Rupee At Record Low: रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले गिरकर 96.05 पर पहुंचा

Rupee At Record Low: 15 मई को अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.86 के लेवल पर खुला। उसके बाद इस पर दबाव बढ़ गया। करीब तीन बजे इसने 96 का लेवल पार कर लिया। इससे पहले रुपया इस लेवल पर नहीं आया था

अपडेटेड May 15, 2026 पर 3:44 PM
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15 मई को लगातार चौथे दिन रुपये में गिरावट आई।

Rupee At Record Low: रुपया गिरकर 15 मई को रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। डॉलर के मुकाबले यह पहली बार 96 के पार पहुंचा है। इसकी वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है। इससे लगातार चौथे दिन रुपये में गिरावट आई। हालांकि, यह डॉलर के मुकाबले 21 पैसे गिरकर 95.97 के लेवल पर क्लोज हुआ। रुपया पहली पर इस लेवल पर बंद हुआ।

पहली बार रुपया 96 के पार

15 मई को अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.86 के लेवल पर खुला। उसके बाद इस पर दबाव बढ़ गया। करीब तीन बजे इसने 96 का लेवल पार कर लिया। इससे पहले रुपया इस लेवल पर नहीं आया था। फॉरेक्स डीलर का कहना है कि डॉलर की डिमांड बढ़ी है, जिससे रुपया गिर रहा है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और शेयर बाजार में विदेशी फंडों की बिकवाली का असर भी रुपये पर पड़ा है।


एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन

रुपया लगातार गिरावट की वजह से एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन वाली करेंसी बन गया है। बीते कुछ हफ्तों में इसमें तेज गिरावट आई है। इसकी वजह भारत का बढ़ता इंपोर्ट बिल है। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इसका असर रुपये पर पड़ रहा है।

कमजोरी जारी रहने के आसार

क्रूड की बढ़ती कीमतों के साथ घरेलू शेयर बाजार में विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली से भी रुपया पर दबाव बढ़ा है। फिलहाल अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद नहीं दिख रही। इससे क्रूड की कीमतें ऊंचे लेवल पर बनी रह सकती हैं या और ऊपर जा सकती हैं। इससे रुपये पर दबाव और बढ़ेगा।

विदेश में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स मुश्किल में

रुपये में कमजोरी का असर विदेश में पढ़ाई करने, विदेश में इलाज करने, विदेश घूमने जाने वाले लोगों पर पड़ेगा। उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। खासकर विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय स्टूडेंट्स के माता-पिता पर दबाव काफी बढ़ गया है। बीते एक साल में रुपया 11 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

महंगाई बढ़ सकती है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये में कमजोरी का असर उन लोगों पर भी पड़ेगा, जो न तो विदेश में पढ़ाई करते हैं या वहां छुट्ट्यिां मनाने जा रहे हैं। रुपये में कमजोरी से आयातित चीजों की कीमतें घरेलू बाजार में बढ़ जाएंगी। इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा। भारत खाद्य तेल और दलहन का काफी ज्यादा आयात करता है। रुपया कमजोर होने से दोनों की कीमतों में उछाल आएगा।

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निर्यातकों को होगा फायदा

निर्यातकों को रुपये में कमजोरी से फायदा होता है। इससे उनकी कमाई बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि आईटी और फार्मा सेक्टर को रुपये में कमजोरी से फायदा होगा। आईटी कंपनियां और फार्मा कंपनियों के रेवेन्यू में एक्सपोर्ट की बड़ी हिस्सेदारी है।

 

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