IIFL Finance Share Price: ₹963 करोड़ के टैक्स नोटिस पर शेयर धड़ाम, 8% की भारी गिरावट

IIFL Finance Shares: ₹963 करोड़ की टैक्स डिमांड पर आईआईएफएल फाइनेंस के शेयर करीब 8% टूट गए। यह डिमांड इसकी सब्सिडरी से की गई है। मुख्य रूप से चार मुद्दे हैं, जिनमें इनकम टैक्स विभाग ने या तो टैक्सेबल इनकम बढ़ाई है या डिडक्शन को डिसअलाऊ किया है और इसे लेकर कंपनी ने अपनी आपत्ति भी जताई है। जानिए क्या है पूरा मामला

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 12:07 PM
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IIFL Finance ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसकी टैक्स डिमांड अब ₹95.12 करोड़ से घटकर ₹23.78 करोड़ रह गई है लेकिन होम फाइनेंस इकाई को ₹963 करोड़ का टैक्स नोटिस मिला है।

IIFL Finance Share Price: दिग्गज फाइनेंस और इंवेस्टमेंट सर्विसेज कंपनी आईआईएफएल फाइनेंस के शेयरों में आज बिकवाली का भी दबाव दिखा और यह करीब 8% टूट गया। कंपनी और इसकी सब्सिडरी आईआईएफएल होम फाइनेंस (IIFL Home Finance) को टैक्स नोटिस ने इसे तगड़ा शॉक दिया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसकी टैक्स डिमांड अब ₹95.12 करोड़ से घटकर ₹23.78 करोड़ रह गई है लेकिन होम फाइनेंस इकाई को ₹963 करोड़ का टैक्स नोटिस मिला है। इसके झटके से फिलहाल बीएसई पर यह 3.26% की गिरावट के साथ ₹673.85 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.68% फिसलकर ₹643.05 तक आ गया था। एक साल में शेयरों के चाल की बात करें तो 27 अप्रैल 2026 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹409.45 और 24 अगस्त 2026 को एक साल के हाई ₹704.90 पर था।

IIFL Home Finance

आईआईएफएल होम फाइनेंस के मामले में आईटी डिपार्टमेंट के एसेसमेंट ऑर्डर में इसके टैक्सेबल इनकम में कुछ चीजें जोड़ी गई हैं तो कुछ डिडक्शंस को डिसअलाऊ किया गया है जैसे कि करीब ₹490 करोड़ का ओवरराइडिंग कमीशन इनकम, इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 36(1) (viii) के तहत क्लेम किए गए करीब ₹305 करोड़, ₹392 करोड़ का इंटेरेस्ट स्ट्रिप एसेट्स और ESOP पर करीब ₹53 करोड़ का खर्च।


कंपनी के मुताबिक उसकी सब्सिडरी का मानना है कि इस आदेश को चुनौती देने के लिए उसके पास मजबूत तथ्यात्मक और कानूनी आधार हैं। जैसे कि ओवरराइडडिंग कमीशन और इंटेरेस्ट स्ट्रिप एसेट्स से जुड़ी आय पर पहले ही टैक्स दिया जा चुका है, लेकिन उस आय/टैक्स का उचित क्रेडिट पूरी तरह से नहीं दिया गया है। इसके अलावा सब्सिडरी का मानना है कि Section 36(1)(viii) से जुड़ा मुद्दा जनरल रिजर्व्स की व्याख्या से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल एप्लीकेबल स्टैटुअरी लिमिट तय करने में किया जाता है। साथ ही आईआईएफएल फाइनेंस का मानना है कि ESOP एक्सपेंसेज का ट्रीटमेंट उस कानूनी स्थिति के विपरीत है, जिसके हिसाब से उसने काम किया है। इनमें से कई मामलों की पहले भी पुराने स्क्रूटनी एसेसमेंट्स में जांच की जा चुकी है। आईआईएफएल फाइनेंस का कहना है कि सब्सिडरी इसे लेकर कानूनी विकल्पों पर काम कर रही है। फिलहाल कंपनी ने इस मामले से अपनी वित्तीय सेहत पर किसी असर की संभावना नहीं जताई है।

IIFL Finance

आईआईएफएल फाइनेंस के मामले में बात करें तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस पर ₹475.56 करोड़ का टैक्स डिमांड लगाया था। यह डिमांड 12 मई 2026 के ब्लॉक असेसमेंट ऑर्डर से जुड़ी है। कंपनी ने इसके खिलाफ अपील की है। इनकम टैक्स विभाग ने फिलहाल इसकी वसूली पर रोक लगा दिया है लेकिन यह रोक 31 दिसंबर 2026 तक, या कंपनी की अपील का फैसला आने तक, इनमें से जो पहले होगा, तब तक रहेगी। हालांकि इसके लिए भी एक शर्त है कि कंपनी को इसका 5% तुरंत देना है यानी ₹23.78 करोड़। कंपनी को इसे 15 दिसंबर 2026 तक किस्तों में जमा करना है जिसमें से 13 अगस्त 2026 को ₹5 करोड़ की पहली किस्त कंपनी ने जमा कर दी है। कंपनी का कहना है कि इस टैक्स मामले से उस कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है।

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