कोटक महिंद्रा एएमसी (Kotak Mahindra AMC) के नीलेश शाह (Nilesh Shah)का मानना है कि बाजार मई 2024 तक एक सीमित दायरे में ही घूमता रहेगा। उनका मानना ही घरेलू और ग्लोबल स्तर पर घटने वाली अच्छी-बुरी दोनों तरह की खबरें इंडेक्स को दोनों दिशाओं में खींच सकती हैं। CNBC-TV18 से हुई बातचीत में उन्होंने ये भी कहा कि वर्तमान में भारतीय बाजार दुनिया के दूसरे बाजारों की तुलना में काफी प्रीमियम पर दिख रहे हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो भारतीय बाजार दूसरे बाजारों की तुलना में महंगे दिख रहे हैं। इसके चलते कुछ FPIs भारतीय बाजारों से मुनाफावसूली करके चाइना, ताइवान, कोरिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे दूसरे सस्ते बाजारों की तरफ रुख कर सकते हैं।
मिलीजुली घटनाएं मई 2024 तक बाजार को दोनों तरफ झूला झुलाएंगी
नीलेश शाह ने इस बातचीत में आगे कहा कि घरेलू और ग्लोबल दोनों स्तरों पर होने वाली मिलीजुली घटनाएं मई 2024 तक बाजार को दोनों तरफ झूला झुला सकती हैं। यूएस फेड के फैसले, रुस-यूक्रेन की लड़ाई, दूसरी और तीसरी तिमाही के उम्मीद से कमजोर नतीजे, खपत स्तर में गिरावट और 2024 में होने वाले आम चुनाव जैसे इवेंट बाजार को दोनों दिशाओं में ऊपर-नीचे करते दिख सकते हैं।
निचले स्तर पर खरीदारी और ऊपरी स्तरों पर दिखेगी बिकवाली
नीलेश शाह ने कहा "उम्मीद है कि निचले स्तर पर घरेलू और ग्लोबल निवेशक खरीदारी करते दिखेंगे। वहीं, ऊपरी स्तरो पर बिकवाली का दबाव आता दिखेगे। ऐसे में हमें मई 2024 तक बाजार रेंजबाउंड रहने की उम्मीद नजर आ रही है।"
नीलेश शाह की राय है कि बाजार यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या फेड लंबे समय तक ब्याज दरें उच्च स्तर पर बनाए रखने वाला है और अगर हां तो कितने समय तक। इसके साथ ही बाजार ऊंची ब्याज दरों से विकास को लगने वाले झटके और संभावित मंदी से होने वाले नुकसान का आकलन करने की भी कोशिश कर रहा है।
यूएस फेड के 6 फीसदी के संभावित टर्मिनल रेट पर बात करते हुए नीलेश शाह ने कहा कि अगर आपको यूएस ट्रेजरी पर 6 फीसदी रिस्क फ्री रिटर्न मिलता है तो इक्विटी रिस्क प्रीमियम में बढ़त और वैल्यूशन में गिरावट आने की जरूरत होगी।
फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि अमेरिकी ब्याज दरें पहले के अनुमानों की तुलना में ज्यादी तेजी के साथ अपने पीक पर पहुंच सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने महंगाई के खिलाफ अपनी लड़ाई में पिछले साल की शुरुआत से अब तक अपनी बेंचमार्क दरें आठ बार बढ़ाई हैं।
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