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"लिस्टिंग के बाद शेयर खरीदना ज्यादा अच्छी रणनीति", IPO खुमार में डूबे रिटेल निवेशकों को SEBI चेयरपर्सन की सलाह

शेयर बाजार में इन दिनों लगातार नई कंपनियां आ रही हैं। इनके इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPOs) में पैसा लगाने के लिए निवेशकों में भी होड़ मची है। सिर्फ इस हफ्ते (20 से 24 नवंबर) खुले 5 आईपीओ में निवेशकों ने 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक लगाई थी। अब सेबी (SEBI) की चेयरपर्सन माधाबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने रिटेल निवेशकों को इस होड़ से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Nov 25, 2023 पर 11:18 PM
"लिस्टिंग के बाद शेयर खरीदना ज्यादा अच्छी रणनीति", IPO खुमार में डूबे रिटेल निवेशकों को SEBI चेयरपर्सन की सलाह
SEBI चेयरपर्सन ने कहा कि IPO में वैल्यूएशन तय करने का तरीका हमेशा सही नहीं होता है

शेयर बाजार में इन दिनों लगातार नई कंपनियां आ रही हैं। इनके इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPOs) में पैसा लगाने के लिए निवेशकों में भी होड़ मची है। सिर्फ इस हफ्ते (20 से 24 नवंबर) खुले 5 आईपीओ में निवेशकों ने 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक लगाई थी। अब सेबी (SEBI) की चेयरपर्सन माधाबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने रिटेल निवेशकों को इस होड़ से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है। सेबी चेयरपर्सन ने कहा कि IPO के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन निकालने का तरीका परफेक्ट नहीं होता है। ऐसे में सही रणनीति यह होगी कि रिटेल निवेशक इन कंपनियों के शेयर प्राइस को सेटल होने दे हैं और स्टॉक मार्केट के जरिए इसमें निवेश करें।

माधाबी पुरी बुच ने सेबी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की हुई एक बैठक के बाद मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ये बाते कहीं।

उन्होंने कहा, "IPO में वैल्यूएशन तय करने का तरीका हमेशा सही नहीं होता है। यदि संस्थागत निवेशक को खरीदारी करनी है, तो उन्हें बड़ी खरीदारी करनी होगी... वे सेकेंडरी मार्केट में खरीदारी नहीं कर सकते। लेकिन रिटेल निवेशकों को तो छोटी मात्रा में शेयर खरीदने होते हैं। इसलिए बेहतर रणनीति यह है कि वे IPO के बाद कीमतों के स्थिर होने का इंताज करें। तिमाही नतीजे आदि देखें... और फिर सेकेंडरी मार्केट के जरिए निवेश करें।"

आईपीओ बाजार में भीड़ पर बुच ने कहा, "नियामक को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि हम अवसर से दूर हो सकते हैं, लेकिन बाजार में एक नैचरुल चेक एंड बैलेंस है। इनवेस्टमेंट बैंकर यह आकलन करते हैं, कि कहीं बाजार में अधिक भीड़ तो नहीं है।"

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