रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, लेकिन नेपाल की करेंसी के मुकाबले कैसा है हाल? जानिए कौन कितना मजबूत

Indian rupee vs Nepali rupee: डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि नेपाली करेंसी अब भी भारतीय रुपये से कमजोर बनी हुई है। आखिर ऐसा क्यों है और नेपाल की मुद्रा भारत पर कितनी निर्भर है, इसकी वजह काफी रोचक है। समझिए पूरा मामला।

अपडेटेड May 21, 2026 पर 6:04 AM
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दिलचस्प बात यह है कि पहले नेपाल की करेंसी भारत में ही छपती थी।

Indian rupee vs Nepali rupee: भारतीय रुपया इन दिनों अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में है। यह बुधवार, 20 मई को 96.59 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव और डॉलर की मजबूती की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है।

हालांकि डॉलर के मुकाबले कमजोरी के बावजूद भारतीय रुपया नेपाल की करेंसी के मुकाबले अब भी मजबूत बना हुआ है। नेपाल की मुद्रा नेपाली रुपया कहलाती है।

भारतीय रुपये और नेपाली रुपये में कितना फर्क?


लेटेस्ट एक्सचेंज रेट के मुताबिक 1 भारतीय रुपया करीब 1.60 नेपाली रुपये के बराबर है। वहीं 1 नेपाली रुपया करीब 62 पैसे भारतीय रुपये के बराबर बैठता है। अगर आसान भाषा में समझें, तो भारत के 100 रुपये नेपाल में करीब 160 नेपाली रुपये के बराबर माने जाते हैं।

इसका मतलब है कि भारतीय रुपया नेपाली करेंसी से मजबूत है, लेकिन पाकिस्तान जैसी स्थिति नहीं है जहां अंतर कई गुना तक पहुंच चुका है। इसकी भी खास वजह है। नेपाली रुपये का एक्सचेंज भारतीय रुपये से जुड़ा है। यानी भारतीय करेंसी जितना मजबूत होगी, नेपाली रुपया भी उतना ही मजबूत होगा। कमजोरी के मामले में भी यही फैक्टर रहेगा।

नेपाल की करेंसी भारतीय रुपये से जुड़ी क्यों है?

नेपाल की करेंसी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है, बल्कि वह भारतीय रुपये से एक तय एक्सचेंज रेट पर जुड़ी हुई है। लंबे समय से 1 भारतीय रुपये की कीमत करीब 1.60 नेपाली रुपये तय मानी जाती है। इसलिए भारतीय रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर सीधे नेपाली करेंसी पर भी पड़ता है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि नेपाल की अर्थव्यवस्था व्यापार, पर्यटन और रोजमर्रा के लेनदेन के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर है। नेपाल बड़ी मात्रा में जरूरी सामान भारत से खरीदता है। इसी वजह से वहां की सरकार ने अपनी मुद्रा को भारतीय रुपये से जोड़कर स्थिरता बनाए रखने की नीति अपनाई है।

भारत में छपती थी नेपाल की शुरुआती करेंसी

दिलचस्प बात यह है कि पहले नेपाल की करेंसी भारत में ही छपती थी। नेपाल राष्ट्र बैंक बनने से पहले और उसके शुरुआती वर्षों में नेपाली नोट भारत के नासिक के इंडिया सिक्योरिटी प्रेस में छापे जाते थे।

इसके बाद भी कई दशकों तक नेपाल अलग-अलग समय पर अपनी करेंसी भारत में छपवाता रहा। वह करीब 2015 तक नेपाल काफी हद तक भारतीय प्रिंटिंग प्रेस पर निर्भर था। लेकिन इसके बाद उसने चीन की कंपनियों से नोट छपवाना शुरू कर दिया।

भारतीय रुपया ज्यादा मजबूत क्यों माना जाता है?

भारत की अर्थव्यवस्था नेपाल के मुकाबले काफी बड़ी है। भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, बड़ा सेवा क्षेत्र और ज्यादा वैश्विक निवेश मौजूद है।

वहीं नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन, विदेश से आने वाले पैसों और भारत के साथ व्यापार पर निर्भर मानी जाती है। नेपाल का बड़ा हिस्सा आयात का भी भारत से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उसका भारतीय रुपये पर निर्भरता भी स्वाभाविक है।

नेपाल में भारतीय रुपये का इस्तेमाल भी होता है

नेपाल में भारतीय रुपये का इस्तेमाल काफी आम माना जाता है, खासकर भारत-नेपाल सीमा से जुड़े शहरों और बाजारों में। कई दुकानदार, होटल, ट्रांसपोर्ट और छोटे कारोबारी भारतीय रुपये आसानी से स्वीकार कर लेते हैं। पर्यटन क्षेत्रों और बॉर्डर ट्रेड वाले इलाकों में तो भारतीय करेंसी रोजमर्रा के लेनदेन का हिस्सा बन चुकी है।

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह दोनों देशों के बीच खुली सीमा और गहरे आर्थिक रिश्ते हैं। हर दिन हजारों लोग काम, व्यापार, पढ़ाई और यात्रा के लिए भारत-नेपाल के बीच आवाजाही करते हैं। नेपाल अपने बड़े आयात के लिए भारत पर निर्भर है। भारतीय पर्यटक भी बड़ी संख्या में नेपाल जाते हैं। इसी कारण भारतीय रुपये को वहां भरोसेमंद और आसानी से इस्तेमाल होने वाली करेंसी माना जाता है।

फिर चिंता किस बात की है?

भारतीय रुपया नेपाली करेंसी से मजबूत है, लेकिन फिलहाल असली चिंता डॉलर के मुकाबले उसकी कमजोरी को लेकर है। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।

इसके अलावा वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की वजह से भी रुपये पर दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि बाजार की नजर फिलहाल रुपये की आगे की चाल पर बनी हुई है।

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