LIC ने शेयरधारकों को डिविडेंड पेमेंट के लिए रिकॉर्ड डेट तय कर दी है। कंपनी ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है। उसने कहा है कि डिविडेंड पेमेंट के लिए रिकॉर्ड डेट 26 अगस्त होगी। कंपनी की पहली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 27 सितंबर को होगी।
LIC ने शेयरधारकों को डिविडेंड पेमेंट के लिए रिकॉर्ड डेट तय कर दी है। कंपनी ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है। उसने कहा है कि डिविडेंड पेमेंट के लिए रिकॉर्ड डेट 26 अगस्त होगी। कंपनी की पहली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 27 सितंबर को होगी।
LIC 10 रुपये फेसवैल्यू वाले हर शेयर पर 1.50 रुपये डिविडेंड देगी। कंपनी के बोर्ड ने LIC (Nepal) Ltd. के राइट्स इश्यू में 80.67 करोड़ रुपये इनवेस्टमेंट के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। LIC (Nepal) एलआईसी का ज्वाइंट वेचर है।
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एलआईसी ने बताया है कि सरकार ने सुचिंद्रा मिश्रा को कंपनी का डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह एलआईसी के बोर्ड में सरकार के प्रतिनिधि होंगे। वह डिपार्मेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज में एडिशनल सेक्रेटरी हैं। बोर्ड में उनकी नियुक्ति पंकज जैन की जगह पर की गई है।
शुक्रवार (8 जुलाई) को LIC के शेयरों में तेजी देखने को मिली। 11:40 बजे कंपनी के शेयर का प्राइस 1.22 फीसदी की तेजी के साथ 706.35 रुपये था। लेकिन, अब भी LIC के आईपीओ में निवेश करने वाले लोगों को काफी लॉस हो रहा है।
इस बीच, ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने LIC के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। उसने इस शेयर के लिए 830 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह LIC के शेयरों से मायूस हो चुके निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। मोतीलाल ओसवाल के टारगेट प्राइस का मतलब है कि इस शेयर में 20 फीसदी की तेजी आएगी।
मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि एलआईसी की एनुइटी सेगमेंट में सबसे ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है। फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में यह 77 फीसदी थी। इसकी वजह यह है कि ग्रुप बिजनेस में कंपनी की मजबूत पैठ है। हालांकि, प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां भी इस बिजनेस में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
LIC ने आईपीओ में इनवेस्टर्स को 949 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर दिए थे। लेकिन, 17 मई को शेयरों की लिस्टिंग बहुत कमजोर रही। उसके बाद से शेयरों में लगातार गिरावट देखी गई। एक समय तो इसका प्राइस लिस्टिंग प्राइस के मुकाबले 32 फीसदी तक गिर गया था।
LIC का आईपीओ 3 मई को ओपन हुआ था। यह 9 मई को बंद हुआ। सरकार ने इस कंपनी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 21,000 करोड़ रुपये हासिल किए थे। एंकर इनवेस्टर्स ने एलआईसी के 5.93 करोड़ शेयर खरीदे थे। कंपनी ने 949 रुपये पर इनवेस्टर्स को शेयर जारी किए थे। एंकर इनवेस्टर्स में ज्यादा घरेलू फंड्स थे।
LIC के आईपीओ में देश और विदेश के एंकर इनवेस्टर्स ने पैसे लगाए थे। इनमें गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर, एसबीआई म्यूचुअल फंड, HDFC Mutual Fund और एक्सिस म्यूचुअल फंड शामिल थे। लेकिन, ज्यादा निवेश घरेलू म्यूचुअल फंडों ने किया था। इस इश्यू में म्यूचुअल फंड की 99 स्कीमों में 4000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे थे।
इस इश्यू में LIC के पॉलिसीहोल्डर्स ने खूब दिलचस्पी दिखाई थी। पॉलिसीहोल्डर्स का कोटा छह गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसकी वजह डिस्काउंट था। कंपनी ने अपने पॉलिसीहोल्डर्स को प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट दिया था। रिटेल इनवेस्टर्स को प्रति शेयर 45 रुपये का डिस्काउंट मिला था। इस वजह से रिटेल इनवेस्टर्स ने भी इस इश्यू में अच्छी दिलचस्पी दिखाई थी।
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