US-Iran War impact on Stock Market: पश्चिमी एशिया में तेज उथल-पुथल पर कच्चे तेल उबल पड़े। कच्चे तेल की कीमतों तेज उछाल के चलते आज पेंट कंपनियों, टायर कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। कच्चे तेल के भाव में उछाल ने इनपुट लागत, महंगाई और मार्जिन पर दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ाए तो इनसे जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो इनमें बिकवाली का भारी दबाव दिखा। सेंसेक्स (Sensex) 2700 प्वाइंट्स से अधिक फिसलकर 78550 के नीचे 78,543.73 तो निफ्टी 50 भी डेढ़ फीसदी से अधिक फिसलकर 24650 के नीचे 24,645.10 तक आ गया।
इस कारण टूट गए पेंट, टायर और ऑयल मार्केटिंग स्टॉक्स
एशियन पेंट्स के शेयर 2.87% गिरकर ₹2,307.9 पर आ गए तो बर्जर पेंट्स के शेयर 2.13% और कंसाई नेरोलैक के शेयर 3.62% टूट गए। एग्जो नोबेल इंडिया के शेयर भी 1.17% फिसल गए। पेंट बनाने वाली कंपनियों पर कच्चे तेल से जुड़े प्रोडक्ट्स जैसेकि सॉल्वैंट्स और रेजिन से सीधा असर होता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से कच्चे माल की लागत बढ़ जाती है और यदि इसे ग्राहकों पर तुरंत नहीं डाला गया तो कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकता है।
कच्चे तेल में उछाल से टायर कंपनियों के शेयरों पर सबसे अधिक असर पड़ा। जेके टायर के शेयर 5.63%, सीईएटी के शेयर 2.56% और अपोलो टायर्स के शेयर 1.98% गिर गए। ऐसा इसलिए क्योंकि टायर कंपनियां कच्चे तेल से बने सिंथेटिक रबर और पेट्रोकेमिकल इनपुट पर बहुत अधिक निर्भर रहती हैं। महंगे तेल से लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाता है, जिससे मुनाफे पर दबाव और बढ़ जाता है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की बात करें तो इंडियन ऑयल के शेयर 4.26%, भारत कॉरपोरेशन 2.93% और हिंदुस्तान पेट्रोलियम 2.45% टूट गए। कच्चे तेल के महंगे होने और इसका खुदरा कीमतों में एडजस्ट नहीं होने पर इनके मार्जिन में गिरावट का रिस्क है।
कितना महंगा हुआ कच्चा तेल?
वैश्विक व्यापार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 6% से अधिक बढ़कर प्रति बैरल लगभग $77-$78 हो गई। कुछ समय के लिए तो यह प्रति बैरल $82 के पार भी पहुंच गई थी। सैन्य तनाव से इसकी वैश्विक सप्लाई में दिक्कत का खतरा मंडरा रहा है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया है। सबसे अहम अड़चन तो ये आई कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया, जिससे तेल की वैश्विक सप्लाई का लगभग 20% गुजरता है।
Rystad Energy के जियो-पॉलिटिकल एनालिस्ट जॉर्ज लियोन ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि यदि तनाव कम होने के जल्द संकेत नहीं मिलते हैं, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल ने चेतावनी दी है कि होर्मुज संकट बना रहा तो ब्रेंट क्रूड की कीमत प्रति बैरल $90 से ऊपर जा सकती है, और स्थिति अधिक गंभीर होने पर यह $100 से भी अधिक हो सकता है। भारत के लिए बात करें तो कच्चे तेल के भाव में हर $1 के उछाल पर सालाना इंपोर्ट बिल पर करीब $200 करोड़ का दबाव बढ़ता है।
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