भारत में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां नंवबर महीने में घटकर 56.5 पर आ गई है, जो इसके पिछले महीने 57.5 रही थी। यह संयुक्त रूप से पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है। बढ़ते कॉम्पिटीशन और कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी का असर फैक्ट्री उत्पादन पर पड़ा है, जिसके कारण यह गिरावट आई है। हालांकि त्यौहारी सीजन के कारण पिछले महीने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी लौटी थी, लेकिन यह फिर से सितंबर के 56.5 के स्तर पर आ गया।
नवंबर में मैन्युफैक्चरिंग स्थिर रहा
हालांकि, सीजन के हिसाब से एडजस्ट किया जाने वाला HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) लगातार 11वें महीने 55 अंक से ऊपर रहा।
सितंबर तिमाही में GDP की गिरावट के पीछे एक प्रमुख कारण मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में मंदी थी। सितंबर तिमाही में GDP ग्रोथ 5.4 प्रतिशत थी। मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां सितंबर तिमाही में घटकर 2.2 प्रतिशत पर आ गई, जो जून तिमाही में 7 प्रतिशत रही थी। इसके अलावा एक्सपोर्ट में गिरावट भी एक अन्य पहलु रहा, जो पिछली तिमाही में 8.7 प्रतिशत से घटकर 2.8 प्रतिशत रह गई।
नवंबर के सर्वे में एक्सपोर्ट के मोर्चे पर बेहतर गतिविधि दिखाई दी, भले ही कीमतों में बढ़ोतरी ने घरेलू बिक्री को सीमित कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है, "अंतर्राष्ट्रीय मांग में विस्तार की दर चार महीनों में सबसे अच्छी देखी गई, जिसमें पैनलिस्टों ने बांग्लादेश, चीन, कोलंबिया, ईरान, इटली, जापान, नेपाल, यूके और यूएस से लाभ की रिपोर्ट दी।"
PMI 400 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर नजर रखता है। एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी ने भी रोजगार को बढ़ावा दिया, भले ही नए रोजगार पैदा करने की दर पिछले महीने की तुलना में धीमी रही।
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