गोल्डमैन सैक्स (Sachs) के चीफ एशिया पैशिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो (Timothy Moe) का मानना है कि भारत के लिए 2023 में दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल होगा। केंद्रीय बैंकों की तरफ ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बीच भारतीय शेयरों का वैल्यूएशन काफी महंगा हो गया है। इसका असर भारत के इक्विटी मार्केट के प्रदर्शन पर देखने को मिलेगा। हालांकि टिमोथी मो की राय है कि महंगाई अब अपने चरम पर है। यहां से अब इसमें और बढ़त नहीं होगी। लेकिन उनका ये भी मानना है कि आरबीआई अपनी नीति दरों में अभी 25-25 बेसिस प्वाइंट्स की दो और बढ़त कर सकता है। बता दें कि RBI की मॉनीटरी कमिटी ने 7 दिसंबर को रेपो रेट में 35 बेसिस प्वाइंट (0.35 फीसदी) की बढ़ोत्तरी की थी जिसके चलते रेपो रेट बढ़कर 6.25 फीसदी पर पहुंच गई है।
महंगाई पर नियंत्रण के लिए अभी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की जरूरत
CNBC TV18 के साथ हुई बातचीत में टिमोथी मो ने कहा कि "मुझे लगता है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए अभी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की जरूरत है।" हालांकि टिमोथी मो ग्रोथ और अर्निंग के नजरिए से क्षेत्र के दूसरे बाजारों की तुलना में भारत पर ज्यादा बुलिश हैं। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो भारत और भारतीय बाजार की ग्रोथ संभावनाएं काफी अच्छी हैं। भारतीय बाजार और इकोनॉमी एशिया के सबसे बेहतर बाजारों और इकोनॉमी में से एक है। टिमोथी मो ने कहा "2024 में एक मजबूत रिकवरी होगी लेकिन भारत की कम्पाउंडेड ग्रोथ हमारी उम्मीद से कुछ कम रहेगी।"
अर्थव्यवस्था को फिर से खोलना चीन के लिए फायदेमंद होगा लेकिन इससे भारतीय बाजारों पर बन सकता है दबाव
इस बीच CNBC TV18 से चीन के बारे में बात करते हुए जूलियस बेयर (Julius Baer) के प्रबंध निदेशक मार्क मैथ्यूज (Mark Matthews) ने कहा कि अर्थव्यवस्था को फिर से खोलना चीन के लिए फायदेमंद होगा लेकिन इससे भारतीय बाजारों पर दबाव बन सकता है। उन्होंने आगे कहा कि कोरिया और ताइवान जैसे इस साल बुरी तरह पिटे बाजार अगले साल चीन के फिर से खुलने के चलते भारत से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा अगली गर्मियों में भारत किसी भी समय ग्लोबल इकोनॉमी में सिक्लिकल बॉटम हिट कर सकता है। इसकी वजह से भी हमारे प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। मैथ्यूज का कहना है कि वह भारतीय अर्थव्यवस्था को पसंद करते हैं क्योंकि यह चीन के विपरीत एक पूंजीवादी और व्यापार-समर्थक अर्थव्यवस्था है।
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