Market View : बुधवार को घरेलू इक्विटी बाजारो में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन के आखिर में हुई खरीदारी की वजह से बेंचमार्क इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से बाजार को सपोर्ट मिला। ब्लू-चिप स्टॉक रिलायंस इंडस्ट्रीज में हुई खरीदारी से भी बाजार का सेंटिमेंट सुधरा। गैप-डाउन शुरुआत के बाद निफ्टी पूरे सेशन के दौरान धीरे-धीरे रिकवर हुआ और दिन के ऊपरी स्तर के करीब 23,659 पर बंद हुआ। इसमें 41 अंकों या 0.17 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। इंडेक्स लगातार पांचवें ट्रेडिंग सेशन में 23,600-23,700 की रेंज में बंद हुआ। सेंसेक्स 117.54 अंक या 0.16 प्रतिशत बढ़कर 75,318.39 पर बंद हुआ। इंट्राडे में यह 671.44 अंक या 0.89 प्रतिशत गिरकर 74,529.41 के निचले स्तर पर पहुंच गया था।
रेलीगेयर ब्रोकिमग (Religare Broking) के SVP,रिसर्च अजीत मिश्रा का कहना है कि Nifty अभी भी 23,800–24,000 के अहम रेजिस्टेंस जोन से नीचे ट्रेड कर रहा है,जिससे पता चलता है कि बाजार का माहौल अभी भी सतर्क बना हुआ है। हालांकि,अलग-अलग सेक्टरों के कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों में बारी-बारी से हो रही खरीदारी गिरावट को रोकने में मदद कर रही है और इंडेक्स को अब तक 23,250–23,400 के जोन में सपोर्ट मिल रहा है।
पिछले 5 ट्रेडिंग सेशन से निफ्टी में एक सेशन में बढ़त और दूसरे में गिरावट का पैटर्न देखने को मिला है। बुधवार को इंडेक्स 161 पॉइंट नीचे खुला ट्रेडिंग के शुरुआती कुछ मिनटों में ही यह अपने इंट्राडे लो पर पहुंच गया और फिर तेजी से रिकवर हुआ। यह दिन के निचले स्तर 23,397 से लगभग 300 पॉइंट ऊपर उछला और 23,659 पर बंद हुआ।
SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने कहा कि Nifty के लिए तत्काल सपोर्ट 23,500–23,450 के जोन में है। अगर इस लेवल से नीचे गिरावट बनी रहती है तो यह शॉर्ट टर्म में 23,300 और उसके बाद 23,150 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ तत्काल रेजिस्टेंस 23,800–23,850 के जोन में है, जो 20-दिन के EMA से भी मेल खाता है।
घरेलू इक्विटी बाजार में कल की शुरुआती कमजोरी की वजह ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी,कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US-ईरान संघर्ष को लेकर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता थी। रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह कल 97 के स्तर के करीब आ गया। वहीं,विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली का असर बाजार के सेंटिमेंट पर बना रहा।
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