Mutual Fund Investment: म्यूचुअल फंडों ने मार्च में बाजार में आई गिरावट के मौके का फायदा उठाया। उन्होंने फाइनेंशियल कपनियों के स्टॉक्स में करीब 55,414 करोड़ रुपये इनवेस्ट किए। अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई की वजह से मार्च में भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। इस दौरान म्यूचुअल फंडों ने जमकर निवेश किए। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि बड़ी गिरावट के दौरान शेयरों में निवेश करने से ज्यादा रिटर्न कमाने की संभावना बढ़ जाती है।
कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में म्यूचुअल फंडों की हिस्सेदारी बढ़ी
म्यूचुअल फंड्स मार्च में शेयर बाजार में काफी एक्टिव रहे। उन्होंने पिछले महीने करीब 1.13 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। हालांकि, इस खरीदारी के बावजूद म्यूचुअल फंडों का कुल एसेट गिरकर 46.6 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। फरवरी में यह 51.29 लाख करोड़ रुपये था। लेकिन, कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में म्यूचुअल फंडों हिस्सेदारी बढ़कर 11.3 फीसदी हो गई। फरवरी में यह 11.1 फीसदी थी।
मार्च में निफ्टी बैंक इंडेक्स 17 फीसदी फिसला
म्यूचुअल फंडों ने मार्च में फाइनेंशियल स्टॉक्स की तब जमकर खरीदारी की, जब बैंकिंग शेयर बिकवाली दबाव से तेजी से गिर रहे थे। Nifty Bank मार्च में 17 फीसदी फिसला, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 15.6 फीसदी गिरा। दोनों सूचकाकों में पिछले महीने मार्च 2020 के बाद एक महीने में सबसे ज्यादा गिरावट आई। निफ्टी बैंक में कई दिग्गज बैंकों के शेयर शामिल हैं।
म्यूचुअल फंडों ने इन सेक्टर में भी की खरीदारी
म्यूचुअल फंड़ों ने फाइनेंशियल के अलावा मार्च में कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स में भी काफी निवेश किए। इन शेयरों में उनकी कुल खरीदारी 16,366 करोड़ रुपये की रही। टेलीकॉम स्टॉक्स में उन्होंने 14,656 करोड़ और आईटी शेयरों में 5,717 करोड़ रुपये निवेश किए। इसके उलट विदेशी निवेशकों ने मार्च में भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की। सिर्फ मार्च महीने में उन्होंने भारतीय बाजार में करीब 1.26 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की।
विदेशी फंडों ने फाइनेंशियल शेयरों में की 60000 करोड़ की बिकवाली
विदेशी फंडों ने मार्च में सबसे ज्यादा 60,000 करोड़ रुपये की बिकवाली फाइनेंशियल शेयरों में की। इसके बाद 12,500 करोड़ रुपये की बिकवाली ऑटो शेयरों में की। उन्होंने कंस्ट्रक्शन कंपनियों के शेयरों में 9,154 करोड़ रुपये और मेटल शेयरों में 3,165 करोड़ रुपये की बिकवाली की। एफएमसीजी और कंज्यूमर शेयरों में भी उन्होंने बिकवाली की। इससे भारतीय शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 15.14 फीसदी पर आ गई। यह फरवरी में 15.5 फीसदी थी।