जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) की खरीद से जुड़े मामले में वेदांता लिमिटेड को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) ने फिर खाली हाथ लौटा दिया है। NCLAT ने वेदांता लिमिटेड की दो याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं। कंपनी ने इनमें कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की बोली के सिलेक्शन को चुनौती दी थी। अदाणी समूह ने JAL की खरीद के लिए 14,535 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। अदाणी एंटरप्राइजेज ने JAL के लिए लगाई बोली में वेदांता लिमिटेड और डालमिया भारत को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की।
JAL के ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स जैसे प्रमुख रियल एस्टेट प्रोजेक्ट हैं। इसके मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 4 सीमेंट प्लांट हैं। साथ ही मध्य प्रदेश में पट्टे पर ली गईं चूना पत्थर की कुछ खदानें हैं। इसके अलावा, इसने जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड, यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग लिमिटेड, जेपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड और कई अन्य कंपनियों सहित सब्सिडियरी कंपनियों में भी निवेश किया है। इसकी होटल डिवीजन की दिल्ली-NCR, मसूरी और आगरा में 5 प्रॉपर्टी हैं।
NCLAT ने वेदांता की ओर से उठाए गए मुद्दों में कोई आधार नहीं पाया और उसकी दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया। ट्राइब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण और टेक्निकल मेंबर बरुण मित्रा की दो-सदस्यीय पीठ ने पाया कि ऋणदाताओं की समिति (कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स/CoC) ने JAL के लिए वेदांता के रिजॉल्यूशन प्लान के मुकाबले अदाणी समूह की बोली को प्राथमिकता देकर सही फैसला किया था।
NCLT ने मार्च में अदाणी द्वारा खरीद को दी थी मंजूरी
अदाणी ग्रुप की बोली मंजूर किए जाने के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने 17 मार्च 2026 को मंजूरी दे दी थी, जिसके खिलाफ वेदांता ने NCLAT में अपील दायर की थी। NCLAT ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ अपीलकर्ता (वेदांता) द्वारा ऐसा कोई आधार नहीं बनाया गया है, जिससे NCLT के फैसले में हस्तक्षेप किया जा सके। अपील में कोई दम नहीं है। दोनों अपीलें खारिज की जाती हैं। कोई आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है।’’ आगे कहा कि CoC का निर्णय विभिन्न समाधान योजनाओं के समग्र मूल्यांकन और उनकी व्यावसायिक समझ पर आधारित था।
जेपी समूह की प्रमुख कंपनी JAL को 57,185 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान में चूक के बाद जून 2024 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल किया गया था। रिजॉल्यूशन प्रोसेस में 28 कंपनियों ने रुचि दिखाई, जिनमें से वेदांता, अदाणी एंटरप्राइजेज सहित 6 अंतिम बोलीदाता चुने गए। अदाणी और वेदांता प्रमुख दावेदार के रूप में उभरे।
CoC ने ठुकरा दिया था वेदांता का रिवाइज्ड प्रपोजल
इसके बाद CoC ने 93.81 प्रतिशत मतों के साथ नवंबर 2025 में अदाणी के रिजॉल्यूशन प्लान को बेहतर मानते हुए मंजूरी दी। वेदांता ने बाद में 16,070 करोड़ रुपये का संशोधित प्रस्ताव रखा लेकिन लेनदारों ने समय सीमा के बाद बदलावों पर रोक वाले नियमों का हवाला देते हुए इस पर विचार करने से इनकार कर दिया। वेदांता ने तर्क दिया कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और उसकी संशोधित बोली बेहतर वैल्यू प्रदान करती थी। लेनदारों ने इसका खंडन करते हुए कहा कि संशोधित प्रस्ताव तब पेश किया गया, जब वेदांता को पता चला कि वह विनिंग बिड से पीछे चल रही है।
इससे पहले 24 मार्च, 2026 को NCLAT ने वेदांता समूह की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसमें NCLT के 17 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि NCLAT ने कहा था कि अंतिम फैसला अपील के परिणाम पर निर्भर करेगा। वेदांता, JAL की खरीद के लिए अदाणी समूह की बोली पर रोक लगाने से इनकार के NCLAT के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दे चुकी है लेकिन कोर्ट ने अप्रैल की शुरुआत में NCLAT के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। साथ ही JAL की निगरानी समिति पर NCLAT की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय लेने पर भी रोक लगा दी।