ट्रंप ने ऑटोमोबाइल पर लगाया 25% टैरिफ: टाटा मोटर्स, सोना BLW समेत इन 8 कंपनियों पर पड़ सकता है असर
Auto Stocks: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने सभी विदेशी ऑटोमोबाइल आयात पर अगले हफ्ते से 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले का असर भारतीय ऑटो और ऑटो कंपोनेंट कंपनियों पर भी पड़ने की संभावना है। इस फैसले के बाद, शेयर बाजार में निवेशकों की अब उन ऑटो कंपनियों पर नजर हैं, जिनका अमेरिकी बाजार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्यापार जुड़ा हुआ है
Auto Stocks: टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी जगुआर लैंड रोअर (JLR) की अमेरिकी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी है
Auto Stocks: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने सभी विदेशी ऑटोमोबाइल आयात पर अगले हफ्ते से 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले का असर भारतीय ऑटो और ऑटो कंपोनेंट कंपनियों पर भी पड़ने की संभावना है। इस फैसले के बाद, शेयर बाजार में निवेशकों की अब उन ऑटो कंपनियों पर नजर हैं, जिनका अमेरिकी बाजार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्यापार जुड़ा हुआ है।
वैसे भारत से अमेरिका को सीधे पूरी तरह से असेंबल किए गए वाहनों का एक्सपोर्ट सीमित है, लेकिन ऑटो कंपोनेंट बनाने वाले कंपनियों को इस फैसले का अधिक प्रभाव झेलना पड़ सकता है। इनमें से अधिकतर कंपनियां यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन को कंपोनेंट निर्यात करती हैं, जो अमेरिका को वाहन सप्लाई करते हैं।
इन 8 कंपनियों पर असर पड़ने का अनुमान-
टाटा मोटर्स (Tata Motors)
टाटा मोटर्स भारत से सीधे अमेरिकी बाजार में गाड़ियां एक्सपोर्ट नहीं करती, लेकिन इसकी सब्सिडियरी जगुआर लैंड रोअर (JLR) का अमेरिकी बाजार में बड़ा हिस्सा है। JLR की बिक्री का 22% हिस्सा अकेले अमेरिका से आता है। FY24 में JLR ने करीब 4 लाख यूनिट्स बेची, जिनमें से बड़ी संख्या अमेरिकी बाजार में गई। JLR के वाहन मुख्य रूप से ब्रिटेन और दूसरे देशों में बनाए जाते हैं और अब इन पर 25% टैरिफ लगता है तो इनकी कीमत बढ़ सकती है। नतीजा, अगर JLR के वाहन अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाते हैं, तो इसकी बिक्री घट सकती है, जिससे टाटा मोटर्स पर असर पड़ेगा।
आयशर मोटर्स (Eicher Motors)
आयशर मोटर्स की रॉयल इनफील्ड (Royal Enfield) बाइकें अमेरिका में काफी लोकप्रिय हैं, खासकर 650cc की मोटरसाइकिल्स। रॉयल इनफील्ड के लिए अमेरिका एक बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। 25% टैरिफ के चलते वहां इन बाइक्स की कीमत बढ़ सकती है, जिससे मांग में कमी आ सकती है।
ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों पर भी असर
ग्लोबल ऑटोमोबाइल कंपनियां, इस ऊंचे टैरिफ का असर कंपोनेंट कंपनियों पर डाल सकती हैं, जिससे इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।
Sona BLW अपनी 66% कमाई अमेरिका और यूरोप से करती है। यह कंपनी डिफरेंशियल गियर्स और स्टार्टर मोटर्स बनाती है, जो अमेरिकी कंपनियों को सप्लाई किए जाते हैं। टैरिफ के चलते कंपनी के प्रोडक्ट महंगे हो सकते हैं, जिससे एक्सपोर्ट में गिरावट आ सकती है। Sona BLW अब चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में अपने निर्यात को बढ़ाने की कोशिश कर रही है, ताकि अमेरिकी बाजार पर उसकी निर्भरता कम हो।
संवर्धना मदरसन इंटरनेशनल (SAMIL)
यह कंपनी Tesla और Ford जैसी अमेरिकी ऑटो कंपनियों को कंपोनेंट सप्लाई करती है। हालांकि, Motherson ने अमेरिका और यूरोप में खुद के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा लिए हैं, जिससे यह टैरिफ के असर से थोड़ा बच सकता है। लेकिन बाकी सप्लायर्स की तुलना में इसका कॉम्पिटीशन बढ़ सकता है।
इनके अलावा भारत फोर्ज (Bharat Forge), संसेरा इंजीनियरिंग (Sansera Engineering), सुप्रजीत इंजीनियरिंग (Suprajit Engineering) और बालकृष्ण इंडस्ट्रीज (Balkrishna Industries) जैसी कंपनियों पर भी असर देखने को मिल सकता है, जिनकी रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट से आता है।
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