बैंकिंग स्पेस में भरोसा कायम, IT में बहुत ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद नहीं - ताहेर बादशाह

ताहेर बादशाह ने कहा कि बैंकिंग स्पेस में भरोसा बना है। इसकी वैल्यू बरकरार है। बैंकिंग में वैल्यू के लिए धैर्य रखना जरूरी है। कॉस्ट ऑफ डिपॉजिट घटने से बैंकों को राहत मिलेगी। ब्याज दरें घटने से भी बैंकों को फायदा होगा। यहां 12-15 फीसदी की बुक की कंपाउंडिंग हो सकती है

अपडेटेड Oct 14, 2024 पर 2:36 PM
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ताहेर ने बताया कि उन्होंने अप्रैल के बाद इंडस्ट्रियल पर वेटेज थोड़ा घटाया है। इंडस्ट्रियल में अभी भी एक्सपोजर है है। इंडस्ट्रियल के एक्जिक्यूशन पर नजर रहती है

आज बाजार के फंडामेंटल्स पर बात करने के लिए सीएनबीसी-आवाज के साथ जुड़े Invesco Mutual Fund के CIO ताहेर बादशाह। ताहेर ने रिटेल सेक्टर पर बात करते हुए कहा कि इस सेक्टर में असग-अलग ड्राइवर्स, अलग-अलग लीडर्स और लीवर हैं। ऐसे में हम पूरे सेक्टर को एक ही ब्रश से पेंट नहीं कर सकते। ज्वेलरी रिटेल का बात करें तो इसमें एक नेचुरल टेलविंड होता है जो आपको गोल्ड प्राइस के रूप में मिलता है। ऐसे में इस सेक्टर के मानक थोड़े अलग हो जाते हैं। अगर हम ज्वेलरी रिटेल को अलग रखकर देखें तो कोर रिटेल में स्थियां बहुत आसान नहीं हैं। कोर रिटेल में एक्जिक्यूशन पर बहुत ज्यादा निर्भरता है। रिटेल में एक्जिक्यूशन को बाजार ने रिवॉर्ड किया है। रिटेल सेक्टर में हमें अच्छे एक्जिक्यूशन और बड़ी साइज वाली कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए।

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बैंक शेयरों पर बात करते हुए ताहेर बादशाह ने कहा कि बैंकिंग स्पेस में भरोसा बना है। इसकी वैल्यू बरकरार है। बैंकिंग में वैल्यू के लिए धैर्य रखना जरूरी है। कॉस्ट ऑफ डिपॉजिट घटने से बैंकों को राहत मिलेगी। ब्याज दरें घटने से भी बैंकों को फायदा होगा। यहां 12-15 फीसदी की बुक की कंपाउंडिंग हो सकती है।


ताहेर को अभी IT में बहुत ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद नहीं है। इस सेक्टर में 10-12 फीसदी के ज्यादा की ग्रोथ की उम्मीद नहीं है। उनका IT सर्विस से ज्यादा टेक्नोलॉजी पर फोकस है। बहुत सारे क्षेत्रों में बड़ी तेजी नई टेक्नोलॉजी अपनाई जा रही है। ऐसे में फिनटेक और कंज्यूमर टेक कंपनियां अच्छी लग रही हैं।

इस बातचीत में ताहेर ने बताया कि उन्होंने अप्रैल के बाद इंडस्ट्रियल पर वेटेज थोड़ा घटाया है। इंडस्ट्रियल में अभी भी एक्सपोजर है है। इंडस्ट्रियल के एक्जिक्यूशन पर नजर रहती है।

बाजार पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 2022 में भारत का वैल्युएशन चीन से महंगा था। 2022 में भी विदेशी निवेशक चीन की तरफ शिफ्ट हुए हैं। चीनी इकोनॉमी 2022 में निवेशकों के भरोसे पर खरी उतरी है।

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