IIFL Finance Share Price: दिग्गज फाइनेंस और इंवेस्टमेंट सर्विसेज कंपनी आईआईएफएल फाइनेंस के शेयरों में आज बिकवाली का भी दबाव दिखा और यह करीब 8% टूट गया। कंपनी और इसकी सब्सिडरी आईआईएफएल होम फाइनेंस (IIFL Home Finance) को टैक्स नोटिस ने इसे तगड़ा शॉक दिया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसकी टैक्स डिमांड अब ₹95.12 करोड़ से घटकर ₹23.78 करोड़ रह गई है लेकिन होम फाइनेंस इकाई को ₹963 करोड़ का टैक्स नोटिस मिला है। इसके झटके से फिलहाल बीएसई पर यह 3.26% की गिरावट के साथ ₹673.85 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.68% फिसलकर ₹643.05 तक आ गया था। एक साल में शेयरों के चाल की बात करें तो 27 अप्रैल 2026 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹409.45 और 24 अगस्त 2026 को एक साल के हाई ₹704.90 पर था।
आईआईएफएल होम फाइनेंस के मामले में आईटी डिपार्टमेंट के एसेसमेंट ऑर्डर में इसके टैक्सेबल इनकम में कुछ चीजें जोड़ी गई हैं तो कुछ डिडक्शंस को डिसअलाऊ किया गया है जैसे कि करीब ₹490 करोड़ का ओवरराइडिंग कमीशन इनकम, इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 36(1) (viii) के तहत क्लेम किए गए करीब ₹305 करोड़, ₹392 करोड़ का इंटेरेस्ट स्ट्रिप एसेट्स और ESOP पर करीब ₹53 करोड़ का खर्च।
कंपनी के मुताबिक उसकी सब्सिडरी का मानना है कि इस आदेश को चुनौती देने के लिए उसके पास मजबूत तथ्यात्मक और कानूनी आधार हैं। जैसे कि ओवरराइडडिंग कमीशन और इंटेरेस्ट स्ट्रिप एसेट्स से जुड़ी आय पर पहले ही टैक्स दिया जा चुका है, लेकिन उस आय/टैक्स का उचित क्रेडिट पूरी तरह से नहीं दिया गया है। इसके अलावा सब्सिडरी का मानना है कि Section 36(1)(viii) से जुड़ा मुद्दा जनरल रिजर्व्स की व्याख्या से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल एप्लीकेबल स्टैटुअरी लिमिट तय करने में किया जाता है। साथ ही आईआईएफएल फाइनेंस का मानना है कि ESOP एक्सपेंसेज का ट्रीटमेंट उस कानूनी स्थिति के विपरीत है, जिसके हिसाब से उसने काम किया है। इनमें से कई मामलों की पहले भी पुराने स्क्रूटनी एसेसमेंट्स में जांच की जा चुकी है। आईआईएफएल फाइनेंस का कहना है कि सब्सिडरी इसे लेकर कानूनी विकल्पों पर काम कर रही है। फिलहाल कंपनी ने इस मामले से अपनी वित्तीय सेहत पर किसी असर की संभावना नहीं जताई है।
आईआईएफएल फाइनेंस के मामले में बात करें तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस पर ₹475.56 करोड़ का टैक्स डिमांड लगाया था। यह डिमांड 12 मई 2026 के ब्लॉक असेसमेंट ऑर्डर से जुड़ी है। कंपनी ने इसके खिलाफ अपील की है। इनकम टैक्स विभाग ने फिलहाल इसकी वसूली पर रोक लगा दिया है लेकिन यह रोक 31 दिसंबर 2026 तक, या कंपनी की अपील का फैसला आने तक, इनमें से जो पहले होगा, तब तक रहेगी। हालांकि इसके लिए भी एक शर्त है कि कंपनी को इसका 5% तुरंत देना है यानी ₹23.78 करोड़। कंपनी को इसे 15 दिसंबर 2026 तक किस्तों में जमा करना है जिसमें से 13 अगस्त 2026 को ₹5 करोड़ की पहली किस्त कंपनी ने जमा कर दी है। कंपनी का कहना है कि इस टैक्स मामले से उस कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है।
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