निवेश के गुरु घंटाल के चक्कर में कहीं आप तो नहीं फसे हैं? बिना लाइसेंस करोड़ों रुपए मैनेज कर रहे हैं ट्रेडर्स-इनफ्लूएंसर्स

Investment Scam: एक सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक फोन रिकॉर्डिंग शेयर की गई है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे को अपहरण करने और मारने की धमकी देते हुए सुना जा सकता है। जिस अकाउंट से यह रिकॉर्डिंग शेयर की गई है, एक निवेशक ने अपने पैसे वापस मांगे थे, जिसके बाद उसे भाड़े के एक व्यक्ति से धमकी दिलवाई जा रही है

अपडेटेड Dec 06, 2022 पर 8:25 PM
Story continues below Advertisement
Investment Scam: एक सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक फोन रिकॉर्डिंग शेयर की गई है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे को अपहरण करने और मारने की धमकी देते हुए सुना जा सकता है। जिस अकाउंट से यह रिकॉर्डिंग शेयर की गई है, एक निवेशक ने अपने पैसे वापस मांगे थे, जिसके बाद उसे भाड़े के एक व्यक्ति से धमकी दिलवाई जा रही है

नकली स्टॉक-मार्केट गुरुओं को लेकर सोशल-मीडिया चैनलों पर फैली नाराजगी के बीच, एक बड़ा और अवैध बिजनेस मुश्किल में पड़ गया है। यह बिजनेस बिना जरूरी लाइसेंस के दूसरों के पैसों को मैनेज करने से जुड़ा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ बड़े ट्रेडर्स-इनफ्लूएंसर्स ( की पोल-पट्टी खुलने के बाद, इस बिजनेस के ग्राहक घबरा रहे हैं और अपने पैसे वापस करने के लिए कह रहे हैं। एक सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक फोन रिकॉर्डिंग शेयर की गई है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे को अपहरण करने और मारने की धमकी देते हुए सुना जा सकता है। जिस अकाउंट से यह रिकॉर्डिंग शेयर की गई है, एक निवेशक ने अपने पैसे वापस मांगे थे, जिसके बाद उसे भाड़े के एक व्यक्ति से धमकी दिलवाई जा रही है।

आखिर यह बिजनेस है क्या?

मनीकंट्रोल ने जितने भी लोगों से इस स्टोरी के लिए बात की, उनमें से कोई भी अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहता था। लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि इसके बारे में लगभग सभी लोगों को पता है और ट्रेडर्स के लिए दूसरों के पैसे मैनेज करना एक आम बात है, भले ही वे उनके पास ऐसा करने का लाइसेंस न हो।


यह बात लगभग सबके सामने आ चुकी हैं कि कुछ ट्रेडर्स यूट्यूब (YouTube) और Telegram (टेलीग्राम) जैसे सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अवैध एडवाइजरी सर्विस चला रहे हैं। लेकिन ये एडवाइजर्स वहां लोगों को सिर्फ स्टॉक टिप्स देते हैं। मनीकंट्रोल को जो पता चला है कि वह इससे एक कदम आगे की चीज है कि ये ट्रेडर्स बिना किसी लाइसेंस के दूसरों के पैसे भी मैनेज कर रहे हैं और उनके लिए खुद ट्रेड करते हैं।

खतरा यह है कि पैसा ऐसे लोग मैनेज कर रहे हैं, जिनके पास ऐसा करने की पर्याप्त योग्यता या सर्टिफिकेट नहीं है, लेकिन वे अपनी बातों से लोगों को कहानी बेचने में माहिर हैं। अगर ट्रेड गलत हो जाता है तो उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता है। छोटे निवेशक ऐसे घोटाले की तरफ खास तौर से आकर्षित हो जाते हैं क्योंकि उनकी पूंजी कम होती है, ऐसे में वे मल्टीबैगर रिटर्न के वादों के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं।

यह भी पढ़ें- Multibagger Stock: गुजरात की इस टेक्सटाइल कंपनी ने छह महीने में तीन गुना बढ़ाया पैसा, आज लगा अपर सर्किट, रिकॉर्ड ऊंचाई पर शेयर

एक जाने-माने ट्रेडर्स ने बताया, "ऐसे कई परिवारों को जानता हूं कि, जो इस तरह से अपने पैसे खो चुके हैं। ट्रेडर्स उनके कुछ लाख रुपये लेता है। बाजार में जबतक सब ठीक चल रहा हो, तबतक सब ठीक है। लेकिन जैसे ही बाजार गिरता है तो फिर ट्रेडर्स गायब हो जाता है और परिवार को लगता है कि वे सहारे के लिए किसी कानूनी संस्था से संपर्क नहीं कर सकते हैं।”

भारत में किसी के पैसे का प्रबंधन करने के लिए यह जरूरी है, उस संस्था के पास म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) या एक अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स का लाइसेंस हो। लेकिन इसे हासिल करने के लिए रेगुलेटर और कैपिटल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में क्लाइंट के साथ अनौपचारिक तरीके से डील करना सबसे आसान तरीका है।

करने के लिए, एक इकाई को म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा या वैकल्पिक निवेश फंड के रूप में लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। लेकिन इनमें से किसी एक को स्थापित करने के लिए, विनियामक और पूंजीगत आवश्यकताएं चुनौतीपूर्ण हैं। इसलिए, क्लाइंट के साथ अनौपचारिक व्यवस्था करना सबसे आसान तरीका है।

लेकिन ग्राहक ऐसे बिना लाइसेंस वाले लोगों से संपर्क क्यों करते हैं? कई लोग जहां निवेश पर तगड़े रिटर्न के वादे से आकर्षित होते हैं। वहीं कई को बिना किसी निवेश सीमा के अपने पैसे लगाने का मौका मिलता है।

घोटाले को चलाना

एक अंदरूनी सूत्र के मुताबिक, पैसों का अवैध प्रबंधन दो तरीकों से किया जा सकता है। मान लें कि एक व्यक्ति के पास बहुत पैसा है लेकिन वह नहीं जानता कि उसे पैसे से और पैसे बनाने के लिए कैसे ट्रेड या निवेश करना है। फिर वह इस प्रसिद्ध ट्रेडर को अपने ट्रेडिंग खाते का यूजर नेम और पासवर्ड सौंप देता है। वहीं दूसरा तरीका यह है कि ग्राहक पैसे को ट्रेडर्स के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देता है और व्यापारी इसे इस पूल्ड अकाउंट (Polled Account) के जरिए मैनेज करता है, जिसमें कई ग्राहकों का पैसा होता है।

यह भी पढ़ें- निफ्टी के लिए 18,550 लक्ष्मण रेखा, आखिरी घंटे में बाजार में तेजी संभव- अनुज सिंघल

यह एसेट मैनेजमेंट सैकड़ों करोड़ का हो सकता है और ट्रेडर्स, लाभ पर लगभग 30% कमीशन लेता है। एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि उन्होंने लोगों को औसतन 200 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये और अधिकतम 2,000 करोड़ रुपये तक पैसे मैनेज करता देखा है।

हाल ही में एक ट्रेडर्स और सोशल-मीडिया इन्फ्लुएंसर ने YouTube पर एक लाइव शो किया था, जिसमें लोग उसके खाते में 200 करोड़ रुपये देख सकते थे। इसे पूल्ड मनी (Pooled Money) कहते हैं, जो दूसरे निवेशकों का उसके खाते में जमा पैसा होता है और जिसे वह मैनेज करता है।

एक व्यक्ति ने बताया, "यह (पूल्ड मनी) खतरनाक है क्योंकि पैसा पूरी तरह से ट्रेडर के हाथ में है और ट्रेडर को पैसों के साथ गायब होने के लिए जाना जाता है। कम आय वाले परिवारों से आने वाले बहुत सारे लोगों ने ऐसे घोटालेबाजों के हाथों अपने पैसे खोए हैं।"

व्यक्ति के अनुसार, इसमें अधिक सुरक्षित तरीका ट्रेडर्स के साथ अपना यूजरनेम और पासवर्ड शेयर करना और क्लाइंट खाते के जरिए ट्रेडिंग के लिए अनुमति देना है। उन्होंने कहा, "अगर बाद में आपको ट्रेडर नहीं पसंद आया, या आपने विचार बदल लिया, तो ऐसे केस में आपको बस अपना पासवर्ड बदलना होगा।"

ट्रेडर को ऐसा करने की इजाजत देने के लिए (यानी सैकड़ों क्लाइंट्स के लिए ट्रेड करने के लिए) ऐसे कई सॉफ्टवेयर हैं जिन्हें बाजार में खरीदा जा सकता है। इंडस्ट्री के एक एक्सपर्ट के अनुसार, ये सॉफ्टवेयप 5,000 रुपये से भी कम में आ जाते है।

नाम न छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने कहा, "ऐसा करने के लिए, ट्रेडर को पहले एक सब-ब्रोकर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराना होगा और फिर ब्रोकरेज को बताना होगा कि उसे बड़ी संख्या में क्लाइंट्स के लिए ट्रेड करने में परेशानी हो रही है। फिर, ब्रोकर उस व्यक्ति को सॉफ़्टवेयर विक्रेता से संपर्क कराएगा।"

उन्होंने बताया कि ट्रेडर अपने क्लाइंट से मुनाफे पर तो कमीशन लेता ही है, लेकिन साथ में वह ब्रोकरेज फीस कमाने के लिए सब-ब्रोकर लाइसेंस भी लेता है।

संदेश कैसे भेजे जाते है?

अपनी सेवाओं का प्रचार करने के लिए, कुछ ट्रेडर नियमित रूप से अपने ट्रेड के लाइव सेशन करते हैं। सोशल-मीडिया पर इसके लिए लोगों को इनविटेशन भेजा जाता है और और संभावित ग्राहक यह देख सकते हैं कि ट्रेडर कितनी बड़ी रकम को मैनेज कर रहा है और वह कितना अच्छा है। फिर इच्छुक निवेशक सोशल-मीडिया चैनल के जरिए उस ट्रेडर से संपर्क करती हैं।

इस कहानी का दूसरा पक्ष यह है कि कई जाने-माने ट्रेडर और इंफ्लूएंसर असल में अच्छी तरह से ट्रेड करना नहीं जानते हैं। लेकिन, उनकी लोकप्रियता के कारण, ग्राहक उनसे अपने पैसे को मैनेज करने के लिए संपर्क करते हैं। ऐसे मामले में फिर वह ट्रेडर किसी दूसरे व्यक्ति को पैसे पर हायर करता है, जो जानता है कि अच्छा ट्रेड कैसे करना है। जबकि ग्राहक को नहीं पता होता है कि इसमें कोई तीसरा पक्ष भी शामिल है।

कई ट्रेडर्स समूह ऐसे हैं, जो जानते हैं कि अच्छा ट्रेड कैसे करना है, लेकिन उनकी सोशल मीडिया पर अच्छी उपस्थिति नहीं है। ऐसे में वे अधिक ग्राहकों को लुभाने के इरादे से इन ट्रेडर-इंफ्लूएंसर से संपर्क करते हैं। ट्रेडर्स समूह अपने मार्क-टू-मार्केट (MTM) स्टेटमेंट उस इंफ्यूएंसर को देता है, जिसका इस्तेमाल कर इंफ्लूएंसर लोगों को अपने कौशल और ज्ञान का प्रदर्शन करता है। इसे देखकर लोग अपने पैसों का मैनेज करने के लिए जब इंफ्लूएंसर से संपर्क करता है, तब वह उन संभावित क्लाइंट और पैसों को ट्रेडर्स समूह के पास भेज देता है और बदले में कमीशन लेता है।

व्यापारी समूह जो जानते हैं कि अच्छा व्यापार कैसे करना है, लेकिन अच्छी सोशल-मीडिया उपस्थिति नहीं है, ग्राहकों को लुभाने में मदद करने के लिए एक व्यापारी-प्रभावित व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। व्यापारी समूह प्रभावित करने वाले को उनके सफल ट्रेडों के मार्क-टू-मार्केट (MTM) स्टेटमेंट की पेशकश करेगा, ताकि इन्फ्लुएंसर उन बयानों का उपयोग अपनी 'प्रवीणता' का विज्ञापन करने के लिए कर सके। इसे देखकर, बहुत सारा पैसा रखने वाला व्यक्ति इस इन्फ्लुएंसर से संपर्क कर सकता है और उनसे अपने पैसे का प्रबंधन करने के लिए कह सकता है। इन्फ्लुएंसर तब ट्रेडर्स ग्रुप को बिजनेस लीड पास करेगा और इन्फ्लुएंसर को उन्हें बिजनेस लाने के लिए कटौती मिलेगी।

हाल में सोशल मीडिया पर लोग ऐसे नकली स्टॉक मार्केट गुरुओं को लेकर जागरुक हुए हैं और लोग उनसे अपने ट्रेड के वेरिफाइड MTM स्टेटमेंट की मांग कर रहे हैं। ट्रेडर-इंफ्लूएंसर ऐसा करने कतरा रहे हैं क्योंकि ये स्टेटमेंट उनके क्लाइंट या असली ट्रेडर-पार्टनर के नाम का खुलासा कर सकता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।