जोमैटो (Zomato), पेटीएम (Paytm) और नायका (Nyakaa) जैसे नए जमाने की अधिकतर बिजनेस कंपनियों के शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। कई कंपनियों के शेयरों की कीमत तो उनकी लिस्टिंग प्राइस या उनके आईपीओ इश्यू प्राइस से भी नीचे आ गई है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी Zomato के शेयर अपने 76 रुपये के इश्यू प्राइस से भी नीचे आ गए हैं। वहीं पेटीएम के शेयर अपनी लिस्टिंग के बाद से ही अब तक इश्यू प्राइस के आसपास भी नहीं पहुंच पाए हैं और उसमें लगातार गिरावट ही आ रही है।
स्वास्तिका इनवेस्टमार्ट के रिसर्च हेड, संतोष मीणा ने बताया, "हम सभी जानते थे कि ये सभी कंपनियों मार्केट में तेजी के बीच काफी महंगे वैल्यूएशन पर आई हैं और इनमें से कुछ भी आगे टिकी रहेंगी। जोमैटो और स्टार हेल्थ (Star Health) यहां मौजूदा स्तर पर आकर्षक दिख रहे हैं, जिनमें लंबी अवधि में निवेशकों के लिए वेल्थ क्रिएट करने की संभावना दिखती है। Nyakaa भी एक मुनाफा बनाने वाली कंपनी और यह भी निवेशकों के पोर्टफोलियो का हिस्सा हो सकती है। हालांकि अगर आप Paytm की बात करें तो अभी भी उसके बिजनेस आउटलुक और उसके मुनाफे में आने की समयसीमा को लेकर स्पष्टता नहीं है।"
अमेरिका फेडरल रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को बढ़ाने का संकेत दिया है। इसके चलते दुनिया भर में निवेशक अधिक जोखिम और वैल्यूएशन वाले शेयरों से पैसा खींच रहे हैं। नए जमाने की टेक कंपनियों और खासतौर से वो कंपनियां, जो अभी मुनाफे में नहीं हैं, उनमें भारी बिकवाली देखी जा रही है। एनालिस्ट्स का कहना है कि ये ट्रेंड अभी कुछ समय तक और जारी रह सकता है।
मेहता इक्विटीज लिमिटे के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च), प्रशांत तप्सी ने बताया, "हाल में लिस्ट हुए कुछ नए जमाने के बिजनेस शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है। इसके पीछे घरेलू के साथ-साथ ग्लोबल कारण भी हैं। जोमैटो के शेयरों में गिरावट तीसरी तिमाही में ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) कमजोर रहने के बाद आई है। चौथी तिमाही में भी जोमैटो का आउटलुक समान ही दिखता है, इसलिए हमारा इसे लेकर न्यूट्रल रुख है। हालांकि अगर ग्लोबल मार्केट की स्थिति में कुछ सुधार होता है, तो हमें निकट भविष्य में यह 80 से 92 रुपये के बीच में कारोबार करता हुआ दिख सकता है।"
इसी तरह स्टार हेल्थ के शेयरों में पिछले एक महीने में 14 फीसदी की गिरावट आई है और यह अपने इश्यू प्राइस और लिस्टिंग प्राइस दोनों से नीचे चला गया है।
पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस मुहैया कराने वाली और सेबी के साथ रजिस्टर्ड फर्म, ग्रीन पोर्टफोलियो के फाउंडर, दीवाम शर्मा ने बताया, "स्टार हेल्थ IPO की कीमत आक्रामक रूप से रखी गई थी। कोरोना महामारी के दौरान कंपनी को वनटाइम-क्लेम सेटलमेंट के दावों में तेज बढ़ोतरी के साथ-साथ तगड़े कॉम्पिटीशन का भी सामना करना पड़ा था। निवेशकों को स्टॉक में नई खरीदारी करने से पहले इसके तिमाही नतीजों में मुनाफे की वापसी का इंतजार करना चाहिए। इसकी समकक्ष कंपनियों की प्राइस टू बुक वैल्यू से तुलना करने पर इसका वैल्यूएशन अभी भी महंगा लग रहा है।"