एक्सिस म्यूचुअल फंड फ्रंटरनिंग केस में अभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। एक्सिस बैंक ने कहा है कि वह एक्सिस म्यूचुअल फंड पर फ्रंटरनिंग के आरोपों की जांच के नतीजे आने तक इंतजार करेगा। नतीजे आने पर ही वह दोषी अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने के बारे में फैसला करेगा। मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। एक्सिस बैंक एक्सिस म्यूचुअल फंड का स्पॉन्सर है।
एक्सिस म्यूचुअल फंड में फ्रंटरनिंग के आरोपों की जांच दो बाहरी एजेंसियां कर रही हैं। इन्हें एक्सिस म्यूचुअल फंड ने अप्वॉइंट किया है। फ्रंटरनिंग का मतलब ऐसे मामलों से है, जिनमें म्यूचुअल फंड के डीलर को फंड हाउस के प्लान (शेयर खरीदने-बेचने) की जानकारी होती है। फिर, वह इस जानकारी का इस्तेमाल कर फायदा उठाने की कोशिश करता है।
एक्सिस म्यूचुअल फंड ने कहा है कि इस मामले की जांच फरवरी में शुरू हुई थी। लेकिन, 6 मई के बाद इस मामले की जानकारी आम लोगों तक पहुंची। इसका मतलब है कि जांच शुरू होने के करीब तीन महीने बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ। मनीकंट्रोल ने यह खबर दी थी कि एक्सिस म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर विरेश जोशी और दीपक अग्रवाल को सस्पेंड कर दिया गया है। उसके बाद सबको इस केस का पता चल गया।
सूत्रों ने बताया कि जब तक इस केस की जांच पूरी नहीं हो जाती, एक्सिस म्यूचुअल फंड के एमडी और सीईओ चंद्रेश निगम सहित दूसरे अधिकारियों के खिलाफ फाइनल एक्शन नहीं लिया जाएगा। निगम ने 8 मई को डिस्ट्रिब्यूटर्स और इनवेस्टर्स को सूचित किया था कि फंड हाउस ने इस साल फरवरी में फ्रंटरनिंग के आरोपों की जांच का आदेश दिया है।
एक्सिस म्यूचुअल फंड ने यह भी कहा था कि वह इस मामले में खुद जांच का आदेश दिया है। शुरुआती एक्शन दो फंड मैनेजर्स के खिलाफ लिया गया है। इनमें से एक विरेश जोशी है। उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। जोशी एक्सिस म्यूचुअल फंड के चीफ डीलर थे। निगम ने इनवेस्टर्स को सबसे उच्च गवर्नेंस स्टैंडर्ड का भरोसा दिलाया था।
एक्सिस म्यूचुअल फंड देश का सातवां सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड हाउस है। इसका स्पॉन्सर एक्सिस बैंक है, जो देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक है। एक्सिस म्यूचुअल फंड की करीब सभी कैटेगरी में स्कीमें हैं।