IndiGo Q1 Results: इंडिगो को ₹382 करोड़ का घाटा, ईरान युद्ध से लगा बड़ा झटका

IndiGo Q1 Results: देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो रेवेन्यू 20% बढ़ने के बावजूद ₹382 करोड़ का घाटा हुआ। जेट फ्यूल खर्च 86% उछला और ईरान युद्ध का असर कंपनी के मुनाफे पर साफ दिखा। जानिए तिमाही नतीजों की बड़ी बातें और आगे का आउटलुक।

अपडेटेड Jul 23, 2026 पर 4:40 PM
इंडिगो का शेयर गुरुवार को नतीजे आने से पहले 1.70% की गिरावट के साथ 5,030 रुपये पर बंद हुआ।

IndiGo Q1 Results: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation को जून 2026 तिमाही में 382 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 2,161 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। महंगा जेट फ्यूल, रुपये में कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव इसका बड़ा कारण रहे।

रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन खर्च ज्यादा

जून तिमाही में इंडिगो का रेवेन्यू 20% बढ़कर 24,584 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 20,496 करोड़ रुपये था। लेकिन खर्च 35.1% बढ़ गया। सबसे ज्यादा असर जेट फ्यूल पर पड़ा। विमान ईंधन का खर्च 86% उछलकर 10,830 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी वजह से कंपनी मुनाफे से घाटे में चली गई।


ऑपरेशन में क्या रहा?

जून तिमाही में इंडिगो की क्षमता (ASK) 2.9% बढ़कर 43.5 अरब रही। यात्रियों की संख्या 0.7% बढ़कर 3.13 करोड़ हो गई। वहीं Yield 21.3% बढ़कर 6.04 रुपये रही। हालांकि Load Factor 1.3 प्रतिशत अंक घटकर 83.3% पर आ गया।

30 जून 2026 तक कंपनी के पास 52,885 करोड़ रुपये का कुल कैश था। इसमें 39,039 करोड़ रुपये फ्री कैश और 13,846 करोड़ रुपये प्रतिबंधित (Restricted) कैश शामिल था। यानी नकदी के मोर्चे पर कंपनी की स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में IndiGo ने कहा कि महंगा ईंधन, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया का संघर्ष इस तिमाही में मुनाफे पर भारी पड़ा।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने कहा कि तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। ईंधन की कीमतें ऊंची रहीं और मध्य-पूर्व में उड़ानों पर भी असर पड़ा। इसके बावजूद यात्रियों की मांग मजबूत बनी रही। बेहतर किरायों की वजह से रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी हुई। इस दौरान IndiGo ने 3.13 करोड़ यात्रियों को सफर कराया।

उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल लागत पर नियंत्रण और क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने पर फोकस कर रही है। हालांकि महंगे ईंधन और रुपये में कमजोरी की वजह से अकेले इस तिमाही में करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।

इंडिगो के लिए आगे क्या?

इंडिगो का कहना है कि भारत और पश्चिम एशिया के बीच यात्रा पर अभी भी असर बना हुआ है। दूसरी तिमाही में मांग भी सामान्य से कमजोर रहने की उम्मीद है। इसलिए Q2FY27 में कंपनी की क्षमता पिछले साल के मुकाबले लगभग बराबर रह सकती है।

हालांकि IndiGo को उम्मीद है कि इसके बाद हालात सुधरेंगे। जैसे-जैसे यात्रा की मांग बढ़ेगी, विमानों का इस्तेमाल भी धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा।

इंडिगो का शेयर गुरुवार को नतीजे आने से पहले 1.70% की गिरावट के साथ 5,030 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 14.70% टूट चुका है।

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