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RBI के फैसले से रुपये को सपोर्ट, लेकिन $14900 करोड़ के इस मार्केट को झटका, एक्सपर्ट का ये है रुझान

गिरते रुपये को संभालने के लिए आरबीआई ने कुछ ऐसे फैसले लिए जिससे रुपया तो संभला लेकिन इससे रुपये के $14.9 हजार करोड़ के ऑफशोर मार्केट पर झटका पड़ने की आशंका बनी है। जानिए आरबीआई के किस फैसले ने यह दबाव बनाया है, सख्ती से रुपया पर कितना असर पड़ा और एक्सपर्ट का क्या कहना है

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Apr 02, 2026 पर 3:34 PM
RBI के फैसले से रुपये को सपोर्ट, लेकिन $14900 करोड़ के इस मार्केट को झटका, एक्सपर्ट का ये है रुझान
भारत में बैंकों को ट्रेडिंग के सबसे मशहूर तरीके रुपी ऑफशोर को ऑफर करने से रोक दिया गया है। इससे हर दिन बाजार पर $14.9 हजार करोड़ का दबाव पड़ने की आशंका है। (File Photo- Pexels)

भारत में बैंकों को ट्रेडिंग के सबसे मशहूर तरीके रुपी ऑफशोर को ऑफर करने से रोक दिया गया है। इससे हर दिन बाजार पर $14.9 हजार करोड़ का दबाव पड़ने की आशंका है। वहीं केंद्रीय बैंक RBI ने यह कदम गिरते रुपये को संभलाने के लिए सख्ती के तौर पर उठाया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सट्टेबाजी पर रोक लगाने और रुपये को सहारा देने के लिए पिछले एक दशक में सबसे कड़े कदमों में से एक उठाया है। यह फैसला ऐसे समय में आरबीआई ने लिया, जब इस वर्ष रुपया लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचता रहा। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई से रुपये पर दबाव और बढ़ा है।

RBI ने क्या कदम उठाए और रुपये पर क्या असर पड़ा?

शुक्रवार को आरबीआई ने लेंडर्स के डेल ऑनशोर करेंसी पोजिशंस की अधिकतम सीमा $10 करोड़ तय कर दी। इस फैसले से बैंकों को कम से कम $3000 करोड़ के आर्बिट्राज ट्रेड को फटाफट बंद करना पड़ा। जब इससे भी रुपये की गिरावट नहीं रुकी, तो बैंकों को कुछ नॉन-डिलीवेरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स देने से मना कर दिया गया, जोकि ऑफशोर में औसतन $14.9 हजार करोड़ प्रतिदिन का बाजार है या्नी कि ऑनशोर मार्केट से लगभग दोगुना। दो दिनों की छुट्टियों के बाद जब करेंसी ट्रेडिंग शुरू हुई, तो गुरुवार को रुपये में 12 वर्षों की सबसे बड़ी तेजी दिखी। यह करीब 2% बढ़कर प्रति डॉलर 93.25 पर पहुंच गया, जबकि इससे पहले हफ्ते की शुरुआत में यह 95 प्रति डॉलर से ऊपर रिकॉर्ड निचले स्तर पर था।

क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

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