Get App

इंप्लॉयड वोलैटिलिटी से क्या मार्केट के बॉटम का अंदाजा लगाया जा सकता है?

इंप्लॉयड वोलैटिलिटी (IV) एक ऑप्शन डेटा है, जिसका इस्तेमाल बॉटम के कैलकुलेशन के लिए किया जा सकता है। लेकिन यह सिर्फ एक संभावना होगी। आईवी न सिर्फ किसी स्टॉक या इंडेक्स के पास्ट मूवमेंट्स के बारे में इंफॉर्मेशन देता है बल्कि यह भविष्य की संभावनाओं के बारे में भी बताता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 19, 2024 पर 6:08 PM
इंप्लॉयड वोलैटिलिटी से क्या मार्केट के बॉटम का अंदाजा लगाया जा सकता है?
आईवी का इस्तेमाल मार्केट में उतारचढ़ाव का अंदाजा लगाने के लिए बतौर प्रॉक्सी किया जा सकता है।

निफ्टी 26000 को पार करने के बाद नीचे आया है। लंबे समय बाद इतनी ज्यादा गिरावट दिखी है। अभी इस का कोई संकेत नहीं है कि यह गिरावट कहां जाकर रुकेगी। यह देखते हुए पिछले काफी समय से बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई थी, इस गिरावट की सीमा बताना मुश्किल है। सवाल है कि क्या इस बारे में ऑप्शंस डेटा से कुछ मदद मिल सकती है?

इंप्लॉयड वोलैटिलिटी (IV) एक ऑप्शन डेटा (Options Data) है, जिसका इस्तेमाल बॉटम के कैलकुलेशन के लिए किया जा सकता है। लेकिन यह सिर्फ एक संभावना होगी। लेकिन, पहले यह समझ लेना जरूरी है कि इंप्लॉयड वोलैटिलिटी का मतलब क्या है। ऑप्शन प्रीमियम (कॉल/पुट) पांच वेरिएबल पर निर्भर करता है। इनमें अंडरलाइंड प्राइस, स्ट्राइक प्राइस, टाइम-टू-एक्सपायरी, इंटरेस्ट रेट और वोलैटिलिटी शामिल हैं। पहले चार वेरिएबल की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होती है। उनकी इनपुट वैल्यू को लेकर किसी तरह का संशय नहीं है।

दूसरी बात यह कि वोलैटिलिटी का कैलकुलेशन अलग-अलग लोग अलग-अलग तरह से करते हैं। लेकिन, इस पर चर्चा करने की बजाय हम किसी दिए गए प्रीमियम के चार वेरिएबल्स और बैक-कैलकुलेटिंग के आधार पर वोलैटिलिटी का पता लगा सकते हैं।

आईवी किसी स्टॉक की वोलैटिलिटी नहीं है जिसे उसके हिस्टोरिकल रिटर्न के आधार पर निकाला जाता है बल्कि इसे प्रीमियम से निकाला जाता है। बैक-कैलकुलेटिंग फिगर के अलावा एक और फैक्टर है, जो हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी से अलग आईवी तय करता है। इसका मतलब यह है कि आईवी का इस्तेमाल मार्केट में उतारचढ़ाव का अंदाजा लगाने के लिए बतौर प्रॉक्सी किया जा सकता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें