अगले 3-4 महीनों में डिस्क्रीशनरी सेगमेंट में 13-17 फीसदी और स्टेपल सेगमेंट में 7-9 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। अच्छे मानसून ( लंबी अवधि के औसत से 7 फीसदी ज्यादा), उत्पादन क्षमता के उपयोगिता स्तर में बढ़त (75 फीसदी) और क्रेडिट ग्रोथ में बढ़त (16.2 फीसदी) के चलते इस फेस्टिव सीजन में तमाम कंपनियों का आय में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। ये बातें FYERS के हेड ऑफ रिसर्च गोपाल कवलिरेड्डी (Gopal Kavalireddi) ने मनीकंट्रोल के साथ हुई बातचीत में कही हैं।
गोपाल कवलिरेड्डी का कहना है कि वर्तमान दिक्कतों को खतम होते ही निजी निवेश में और खपत के ट्रेंड में तेजी के साथ ही आगे हमें इंडिया इंक के कारोबार और कमाई में जोरदार ग्रोथ देखने को मिलेगी। इसके चलते कैलेंडर ईयर 2023 के बाद के हिस्से में निवेशकों अच्छे रिटर्न मिलते नजर आएंगे। बताते चलें की गोपाल कवलिरेड्डी को कैपिटल मार्केट का 20 सालों का अनुभव है। ये अमेरिका के ऊर्जा विभाग, Thermax Global और Siemens Gamesa के साथ काम कर चुके हैं।
इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि पिछले 22 कैलेंडर ईयर्स में डॉटकॉम बबल, ग्लोबल वित्तीय संकट, अर्निंग ग्रोथ में धीमी बढ़त के दौर और महामारी के झटके के बावजूद निफ्टी ने 16 फीसदी का एवरेज रिटर्न दिया है। इसमें 5 निगेटिव रिटर्न वाले और 8 औसत से कम रिटर्न वाले साल शामिल हैं। उम्मीद के मुताबिक कालेंडर ईयर 2022 भारत के स्टॉक मार्केट के लिए प्राइस और टाइम कंसोलीडेशन वाला साल बनता दिख रहा है। इसका इस साल का अब तक का फ्लैट रिटर्न तमाम ग्लोबल बाजारों के बड़े निगेटिव रिटर्न की तुलना में बेहतर है।
गोपाल कवलिरेड्डी ने आगे कहा कि वर्तमान ज्योपोलिटिकल तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ती महंगाई और दुनिया के तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में हो रही बढ़त अगले कैलेंडर ईयर में भी जारी रहने की उम्मीद है। इससे अगली एक-दो तिमाहियों में कंपनियों की अर्निंग पर भी असर पड़ेगा। वर्तमान दिक्कतों को खतम होते ही निजी निवेश में और खपत के ट्रेंड में तेजी के साथ ही आगे हमें इंडिया इंक के कारोबार और कमाई में जोरदार ग्रोथ देखने को मिलेगी। इसके चलते कैलेंडर ईयर 2023 के बाद के हिस्से में निवेशकों अच्छे रिटर्न मिलते नजर आएंगे।
गोपाल कवलिरेड्डी ने आगे कहा कि बढ़ता व्यापार घाटा, भारतीय करेंसी का अवमूल्यन, एफआईआई निवेश में लगातार आ रही कमी और कम होती लिक्विडिटी के कारण क्रेडिट ग्रोथ पर पड़ने वाले निगेटिव असर के अलावा बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में बढ़त बाजार के लिए बड़ी चुनौती बने रहेंगे।
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