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ईरानी क्रांति से इराक युद्ध तक... इन 5 मौकों पर 25 से 300% तक उछले थे कच्चे तेल के दाम

अरब ऑयल एंबार्गो से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध तक हर बड़े संकट में कच्चा तेल 25 से 300 प्रतिशत तक उछला। अब अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रेंट 100 डॉलर पहुंच सकता है, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। जानिए डिटेल।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड Mar 02, 2026 पर 2:48 PM
ईरानी क्रांति से इराक युद्ध तक... इन 5 मौकों पर 25 से 300% तक उछले थे कच्चे तेल के दाम
ICRA का कहना है कि भारतीय रिफाइनर अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल मंगा सकते हैं।

1970 के दशक का अरब ऑयल एंबार्गो हो, ईरानी क्रांति हो, 1980 का ईरान-इराक युद्ध, 1990 का खाड़ी युद्ध, 2011 का लीबिया संकट या 2022 से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध - हर बार एक चीज कॉमन रही। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल। अब सवाल यही है कि क्या अमेरिका-ईरान टकराव भी वही कहानी दोहराएगा?

ऑयल सेक्टर के जानकारों का कहना है कि अगर युद्ध एक महीने से ज्यादा खिंचता है तो भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम के कारण तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। इतिहास बताता है कि ऐसे संकटों में कीमतें 25 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक उछली हैं। इसका सीधा असर भारत जैसी आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

क्रूड ऑयल में ईरान की अहमियत क्या है?

वैश्विक तेल उत्पादन में ईरान की हिस्सेदारी करीब 2.5 प्रतिशत है, जो दस साल पहले से लगभग आधी रह गई है। लेकिन असली ताकत उत्पादन नहीं, रास्ते में है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही होती है।

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