Market outlook : बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी में थम सकता है दो दिन की गिरावट का सिलसिला, इन कारणों से आ सकती है तेजी

Market outlook : वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के इच्छुक हैं। इस खबर से बाजार को राहत मिल सकती है। यूएस फ्यूचर्स की चाल से भी बाजार के लिए अच्छे संकेत मिल रहे हैं

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 1:02 PM
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Market trend: पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 3,325.9 अंक या 4.41 फीसदी गिरा है। जबकि, निफ्टी 975.05 अंक या 4.18 फीसदी नीचे आया है

Market outlook : इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी बुधवार को बढ़त के साथ खुल सकते हैं,जिससे पिछले दो दिनों की गिरावट का सिलसिला टूट सकता है। बाजार को कल अच्छे ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सपोर्ट मिलेगा। सोमवार, 30 मार्च को वित्त वर्ष 2025-26 के आखिरी ट्रेडिंग सेशन में बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट देखने को मिली थी। इसकी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें थीं,जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ था। एशियाई बाजारों में कमजोरी और विदेशी फंडों की लगातार हो रही निकासी भी घरेलू बाजार का मूड खराब करती दिखी

लगातार दूसरे सेशन में गिरावट जारी रखते हुए कल सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 फीसदी गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ था। इंट्राडे में यह 1,809.09 अंक या 2.45 प्रतिशत गिरकर 71,774.13 पर आ गया था। वहीं, निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 फीसदी गिरकर 22,331.40 पर बंद हुआ था।

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RBI ने कैपिटल मार्केट के नियमों को टाला

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों के कैपिटल मार्केट में निवेश से जुड़े नियमों को लागू करने की तारीख 1 जुलाई तक के लिए टाल दी है। इसने ब्रोकर्स के लिए कुछ शर्तों में भी ढील दी है,जिससे वे 1 जुलाई तक 50 फीसदी मार्जिन वाली बैंक गारंटी का इस्तेमाल जारी रख सकेंगे। इसके अलावा,क्लियरिंग कॉर्पोरेशन्स को पेमेंट की गारंटी देने वाले बैंकों के लिए कैपिटल एडिक्वेसी (पूंजी पर्याप्तता) के नियमों में भी ढील दी गई है। इसके तहत उस निवेश की सीमा तय कर दी गई है जिस पर बैंकों को पूंजी बनाए रखना ज़रूरी है।

ईरान युद्ध को लेकर बनी चिंताएं हुईं कम

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को खत्म करने को तैयार हैं,भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी काफी हद तक बंद रहे। इस खबर के चलते मई का ब्रेंट क्रूड वायदा 1.22 डॉल या 1.08 प्रतिशत गिरकर 111.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। हालांकि,पहले इसमें बढ़त देखने को मिली थी। जून का ज्यादा एक्टिव कॉन्ट्रैक्ट 105.76 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गिरावट शॉर्ट टर्म के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी। हालांकि इसमें होने वाला उतार-चढ़ाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल के कारोबार की बहाली पर निर्भर करेगा।

अच्छे ग्लोबल संकेत: ग्लोबल मार्केट में मजबूती देखने को मिल रही है। Nasdaq-100 फ्यूचर्स 0.55 फीसदी, S&P 500 फ्यूचर्स 0.7 फीसदी और Dow Jones फ्यूचर्स 0.8 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहे हैं। सुबह करीब 11:30 बजे Gift Nifty भी लगभग 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था।

मार्केट पर टेक्निकल व्यू

रेलीगेयर ब्रोकिंग (Religare Broking) में रिसर्च के SVP, अजीत मिश्रा ने कहा कि मार्च के महीने में निफ्टी में 11 फीसदी से ज़्यादा की गिरावट आई है। अब यह देखना जरूरी होगा कि क्या यह 200-हफ़्ते के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) को (जो लगभग 21,900 के स्तर पर है) बनाए रख पाता है कि नहीं। उन्होंने आगे कहा कि अहम सेक्टरों, खासकर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में आई कमज़ोरी और साथ ही India VIX के 28 के करीब होने से बढ़ी हुई अस्थिरता यह बताती है कि बाज़ार में गिरावट का जोखिम अभी भी बना हुआ है। किसी भी संभावित सुधार (pullback) को 22,600–23,000 की रेंज में रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बाजार की चाल पर एक नजर

पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 3,325.9 अंक या 4.41 फीसदी गिरा है। जबकि, निफ्टी 975.05 अंक या 4.18 फीसदी नीचे आया है। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में BSE बेंचमार्क 5,467.37 अंक या 7 फीसदी गिरा है। वहीं,निफ्टी 1,187.95 अंक या 5 फीसदी नीचे आया है।

छोटे-मझोले शेयर भी दबाव में रहे हैं। इसके चलते BSE MidCap Select इंडेक्स 3.13 फीसदी गिरा है। वहीं, SmallCap Select इंडेक्स 2.14 प्रतिशत नीचे आया है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मार्च में घरेलू इक्विटी बाजार में 1.14 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। ये अब तक की सबसे बड़ी मासिक निकासी है। यह निकासी पश्चिम एशिया में तनाव,रुपये के कमजोर होने और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के ग्रोथ पर पड़ने वाले असर को लेकर बनी चिंताओं के बीच हुई है।

 

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