भारत की लगभग 200 सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर तेज सेटलमेंट साइकल (faster settlement cycle) की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं। ऐसा हो जाने पर चीन के बाद तथाकथित टी + 1 प्रणाली (T+1 system) पर स्विच करने वाला भारत दूसरा बाजार बन गया है। आगामी 27 जनवरी से देश के इक्विटी बाजार के 80% हिस्से पर काबिज रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd.) से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस लिमिटेड (Tata Consultancy Services Ltd.) और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd.) के स्टॉक 'ट्रेड-प्लस-वन-डे' टाइमलाइन पर सेटल होंगे। जबकि पहले सेटलमेंट की प्रक्रिया में दो दिन का समय लगता था।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (National Securities Depository Ltd) के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रशांत वागल ने कहा कि साल भर से चल रही बदलाव की प्रक्रिया ने बाजार बिचौलियों को इसकी तैयारी करने का समय दिया।
बदलाव के इस अंतिम चरण पर विदेशी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। जिन्होंने टाइम जोन के अंतर (timezone differences) और परिणामी व्यापार-मिलान विफलताओं (consequent trade-matching failures) पर चिंता व्यक्त की है। इस फैसले का सपोर्ट करने वालों का कहना है कि तेजी से सेटलमेंट होने से प्रतिपक्ष जोखिम (counterparty risk) और ट्रेडिंग लागत को कम किया जा सकता है।
कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड के ज्वाइंट प्रेसिडेंट सुरेश शुक्ला ने कहा कि इस बदलाव से ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी क्योंकि फंड्स और स्टॉक्स की रोलिंग तेजी से होगी।
ब्लूमबर्ग में छपी खबर के मुताबिक अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (US Securities And Exchange Commission) ने वन-डे सेटलमेंट साइकल (one-day settlement cycle) अपनाने के लिए स्टेकहोल्डर्स के विचार मांगे हैं। यूरोप में एक इंडस्ट्री बॉडी इस पर चर्चा कर रही है।
एसईसी के अध्यक्ष गैरी जेन्सलर (SEC Chair Gary Gensler) ने कहा, "सेटलमेंट साइकल को छोटा करने से क्लियरिंग हाउसेज के पास रखे जाने वाले मार्जिन की मात्रा भी कम होनी चाहिए। इस पर जोर देते हुए उन्होंने कहा "जैसा कि पुरानी कहावत है, time is money यानी कि समय ही पैसा है।