रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के शेयरों में नवंबर 2022 से अबतक 18 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके साथ ही इसका प्राइस-टू-अर्निंग रेशियो लंबी अवधि के औसत से 6 प्रतिशत के डिस्काउंट पर आ गया है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) के मुताबिक, यह निवेशकों के लिए आकर्षक मौका हो सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी के स्टॉक को 3,100 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है, जो इसके 52-सप्ताह के निचले स्तर से करीब 42% अधिक है। शेयर बाजारों में चौतरफा बाजार बिकवाली के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने 20 मार्च को 2,180 रुपये का अपना 52-सप्ताह का निचला स्तर छुआ।
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "कंपनी के पास 120 बिलियन डॉलर की इक्विटी है और इसका मौजूदा नेट-डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.3 गुना है, जो पिछले 22 सालों के निचले स्तर के करीब है। इस तरह कंपनी के मौजूदा कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकल को पिछले दशक के कैपेक्स से अलग कहा जाता है।" ब्रोकरेज ने कहा कि इससे RIL की कमाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है और इसमें जोखिम भी सीमित है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि टैरिफ बढ़ोतरी को हटा दिया गया है और इसके ग्रीन एनर्जी, एफएमसीजी, फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे नए बिजेनसों और पेट्रोकेमिकल निवेश को मौजूदा बाजार भाव पर बहुत कम वैल्यू दिया जा रहा है।
जेफरीज ने वित्त वर्ष 2024 में RIL के रिटेल बिजनेस में 30 के रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है और इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) 25 फीसदी बढ़ने की संभावना जताई है।
जेफरीज के एनालिस्ट कुणाल शाह ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "एनर्जी की गिरती कीमतों ने एक्पोर्ट ड्यूटी हटाने की बना दी है, जिससे कंपनी से एक नियामकीय दबाव हट जाएगा। ऐसे में जियो की टैरिफ में बढ़ोतरी, रिटेल कारोबार के विस्तार, एक्सपोर्ट ड्यूटी के हटने और चीन में मांग बढ़ने जैसे कुछ ऐसे बिंदु हैं, जो स्टॉक की कीमतों में हलचल ला सकते हैं।"
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