गोल्डमैन सैक्स ने 2026 में इंडिया की ग्रोथ के अनु्मान को घटा दिया है। उसने इंटरेस्ट रेट 0.50 फीसदी बढ़ने की भी उम्मीद जताई है। उसने कहा है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में आई बड़ी कमजोरी की वजह से इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है। पिछले कुछ हफ्तों में रुपये में तेज गिरावट आई है। इसमें शेयर बाजार में विदेशी फंडों की बिकवाली का बड़ा हाथ है।
मध्यपूर्व की लड़ाई का ग्रोथ पर पड़ेगा असर
Goldman Sachs ने कहा है कि कैलेंडर ईयर 2026 में भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ 5.9 फीसदी तक रह सकती है। इसकी वजह मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई है। इस लड़ाई से पहले उसने कैलेंडर ईयर 2026 में भारत की ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इस अमेरिकी बैंक ने भारत की ग्रोथ का नया अनुमान 24 मार्च को जारी किया।
गोल्डमैन ने 13 मार्च को भी घटाया था ग्रोथ का अनुमान
अमेरिकी बैंक ने 13 मार्च को इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 6.5 कर दिया था। दोबारा ग्रोथ में अनुमान की बड़ी वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है। क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बने रहने से विदेशी मुद्रा भंडार, इनफ्लेशन और सरकार की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ता है। खासकर भारत जैसे देश के लिए यह बहुत मायने रखता है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा ऑयल इंपोर्ट करता है।
क्रूड की कीमतें फिलहाल ऊंची बनी रह सकती हैं
गोल्डमैन का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऑयल की सप्लाई पर रोक अगले महीने के मध्य तक जारी रह सकती है। उसके अगले 30 दिनों में स्थिति सामान्य हो सकती है। मार्च में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल और अप्रैल में औसत कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। इस साल की चौथी तिमाही में इसके घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाने की उम्मीद है।
इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए बढ़ सकता है इंटरेस्ट रेट
अमेरिकी बैंक के एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में महंगाई भी बढ़ सकती है। पहले उन्होंने भारत में इनफ्लेशन 3.9 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी। अब उन्होंने अपनी उम्मीद बढ़ाकर 4.6 फीसदी कर दी है। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए आरबीआई को इंटरेस्ट बढ़ाना पड़ सकता है। उसने कहा है कि रुपये में कमजोरी से बने दबाव की वजह से इंटरेस्ट रेट में 0.50 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।
इस साल डॉलर के मुकाबले 4 फीसदी गिर चुका है रुपया
डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट दिख रही है। 2025 में यह डॉलर के मुकाबले 4.7 फीसदी गिरा था। इस साल अब तक यह डॉलर के मुकाबले 4 फीसदी गिर चुका है। अमेरिकी बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2026 में भारत का करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर 2 फीसदी तक पहुंच सकता है। 2025 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में करेंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी का 1.3 फीसदी था।