टीसीएस (TCS) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) म्यूचुअल फंड्स के पसंदीदा शेयरों की सूची में सबसे ऊपर हैं। 40 फंड हाउसों ने अपनी विभिन्न योजनाओं में इन दो ब्लूचिप शेयरों को रखा है। इंफोसिस (Infosys) और मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) दूसरे स्थान पर हैं। एमके (Emkay) के आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर में 39 एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के पास इन दोनों कंपनियों में होल्डिंग थी।
एफएमसीजी सेगमेंट में नवंबर में म्यूचुअल फंड्स का सबसे ज्यादा पसंदीदा खपत वाला स्टॉक टाइटन रहा। इसके बाद आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) रहे हैं। सन फार्मा फार्मास्युटिकल सेक्टर में म्यूचुअल फंड्स की सबसे पसंदीदा कंपनी बनकर उभरी है। जबकि एनबीएफसी में एएमसी की पसंदीदा कंपनी बजाज फाइनेंस रही है।
सॉफ्टवेयर सर्विसेज एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के सामने आने वाली तमाम चुनौतियों के बावजूद इस सूची में आईटी कंपनियों का अच्छा प्रतिनिधित्व है। इसमें पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एलटीआईमाइंडट्री, एम्फैसिस और कॉफोर्ज जैसे मिडकैप नाम शामिल हैं। इनमें नवंबर में म्यूचुअल फंड्स ने खूब खरीदारी की है।
भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) भारत के 45-कंपनियों वाले म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में कम से कम 30 एएमसी के पोर्टफोलियो में शामिल एकमात्र पीएसयू बैंक है। एसबीआई और एनटीपीसी नवंबर में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री द्वारा सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले पीएसयू स्टॉक रहें हैं।
सबके फेवरिट्स : टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक
"फॉर्म अस्थायी है, क्लास स्थायी है" सबके फेवरिट रहे आईटी स्टॉक टीसीएस के लिए ये कथन एक दम सही नजर आ रहा है। घरेलू सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका और यूरोप में ऊंची ब्याज दरें और निगेटिव कंज्यूमर सेंटीमेंट ने 2023 को भारत के आईटी सेक्टर के लिए याद न रखने वाला साल बना दिया है। अपनी कमाई का लगभग 68 फीसदी हिस्सा अमेरिका और यूरोपीय संघ से हासिल करने वाली टीसीएस ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक स्थियों के प्रति काफी ज्यादा संवेदनशील है। यह दर्द सितंबर तिमाही के नतीजों में भी दिखाई दिया था जब टीसीएस ने महामारी से प्रभावित जून 2020 तिमाही के बाद पहली बार डॉलर में होने वाली कमाई की गिरावट दर्ज की थी। इसके अलावा इस अवधि में कर्मचारियों की संख्या में अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही गिरावट भी दर्ज की गई थी। सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद टीसीएस के टारगेट प्राइस में कटौती की बाढ़ आ गई थी।
हालांकि कई विश्लेषकों ने भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस के समर्थन में आवाज उठाई है। घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपने एक हालिया नोट में कहा है कि दूसरी तिमाही के EBIT मार्जिन में तेज सुधार के साथ, TCS को निकट से मध्यम अवधि में लागत को नियंत्रित करने में सफलता मिल सकती। कंपनी ने ग्रोथ संबंधी चिंताओं के बावजूद समय पर वेतन वृद्धि की है जिससे कंपनी छोड़कर जाने वालों की संख्या में गिरावट आएगी। इससे मीडियम टर्म में कंपनी को फायदा होगा।
बाजार पर अपनी मजबूत पकड़ का प्रदर्शन करते हुए, टीसीएस ने 11.2 बिलियन डॉलर की डील जीती है। यो इसका अब तक का दूसरा सबसे बड़ा टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) है। इसके साथ ही लगातार तीसरी तिमाही में कंपनी की डील विन 10 बिलियन डॉलर से ऊपर रही है जो भारत के 245 बिलियन डॉलर के आईटी इंडस्ट्री के लिए एक मील का पत्थर है। कुछ बाजार जानकारों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 2024 में दरों में कटौती के संकेत दिए इससे टीसीएस और पूरे आईटी पैक को फायदा होगा।
आईसीआईसीआई बैंक नवंबर में म्यूचुअल फंडों का दूसरा सबसे पसंदीदा स्टॉक रहा है। ये धीरे-धीरे बैंकिंग सेक्टर के लीडर के रूप में अपने बड़े प्रतिद्वंद्वी एचडीएफसी बैंक को पीछे छोड़ रहा है। नवंबर महीने के मनीकंट्रोल एनालिस्ट कॉल ट्रैकर के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक को निफ्टी कंपनियों में सबसे ज्यादा 48 "BUY" कॉल मिली हैं।
देश का ये दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर का बैंक सितंबर-तिमाही की नतीजों के मौसम के दौरान सुर्खियों में आया था। इस अवधि में सालाना आधार पर 35.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ बैंक स्टैंडअलोन मुनाफा 10,261 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था जो अनुमान से भी ज्यादा था।
बैड लोन के लिए की जाने वाली प्रॉविजनिंग में भारी गिरावट के कारण कंपनी की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) सालाना आधार पर 24 फीसदी बढ़कर 18,308 करोड़ रुपये हो गई थी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज का कहना है कि आईसीआईसीआई बैंक सभी सेगमेंटों में अच्छी ग्रोथ दिखा रहा है। साथ ही इसकी एसेट क्वालिटी भी काफी अच्छी बनी हुई है। डिजिटल और फिजिकल दोनों तरीकों से होने वाले निवेश में बढ़त को देखते हुए लगता है कि बैंक की कायर्कुशलता और प्रोडक्टिविटी में अच्छी बढ़त होगी और 2 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न ऑन एसेट ( RoAs) देने में कामयाब रहेगा।
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