Metal Stocks: मेटल शेयरों में आज भारी बिकवाली है। निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है। आज यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सेक्टोरल इंडेक्स में शामिल है। गोल्ड सिल्वर पर भी तगड़ा दबाव है। कॉपर कीमतों में गिरावट के चलते हिंदुस्तान कॉपर करीब 8 फीसदी फिसला है। वहीं वेदांता,नाल्को,टाटा स्टील और हिंडल्को की भी तगड़ी पिटाई हुई है। मेटल्स पर बिकवाली की मार के चलते कॉपर 3 महीने के निचले स्तर पर हैं। सोने में 40 साल की सबसे बड़ी वीकली गिरावट देखने को मिली है। चांदी एक महीने में 25 फीसदी से ज्यादा फिसली है। मजबूत डॉलर से मेटल पर दबाव बढ़ा है। होर्मुज में आवाजाही बंद होने से इनके इंडस्ट्रियल डिमांड पर असर पड़ा है।
निफ्टी मेटल इंडेक्स के सभी शेयर आज लाल निशान में ट्रेड कर रहे हैं। इसके चलते यह इंडेक्स आज इंट्रा डे में 6 फीसदी तक फिसल गया। हिंदुस्तान कॉपर के शेयर 6.4% की गिरावट के साथ सबसे ज़्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में है। इनके बाद हिंदुस्तान जिंक,इसकी पैरेंट कंपनी वेदांता, SAIL और NMDC का नंबर है। इन सभी में 5% से ज़्यादा की गिरावट देखने को मिल रही है। टाटा स्टील, JSW स्टील और जिंदल स्टील जैसी स्टील कंपनियों के शेयरों में भी 4.3 से 4.9 फीसदी के बीच बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है।
फोकस में गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियां
गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनियां भी फोकस में हैं। इनके गोल्ड लोन पोर्टफोलियो पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में मुथूट के पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन का हिस्सा 85 फीसदी पर रहा है। वहीं, मण्णापुरम के पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन का हिस्सा 74 फीसदी और CSB बैंक के पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन का हिस्सा 51 फीसदी पर रहा। गोल्ड की होल्डिंग की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में तिमाही आधार पर मुथूट की होल्डिंग में 1.9 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं,मण्णापुरम की होल्डिंग 3.2 फीसदी बढ़ी है। जबकि, CSB बैंक की होल्डिंग सपाट रही है।
निफ्टी मेटल इंडेक्स मार्च में अब तक 10.8 फीसदी टूटा
कुल मिलाकर,निफ्टी मेटल इंडेक्स मार्च में अब तक 10.8 फीसदी टूटा है। यह न केवल अपनी तीन महीने की बढ़त को गवांने की राह पर है,बल्कि फरवरी 2023 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करने की ओर भी बढ़ रहा है।
बाजार जानकारों का कहना है कि इस महीने मेटल स्टॉक्स पर दबाव डालने वाले दो अहम फैक्टर है। इनमें से पहला है मेटल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बाद होने वाला सेक्टोरल रोटेशन और दूसरा है हालिया भू-राजनीतिक तनाव के बीच मांग में कमी आने का डर।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि जो सेक्टर पहले मज़बूती से टिके हुए थे,अब उन पर कुछ दबाव पड़ने लगा है। एनर्जी,फार्मा और मेटल्स वे मुख्य सेक्टर थे,जो बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि मध्यपूर्व में तनाव बढ़ने और इससे जुड़ी चिंताओं के चलते मेटल्स की मांग में गिरावट आ रही है। मेटल स्टॉक्स में आई गिरावट के पीछे यह भी एक और वजह हो सकती है।
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