वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारत के कैपिटल मार्केट वर्तमान में तेजी के दौर में हैं और इनमें आम सहमति से कहीं अधिक संभावनाएं हैं। पिछले डेढ़ साल में आई तेजी को मैक्रो स्थिरता पर नीतिगत फोकस का सपोर्ट है। ब्रोकरेज ने बताया, "मैक्रो स्थिरता ने महंगाई की अस्थिरता को कम किया है, जिससे भारत की ग्रोथ अधिक प्रेडिक्टेबल हो गई है। महंगाई में कम अस्थिरता का मतलब है कि बाजार- जिसमें इक्विटी, रुपया और सरकारी बॉन्ड शामिल हैं, अब पहले से कम अस्थिर हैं।"
अधिक प्रेडिक्टेबल ग्रोथ का मतलब है कि अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारत का बीटा गिर गया है और इक्विटी वैल्यूएशन बढ़ गई है। निवेशकों के भारत में हाई वैल्यूएशन को पचाने के पीछे का कारण भारत का मजबूत अर्निंग्स आउटलुक है। यह उभरते प्राइवेट कैपेक्स साइकिल, कॉरपोरेट बैलेंस शीट की री-लीवरेजिंग और विवेकाधीन खपत में स्ट्रक्चरल बढ़त का नतीजा है।
आने वाले दशक में ग्लोबल ग्रोथ का वन-फिफ्थ आएगा भारत से
इसके अलावा मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, आने वाले दशक में भारत वैश्विक विकास के पांचवें हिस्से का चालक बनने वाला है। भारत का डीप टेक सेक्टर भी नई लिस्टिंग या आईपीओ और नई ग्रोथ इंडस्ट्रीज जैसे बड़े पॉजिटिव सरप्राइज पैदा कर सकता है। मॉर्गन स्टेनली ने कहा, "हमारा मानना है कि जीडीपी की घटती ऑयल इंटेंसिटी और ग्लोबल ट्रेड का हाई शेयर जैसे बदलते एक्सटर्नल डायनैमिक्स भी, कॉरपोरेट आय के लिए बहुत सकारात्मक हैं। ये बदलाव अगले 4-5 वर्षों के लिए 18-20 प्रतिशत अर्निंग्स सीएजीआर को बनाए रख सकते हैं और बाजार को ऊपर ले जा सकते हैं।"
इसके अलावा भारत पिछले कई वर्षों में प्राइवेट इक्विटी, वेंचर कैपिटल फंड्स और सॉवरेन फंड्स के लिए एक उपयोगी बाजार साबित हुआ है। इन्होंने हाल के वर्षों में भारत से मुनाफे के साथ एग्जिट किया है। मॉर्गन स्टेनली को उम्मीद है कि ये समूह आने वाले दशक में अपनी गतिविधि को बढ़ाएंगे। ब्रोकरेज ने कहा, "भारतीय बाजार समय के साथ दुनिया भर में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयर बाजारों में से एक है। हमें उम्मीद है कि रिटर्न मध्यम होगा लेकिन मजबूत रहेगा। हमारे बेस केस में, भारतीय इक्विटी आने वाले दशक में लो डबल डिजिट में ग्रो कर सकती है।"