Investment Mantra : इस बाजार में हाइब्रिड फंड्स कितना बेहतर,फोकस्ड फंड्स में बनता है पैसा या बढ़ता है जोखिम?
Investment Mantra : हाइब्रिड फंड्स इक्विटी और डेट का मिक्स होते हैं। इसमें ग्रोथ और स्थिरता दोनों मिलते हैं। इसमें कभी-कभी सोना/REITs भी शामिल होते हैं। फोकस्ड फंड का निवेश अधिकतम 30 शेयरों में होता है। कम शेयरों में निवेश का मतलब ज्यादा फोकस
Investment Mantra: फोकस्ड फंड्स में बाजार से ज्यादा रिटर्न की संभावना होती है। क्वालिटी शेयरों पर फोकस होता। इनकी स्ट्रैटेजी समझना आसान होता है
Investment Mantra : हाइब्रिड फंड्स (Hybrid Funds) और फोकस्ड फंड्स (Focused Funds) दोनों ही आज निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि आपके पोर्टफोलियो के लिए कौन ज्यादा सही है? हाइब्रिड फंड्स जहां इक्विटी और डेट का संतुलन देते हैं, वहीं फोकस्ड फंड कम स्टॉक्स में हाई कन्विक्शन के साथ बेहतर रिटर्न की कोशिश करते हैं। दोनों क्या हैं और निवेशक किसे चुनें इस पर बात करने के लिए हमारे साथ हैं आनंदराठी वेल्थ के ज्वाइंट CEO फिरोज अजीज।
हाइब्रिड फंड्स क्या होते हैं?
हाइब्रिड फंड्स इक्विटी और डेट का मिक्स होते हैं। इसमें ग्रोथ और स्थिरता दोनों मिलते हैं। इसमें कभी-कभी सोना/REITs भी शामिल होते हैं। एक ही फंड में डाइवर्सिफाइड निवेश होता है।
हाइब्रिड फंड्स के प्रकार
कंजर्वेटिव: कम इक्विटी, ज्यादा डेट (सुरक्षित)
बैलेंस्ड: इक्विटी और डेट लगभग बराबर
एग्रेसिव: ज्यादा इक्विटी (थोड़ा रिस्क)
डायनामिक: बाजार के हिसाब से बदलाव
मल्टी एसेट: इक्विटी, गोल्ड, डेट का मिश्रण
आर्ब्रिटेज: कम रिस्क, शॉर्ट टर्म स्ट्रैटेजी
इक्विटी सेविंग्स: इक्विटी, हेजिंग, डेट का मिश्रण
हाइब्रिड फंड्स के फायदे
इनमें कम रिस्क के साथ ग्रोथ और स्थिरता मिलती है। अलग-अलग फंड मैनेज नहीं करने पड़ते। रीबैलेंसिंग से मुक्ति,फंड मैनेजर खुद करता है।
हाइब्रिड फंड्स के नुकसान
इसमें टैक्स में कंफ्यूजन होता है। इक्विटी,डेट मिश्रण के चलते टैक्स अलग-अलग हो सकते हैं। हर कैटेगरी में टैक्स अलग-अलग हो सकता है। कंजर्वेटिव फंड्स पर डेट फंड जैसा टैक्स लगेगा। बाकी में इक्विटी जैसा टैक्स लग सकता है।
एसेट एलोकेशन
इसमें एसेट एलोकेशन पर कंट्रोल नहीं होता। सब कुछ फंड मैनेजर के हाथ में होता है। आपकी स्ट्रैटेजी के हिसाब से फंड हो,ये जरूरी नहीं है।
डाइवर्सिफेशन सीमित
ज्यादातर पैसा लार्जकैप में लगता है। मिडकैप,स्मॉलकैप में एक्सपोजर कम होता है। रिटर्न मिलने की संभावना सीमित हो जाती है।
क्या होता हैं फोकस्ड फंड्स?
फोकस्ड फंड का निवेश अधिकतम 30 शेयरों में होता है। कम शेयरों में निवेश का मतलब ज्यादा फोकस। फंड मैनेजर के बेस्ट आइडिया में पैसा लगता है
फोकस्ड फंड्स में रुझान बढ़ा
हाल के दिनों में फोकस्ड फंड्स में रुझान बढ़ा है। 2020 में 20 फोकस्ड फंड थे। 2026 में इनकी संख्या बढ़ कर 29 हो गई। 2020 में इन्होंने 45 फीसदी रिटर्न दिया। वहीं, 2026 में इन्होंने 260 फीसदी रिटर्न दिया। 2020 में इनकी AUM 48,360 करोड़ रुपए थी जो 2026 में बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपए हो गई।
फोकस्ड फंड्स के फायदे
फोकस्ड फंड्स में बाजार से ज्यादा रिटर्न की संभावना होती है। क्वालिटी शेयरों पर फोकस होता। इनकी स्ट्रैटेजी समझना आसान होता है। यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा होता है।
फोकस्ड फंड्स के नुकसान
फोकस्ड फंड्स मैनेजर पर ज्यादा निर्भर होते हैं। इनमें डाइवर्सिफिकेशन कम होता है। गलत शेयर चुनने का बड़ा नुकसान हो सकता है।
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