Market correction : 2026 की शुरुआत में शुरू हुए तेज़ मार्केट करेक्शन के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड एक-तिहाई से ज़्यादा स्टॉक अपने 52-हफ़्ते के निचले स्तर पर आ गए हैं। वर्तमान में NSE पर 2,493 स्टॉक लिस्टेड हैं। इनमें से 881 स्टॉक यानी कुल का लगभग 35.3 प्रतिशत अपने 52-हफ़्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। लगभग 204 स्टॉक अपने सालाना निचले स्तर से सिर्फ़ 1-5 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि लगभग 239 स्टॉक अपने 52-हफ़्ते के निचले स्तर से 5-10 प्रतिशत ऊपर हैं।
मिड-कैप, स्मॉल-कैप और माइक्रो-कैप शेयरों में हुई प्रॉफिट बुकिंग
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज की इक्विटी स्ट्रैटेजी की डायरेक्टर क्रांति बाथिनी ने कहा कि हाल में आई गिरावट का मुख्य कारण मिड-कैप, स्मॉल-कैप और माइक्रो-कैप शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग है। इसके चलते इनमें से कई शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि लार्ज-कैप शेयरों पर भी कुछ दबाव देखा गया है, लेकिन सालाना निचले स्तर पर पहुंचने वाले ज़्यादातर शेयर फ्रंटलाइन इंडेक्स के बजाय ब्रॉडर मार्केट सेगमेंट(छोटे-मझोले शेयर) के हैं।
बाजार में कमजोरी के बावजूद, लगभग 1,612 स्टॉक अभी भी पॉजिटिव दायरे में
बाजार में कमजोरी के बावजूद, लगभग 1,612 स्टॉक अभी भी पॉजिटिव दायरे में ट्रेड कर रहे हैं। इनमें से, लगभग 398 स्टॉक अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर से 10-20 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि 578 स्टॉक अपने सालाना निचले स्तर से 20-50 प्रतिशत ऊपर हैं। इस बीच, लगभग 50 स्टॉक अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर से 50-100 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि 143 स्टॉक अपने-अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर से 100-2,000 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहे हैं।
मार्केट ब्रेथ डेटा से अच्छे संकेत
इंडिपेंडेंट एनालिस्ट अजय बग्गा का कहना है कि हालांकि हेडलाइन इंडेक्स कमजोरी दिखा रहे हैं, लेकिन मार्केट ब्रेथ डेटा लचीलेपन के संकेत दे रहा है, जिसमें काफी संख्या में स्टॉक अभी भी अपने सालाना निचले स्तर से काफी ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। उनके मुताबिक,मौजूदा दौर मार्केट स्ट्रक्चर में पूरी तरह से गिरावट के बजाय प्रॉफिट-टेकिंग की वजह से होने वाले करेक्शन को दिखाता है।
बग्गा ने आगे कहा कि जब इस डेटा को पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस और म्यूचुअल फंड परफॉर्मेंस के साथ मिल कर देखा जाता है,तो पता चलता है कि बहुत कम फंड मैनेजर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्टॉक की पहचान कर पाए हैं। नतीजतन, फंड परफॉर्मेंस काफी हद तक इंडेक्स रिटर्न जैसा ही रहा है। इससे कमजोर मार्केट डायरेक्शन वाले माहौल में अल्फा जेनरेशन (इंडेक्स से बेहतर रिटर्न) कम देखने को मिला।
मजबूत फंडमेंटल्स वाले शेयरों पर रहे फोकस
वैल्यूएशन पर, एनालिस्ट ने कहा कि मौजूदा स्थिति काफी हद तक इंडेक्स आधारित होने के बजाय स्टॉक-स्पेसिफिक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इंडेक्स लेवल पर वैल्यूएशन का आकलन करने के बजाय, निवेशकों को फंडामेंटल्स के आधार पर अलग-अलग कंपनियों का वैल्यूएशन करने की ज़रूरत है। हमें कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन, भविष्य में ग्रोथ का आउटलुक, ऑर्डर बुक की मज़बूती, एग्जीक्यूशन की क्षमता और कमाई की विजिबिलिटी पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेश के फैसले इन कंपनी-स्पेसिफिक पैरामीटर्स का आकलन करने के बाद ही लिए जाने चाहिए।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।