Market view : ईरान युद्ध की वजह से भारत पर बहुत बुरा असर पड़ने की संभावना नहीं - TCG AMC के शहज़ाद मैडन

Market view : TCG AMC के शहज़ाद मैडन का कहना है कि मध्य पूर्व में युद्ध के बाद सरकारें बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण करेंगी। इसके चलते इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े अवसर देखने को मिल सकते हैं। उनका यह भी कहना है कि ईरान युद्ध की वजह से भारत पर बहुत बुरा असर पड़ने की संभावना नहीं है

अपडेटेड Mar 28, 2026 पर 12:18 PM
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Market View : शहज़ाद मैडन का कहना है कि बाज़ार के कुछ चुनिंदा पॉकेट्स के मौजूदा वैल्यूएशन काफी अच्छे लग रहे हैं। इनमें 'बॉटम-अप' पिकिंग के मौके दिख रहे हैं

Market View : अगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अगले 8-10 हफ़्तों तक नहीं सुलझता है,तो ग्लोबल अर्थव्यवस्था में तत्काल कोई गंभीर मंदी आने के बजाय,विकास की गति धीमी पड़ने और महंगाई बढ़ने की ज़्यादा संभावना है। हालांकि,अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है,तो इससे मंदी आ सकती है। ये बातें TCG AMC के MD और CEO, शहज़ाद मैडन ने Moneycontrol को दिए गए एक इंटरव्यू में कही हैं

उनका मानना ​​है कि अगर दुनिया भर में मंदी आती भी है,तो भी भारत पर इसका सबसे बुरा असर पड़ने की संभावना कम है,हालांकि हम इससे पूरी तरह से बच भी नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के अंदर मज़बूत मांग और युद्ध से पहले के मज़बूत मैक्रो फंडामेंटल्स,ऐसे वैश्विक संकटों से बचाव का काम करेंगे।

क्या आपको लगता है कि हालिया करेक्शन को भारत के बाजार ने पहले ही पचा लिया,जिससे आगे चलकर आने वाली नई तेजी के लिएआधार तैयार हो गया है?


जब हम युद्ध शुरू हुआ तब भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स और कॉर्पोरेट प्रदर्शन मज़बूत था। उम्मीद है कि आने वाले समय में ये और भी मज़बूत होंगे। शुरुआती झटके के बाद,मेन इंडेक्स अपने-अपने 52-हफ़्ते के हाई से लगभग 10–12 प्रतिशत नीचे आ गए हैं। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो बाज़ार किसी भी संघर्ष की शुरुआत में तेज़ प्रतिक्रिया करते हैं, लेकिन कम अवधि वाले युद्धों के मामलों में वे फिर से संभल जाते हैं।

लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद,बाज़ार आम तौर पर स्टेबल हो जाते हैं। हमारा अनुमान यह है कि अगले 2–10 हफ़्तों में युद्ध के नतीजों को लेकर स्थिति साफ़ हो सकती है। ऐसी स्थिति में जैसे-जैसे मौजूदा संघर्ष कम होगा,अच्छे वैल्यूएशन और कंपनियों की मज़बूत अर्निंग्स मिलकर बाज़ार में नई तेज़ी के आधार बन सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि अगर अगले कुछ हफ़्तों में कोई इस युद्ध का कोई समाधान नहीं निकलता है,तो ग्लोबल इकोनॉमी में एक गंभीर मंदी का डर है?

अगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अगले 8-10 हफ़्तों तक नहीं सुलझता है,तो ग्लोबल अर्थव्यवस्था में तत्काल कोई गंभीर मंदी आने के बजाय,विकास की गति धीमी पड़ने और महंगाई बढ़ने की ज़्यादा संभावना है। हालांकि,अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है,तो इससे मंदी आ सकती है।

क्या आपको लगता है कि ग्लोबल मंदी की स्थिति में भी भारत सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों में नहीं होगा?

अगर दुनिया भर में मंदी आती भी है,तो भी भारत पर इसका सबसे बुरा असर पड़ने की संभावना कम है,हालांकि हम इससे पूरी तरह से बच भी नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के अंदर मज़बूत मांग और युद्ध से पहले के मज़बूत मैक्रो फंडामेंटल्स,ऐसे वैश्विक संकटों से बचाव का काम करेंगे। हालांकि,एक्सपोर्ट में गिरावट और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव जैसी बाहरी दिक्कतों से कुछ दबाव पड़ सकता है। लेकिन निर्यात पर ज़्यादा निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत पर इसका असर काफी हद तक सीमित रहने की संभावना है। इसके अलावा,भारत को एनर्जी सोर्स के ज़्यादा डाइवर्सिफाइड बेस से भी फ़ायदा मिल सकता है।

क्या आपको लगता है कि मध्य पूर्व में युद्ध के बाद होने वाले पुनर्निर्माण से इंफ्रा सेक्टर के लिए भारी मांग पैदा हो सकती है? निवेशकों को किन थीम्स पर फोकस करना चाहिए?

हां,मध्य पूर्व में युद्ध के बाद होने वाला पुनर्निर्माण इंफ्रा सेक्टर के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकता है। इस समय एनर्जी सिक्योरिटी एंड ट्रांजिशन,डिफेंस और स्वदेशीकरण और कैपिटल गुड्स जैसी थीम्स अच्छी लग रही हैं।

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अभी आपकी नज़र किन सेक्टर्स पर है,जो 'बॉटम-अप'अवसर प्रदान कर रहे हैं?

बाज़ार के कुछ चुनिंदा पॉकेट्स के मौजूदा वैल्यूएशन काफी अच्छे लग रहे हैं। इनमें 'बॉटम-अप' पिकिंग के मौके दिख रहे हैं। एनर्जी सिक्योरिटी एंड ट्रांजिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर,डिफेंस और स्वदेशीकरण,इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी और अर्बन डेवलपमेंट सेजुड़े शेयर अच्छे लग रहे हैं।

क्या IT सेक्टर के स्टॉक्स को धीरे-धीरे जमा करने का यह सही समय है?

हां,हमारा मानना ​​है कि IT स्टॉक्स को धीरे-धीरे जमा करने का यह एक अच्छा समय है। हालांकि,निकट भविष्य के नजरिए से मांग की स्थिति मध्यम बनी हुई है, लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन सही लग रहे हैं। इसके अलावा,AI के क्षेत्र में बदलते हालात समय के साथ IT कंपनियों के लिए फ़ायदेमंद साबित होने की संभावना है। हम "IT के खात्मे"(IT apocalypse)वाले नज़रिए से सहमत नहीं हैं।

 

 

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