BSE's Market Cap: मार्केट में चौतरफा हरियाली के चलते करीब तीन महीने बाद एक बार फिर बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर यानी 5 लाख करोड़ डॉलर के पार चला गया। इससे पहले पिछली बार ऐसा 20 जनवरी को हुआ था। फिलहाल भारत के अलावा दुनिया भर में सिर्फ चार देशों- अमेरिका, चीन, जापान और हॉन्ग कॉन्ग का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। भारतीय इक्विटी मार्केट की टोटल पूंजी 7 अप्रैल को गिरकर 4.5 ट्रिलियन डॉलर तक आ गई थी लेकिन तब से अब तक इसमें 500 बिलियन डॉलर यानी 50 हजार करोड़ डॉलर से अधिक की रिकवरी हुई है।
घरेलू बाजारों में यह तेजी छोटे से लेकर बड़े और पीएसयू शेयरों में जोरदार खरीदारी के चलते आई। इन्हें 7 अप्रैल को अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ पर अस्थायी रोक लगाने और कारोबारी बातचीत से सपोर्ट मिला। उसके बाद से सेंसेक्स और निफ्टी 50 करीब 9 फीसदी उछल चुके हैं जबकि बीएसई मिडकैप भी 9 फीसदी से अधिक और बीएसई स्मॉलकैप 10 फीसदी से अधिक ऊपर चढ़ा था। 7 अप्रैल से निफ्टी बैंक करीब 11 फीसदी और बीएसई पीएसयू इंडेक्स करीब 10 फीसदी मजबूत हुआ।
इसके अलावा कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने महंगाई बढ़ने की रफ्तार के दबाव को कम करने और व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने में मदद की है। एनएसडीएल के मुताबिक जून तिमाही के लिए कंपनियों की आय में 2-3 फीसदी की बढ़ोतरी के शुरुआती अनुमान से पॉजिटिव सेंटिमेंट बढ़ा है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों ने निवेश ने भी इसे सपोर्ट दिया है, जिन्होंने महज दो कारोबारी सत्रों में 1 बिलियन डॉलर और 100 करोड़ डॉलर से अधिक का शुद्ध निवेश किया है।
एक्सपर्ट्स की क्या है सलाह?
मार्केट की मौजूदा तेजी को लेकर एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को वैश्विक उथल-पुथल को लेकर सतर्क होने की सलाह दी है। वेंचुरा के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर का कहना है कि मार्केट की मौजूदा तेजी मजबूत घरेलू फंडामेंटल्स, बेहतर ग्लोबल फैक्टर्स और निवेशकों के लगातार भरोसे को दिखाता है। हालांकि उन्होंने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर निवेशकों को सतर्क किया है और आने वाले समय में मार्केट की चाल को लेकर वैश्विक घटनाओं और कंपनियों के कारोबारी नतीजे पर नजर रखने को कहा है।
हालिया नोट में IIFL सिक्योरिटीज ने उम्मीद जताई थी कि कमोडिटी की कीमतों में नरमी, करेंसी में गिरावट और अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले वैल्यूएशन की फिर से रेटिंग के चलते भारतीय इक्विटी की स्पीड बनी रहेगी। हालांकि ब्रोकरेज फर्म ने यह भी चेतावनी दी है कि हालिया मैक्रो इंडिकेटर्स से अर्थव्यवस्था के साइक्लिकल सुस्ती में बने रहने के सकेत मिल रहे हैं।
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