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Jindal Steel आई ₹304 करोड़ के घाटे से ₹1942 करोड़ के मुनाफे में, 4 मई को रहेगी शेयरों पर नजर

Jindal Steel Q4 Result: जिंदल स्टील के लिए मार्च 2026 तिमाही धमाकेदार रही और यह भारी घाटे से उबरते हुए तगड़े मुनाफे में आ गई। कंपनी ने डिविडेंड का भी ऐलान किया है। चेक करें कंपनी के लिए पिछले वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही कैसी रही और पूरे वित्त वर्ष 2026 में इसका परफॉरमेंस कैसा रहा

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड May 05, 2026 पर 11:53 AM
Jindal Steel आई ₹304 करोड़ के घाटे से ₹1942 करोड़ के मुनाफे में, 4 मई को रहेगी शेयरों पर नजर
मार्च 2026 तिमाही में Jindal Steel सालाना आधार पर ₹304 करोड़ के घाटे से उबरते हुए ₹1,041 करोड़ के कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट में आ गई।

Jindal Steel Q4 Result: जिंदल ग्रुप की स्टील कंपनी के लिए मार्च 2026 तिमाही धमाकेदार रही। मार्च तिमाही में सालाना आधार पर यह भारी घाटे से उबरते हुए तगड़े मुनाफे में आ गए। रेवेन्यू की मजबूत ग्रोथ और ऑपरेटिंग लेवल पर सुधार के दम पर कंपनी सालाना आधार पर ₹304 करोड़ के घाटे से ₹1041 करोड़ के कंसालिडेटेड मुनाफे में आ गई। मार्च तिमाही के कारोबारी नतीजे के साथ कंपनी ने डिविडेंड का भी ऐलान किया है। शेयरहोल्डर्स को हर शेयर पर ₹2 का डिविडेंड मिलेगा। इसका असर सोमवार 4 मई को स्टॉक मार्केट खुलने पर शेयरों पर भी दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले गुरुवार 30 अप्रैल को बीएसई पर यह 0.40% की गिरावट के साथ ₹1,223.85 पर बंद हुआ था।

Jindal Steel Result: कैसी रही मार्च तिमाही?

मार्च 2026 तिमाही जेएसडब्ल्यू स्टील के लिए धमाकेदार रही। मार्च 2026 तिमाही में जेएसडब्ल्यू स्टील सालाना आधार पर ₹304 करोड़ के घाटे से उबरते हुए ₹1,041 करोड़ के कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट में आ गई। इस दौरान कंपनी का नेट रेवेन्यू भी तेज रफ्तार से बढ़ा और यह ₹13,255 करोड़ से 24.36% उछलकर ₹16,484 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेशनल लेवल पर भी कंपनी का परफॉरमेंस दमदार रहा।

टैक्स से पहले कंपनी के मुनाफे की बात करें तो मार्च 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जेएसडब्ल्यू स्टील का मुनाफा रॉकेट की स्पीड से बढ़कर ₹72 करोड़ से ₹1,074 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जिंदल स्टील का एडजस्टेड ईबीआईटीडीए यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹2,251 करोड़ से 17.59% उछलकर ₹2,647 करोड़ पर पहुंच गया जो अधिक लागत के बावजूद प्रॉफेटिबिलिटी में सुधार का संकेत है।

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