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Market outlook: 2025 में प्राइवेट बैंक,आईटी और एनर्जी शेयरों में हो सकती है कमाई - बड़ौदा BNP परिबा MF के जितेंद्र श्रीराम

Stock market : बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड के जितेंद्र श्रीराम का कहना है कि 2024 के चुनाव के बाद के अंतिम बजट और फरवरी 2025 के लिए निर्धारित बजट के बीच कम समय अंतराल को देखते हुए बजट बहुत बड़ा असर छोड़ने वाला नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पॉलिसी फोकस वाले सेक्टरों के बारे में बाजार को पहले से पता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 13, 2025 पर 12:41 PM
Market outlook: 2025 में प्राइवेट बैंक,आईटी और एनर्जी शेयरों में हो सकती है कमाई - बड़ौदा BNP परिबा MF के जितेंद्र श्रीराम
Market : जितेन्द्र श्रीराम का कहना है कि एनर्जी और पिछले 2 सालों में पिछड़े रह गए सेक्टर जैसे कि BFSI और IT 2025 में तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं

बड़ौदा बीएनपी पारिबा म्यूचुअल फंड के जितेन्द्र श्रीराम का कहना है कि एनर्जी ऐसे सेक्टर तथा पिछले दो सालों से दबाव में बने हुए बीएफएसआई और आईटी जैसे सेक्टर 2025 में तुलनात्मक रुपए से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मनीकंट्रोल को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी डिस्क्रीशनरी खर्च में कुछ बढ़त और कमजोर रुपये के कारण आईटी सेक्टर को फायदा हो सकता है,जबकि निजी बैंकों का वैल्यूएशन में टाइम करेक्शन के बाद मार्जिन पर इनका रिस्क रिवॉर्ड अनुकूल हो गया है।

जितेन्द्र श्रीराम का कहना है कि शॉर्ट टर्म में निफ्टी की दिशा तय करने में अमेरिका में नए राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण अहम भूमिका निभाएगा। उनका ये भी कहना है कि 2024 के चुनाव के बाद के अंतिम बजट और फरवरी 2025 के लिए निर्धारित बजट के बीच कम समय अंतराल को देखते हुए बजट बहुत बड़ा असर छोड़ने वाला नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पॉलिसी फोकस वाले सेक्टरों के बारे में बाजार को पहले से पता है।

क्या आपको 2025 में सरकारी कैपेक्स में अच्छी बढ़त की उम्मीद है? इसके जवाब में जितेन्द्र श्रीराम ने कहा कि अगर हम नवंबर 2024 तक के आंकड़ों पर नज़र डालें तो नवंबर महीने में केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च 21 फीसदी बढ़ा है।2024-25 की पहली छमाही की सुस्ती के बाद खर्च में निश्चित रूप से उछाल आया है। चुनावी आचार संहिता जैसे कारणों की वजह से साल के पहले 8 महीनों (अप्रैल-नवंबर 2024) में सरकारी कैपेक्स में 12 फीसदी की गिरावट आई है। हमें पोस्ट लाइफ इंश्योरेंस स्कीमों और रक्षा अधिग्रहण जैसी गतिविधियों में हाल के दिनों में तेजी आती दिखी है।

हालांकि, यह संभव है कि बाकी महीनों में मांग की उच्च दर को देखते हुए सरकारी पूरे वर्ष के लक्ष्य से थोड़ा कम रहे। बाकी बचे 4 महीनों के पूंजीगत व्यय को वित्त वर्ष 2025 के लिए तय किए गए 11 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के बराबर लाने के लिए लगभग 65 फीसदी बढ़ाने की जरूत है। ऐसे में लक्ष्य हासिल होना मुश्किल लग रहा है।

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