजबूत सुरक्षा इंतजाम की जरूरत
ऐसी घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि फ्रॉड रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक फ्रॉड डिटेक्शन तकनीक आने के बाद भी निजी बैंकों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए, खासकर बड़े लेन-देन के मामलों में।
एक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बैंकों को हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए अतिरिक्त जांच, सख्त प्रोटोकॉल और मजबूत निगरानी सिस्टम लागू करने की जरूरत है, ताकि धोखाधड़ी की संभावना कम हो सके।
एक बैंकिंग एनालिस्ट्स ने कहा, “यह सेक्टर तेजी से बदल रहा है। नई तकनीकें और नए टूल आ रहे हैं, और इनके साथ धोखाधड़ी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। टेक्नोलॉजी के इस बदलाव के साथ अपने सिस्टम को पूरी तरह सुरक्षित बनाना आसान नहीं होता। कुछ लोग लगातार सिस्टम की कमजोरियां खोजने की कोशिश करते रहते हैं।”
एक्सिस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट ने एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा कि IDFC फर्स्ट बैंक को दूसरे राज्य सरकारों से कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है, लेकिन फिर भी अब प्राइवेट बैंकों के साथ किसी भी सरकारी लेन-देन में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।
हरियाणा सरकार पहले ही सख्त कदम उठा चुकी है। सरकार ने सरकारी खातों को खोलने के लिए प्रशासनिक सचिवों की मंजूरी अनिवार्य की है। वहीं अगर कोई प्राइवेट बैंक में खाता खुलवाना है, तो उसे उसका ठोस औचित्य बताना होगा।
IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा है कि वह सिग्नेचर वेरिफिकेशन और कस्टमर कन्फर्मेशन के लिए खास कदम उठाएगा। इसके अलावा, उसने KPMG को अपना फॉरेंसिक एक्सटर्नल ऑडिटर अपॉइंट किया है, जो इस मामले की जांच करेगी। जांच खत्म होने में अभी कुछ हफ्ते लगेंगे।
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