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कोटक महिंद्रा ने कहा, ग्रुप की इकाइयों का कभी भी क्लाइंट नहीं रहा हिंडनबर्ग

कोटक महिंद्रा ग्रुप का कहना है कि हिंडनबर्ग कभी भी इस ग्रुप से जुड़ी दो इकाइयों- के-इंडिया ऑपर्चूनिटीज फंड (KIOF) और कोटक महिंद्रा इंटरनेशनल लिमिटेड (KMIL) का क्लाइंट नहीं रहा। साथ ही, फंड इस बात से वाकिफ नहीं था कि हिंडनबर्ग उसके किसी निवेशक का पार्टनर था। ग्रुप की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि KMIL ने फंड के इनवेस्टर से भी इस बात की पुष्टि है कि उसका निवेश किसी अन्य शख्स के बदले किया गया निवेश नहीं है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 02, 2024 पर 3:14 PM
कोटक महिंद्रा ने कहा, ग्रुप की इकाइयों का कभी भी क्लाइंट नहीं रहा हिंडनबर्ग
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने अमेरिकी संस्था हिंडनबर्ग रिसर्च को अदाणी रिपोर्ट के सिलसिले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

Kotak Mahindra: कोटक महिंद्रा ग्रुप का कहना है कि हिंडनबर्ग कभी भी इस ग्रुप से जुड़ी दो इकाइयों- के-इंडिया ऑपर्चूनिटीज फंड (KIOF) और कोटक महिंद्रा इंटरनेशनल लिमिटेड (KMIL) का क्लाइंट नहीं रहा। साथ ही, फंड इस बात से वाकिफ नहीं था कि हिंडनबर्ग उसके किसी निवेशक का पार्टनर था।

कोटक महिंद्रा इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रवक्ता ने बताया, 'KMIL और KIOF का साफ तौर पर कहना है कि हिंडनबर्ग न तो कभी फर्म का क्लाइंट रहा है और न ही फंड में इनवेस्टर। फंड को कभी भी इस बात की जानकारी नहीं रही कि हिंडनबर्ग उसके किसी निवेशक से पार्टनर के तौर पर जुड़ा है।'

ग्रुप की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि KMIL ने फंड के इनवेस्टर से भी इस बात की पुष्टि है कि उसका निवेश किसी अन्य शख्स के बदले किया गया निवेश नहीं है। के-इंडिया ऑपर्चूनिटीज फंड (KIOF) सेबी द्वारा रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर है और इसका रेगुलेशन मॉरीशस फाइनेंशियल सर्विसेज कमीशन करता है।

बयान में कहा गया है, 'फंड की स्थापना 2013 में हुई थी, ताकि विदेशी फ्लाइंट्स को भारत में आसानी से निवेश कर सकें। फंड केवाईसी की प्रक्रिया का पालन करता है, जबकि इसके मौजूदा क्लाइंट्स और सभी निवेश संबंधित कानूनों का पूरी तरह से पालन करते हैं। हमने अपने ऑपरेशंस के मामले में रेगुलेटर्स के साथ सहयोग किया है और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।'

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