Monsoon Forecast: सरकार का मानसून कमजोर रहने का अनुमान! खाद, बीज और ट्रैक्टर कंपनियों के शेयर टूटे

Monsoon Forecast: सरकार ने मानसून का अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत का 90% कर दिया है। कमजोर बारिश और एल नीनो की आशंका से खाद, बीज और ट्रैक्टर कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। निवेशकों को फसल उत्पादन, ग्रामीण मांग और महंगाई की चिंता सता रही है। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड May 29, 2026 पर 3:54 PM
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कमजोर मानसून के अनुमान का सबसे ज्यादा असर खाद कंपनियों के शेयरों पर दिखा।

Monsoon Forecast: सरकार ने जून से सितंबर के मानसून सीजन के लिए बारिश का अनुमान घटा दिया है। इसके बाद शुक्रवार को खाद, बीज और ट्रैक्टर सेक्टर से जुड़ी कई कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। निवेशकों को चिंता है कि अगर बारिश उम्मीद से कम हुई तो फसल उत्पादन, किसानों की आय और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की मांग पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने इस साल मानसून के दौरान कुल बारिश का अनुमान दीर्घकालिक औसत (LPA) के 90% पर कर दिया है। अप्रैल में यह अनुमान 92% रखा गया था। इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी कहा है कि मानसून के दौरान एल नीनो की स्थिति बन सकती है, जो आमतौर पर भारत में कमजोर बारिश से जुड़ी होती है।

खाद कंपनियों के शेयरों में बिकवाली


कमजोर मानसून के अनुमान का सबसे ज्यादा असर खाद कंपनियों के शेयरों पर दिखा। FACT यानी फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर का शेयर दोपहर के कारोबार में 3.4% गिरकर 891.8 रुपये पर आ गया।

नेशनल फर्टिलाइजर्स (NFL) का शेयर 2.8% टूटकर 75.9 रुपये पर पहुंच गया। वहीं राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) का शेयर 2.6% गिरकर 129.2 रुपये पर आ गया। चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स का शेयर भी करीब 1% की गिरावट के साथ 473.4 रुपये पर कारोबार करता दिखा।

बीज कंपनियों पर भी दबाव

बारिश का अनुमान घटने के बाद बीज कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। कावेरी सीड कंपनी का शेयर 3.3% गिरकर 870.1 रुपये पर आ गया। बाजार को चिंता है कि अगर खरीफ सीजन में बुआई प्रभावित होती है तो बीजों की मांग पर भी असर पड़ सकता है।

ट्रैक्टर कंपनियां भी फिसलीं

ग्रामीण बाजार पर निर्भर ट्रैक्टर और कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। देश की प्रमुख ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों में शामिल एस्कॉर्ट्स कुबोटा का शेयर करीब 1% गिरकर 2,851.2 रुपये पर पहुंच गया।

वहीं आयशर मोटर्स का शेयर लगभग 3% टूटकर 7,205.5 रुपये पर कारोबार करता दिखा। इससे ग्रामीण मांग से जुड़ी कंपनियों में व्यापक कमजोरी देखने को मिली।

मानसून का इन कंपनियों से क्या संबंध है?

भारत में सामान्य या सामान्य से बेहतर मानसून को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अच्छी बारिश होने पर खेती का रकबा बढ़ता है, किसानों की आमदनी बेहतर होती है और खाद, बीज, ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन तथा अन्य ग्रामीण उत्पादों की मांग बढ़ती है।

इसी वजह से जब भी कमजोर मानसून की आशंका बनती है, निवेशक उन कंपनियों को लेकर सतर्क हो जाते हैं जिनका कारोबार सीधे तौर पर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा होता है।

किन इलाकों में कम बारिश की आशंका?

संशोधित पूर्वानुमान के मुताबिक मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत में सामान्य बारिश का अनुमान लगाया गया है।

मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि लेटेस्ट जलवायु मॉडल मानसून के दौरान एल नीनो की स्थिति बनने के संकेत दे रहे हैं।

महंगाई बढ़ने का भी खतरा

कम बारिश का अनुमान ऐसे समय आया है जब सरकार और नीति निर्माता पहले से ही खाद्य महंगाई को लेकर चिंतित हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर बारिश कमजोर रहती है तो कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे आने वाले महीनों में खाद्यान्न और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

इसी वजह से निवेशक अब सिर्फ फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि खाद, बीज और कृषि क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की मांग पर पड़ने वाले असर पर भी करीबी नजर बनाए हुए हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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