म्यूचुअल फंड्स में निवेश के नियम 1 जुलाई से बदल गए, जानिए आपके निवेश पर क्या असर होगा

1 जुलाई से किसी पूल अकाउंट से म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश की इजाजत नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि इनवेस्टमेंट का पैसा निवेशक के बैंक अकाउंट से सीधे म्यूचुअल फंड हाउस के बैंक अकाउंट में जाएगा

अपडेटेड Jul 01, 2022 पर 5:04 PM
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स्टॉक एक्सचेंजों के म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म्स को भी इस नियम का पालन करना होगा।

म्यूचुअल फंड्स स्कीम (Mutual Fund Scheme) में निवेश का तरीका 1 जुलाई से बदल गया है। अगर आप एमएफ (MF) में इनवेस्ट करते हैं तो आपके लिए इस बारे में जानना जरूरी है। 1 जुलाई से किसी पूल अकाउंट से म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश की इजाजत नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि इनवेस्टमेंट का पैसा निवेशक के बैंक अकाउंट से सीधे म्यूचुअल फंड हाउस के बैंक अकाउंट में जाएगा।

स्टॉक एक्सचेंजों के म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म्स को भी इस नियम का पालन करना होगा। नए नियम की वजह से शुरुआत में इनवेस्टर्स और निवेश के प्रोसेस से जुड़े दूसरे पक्षों को थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

MF Utility सहित सभी नॉन-एक्सचेंज ट्रांजेक्शन प्लेटफॉर्म्स ने 1 जून से इस नियम का पालन करना शुरू कर दिया है। उन्हें शुरुआत में थोड़ी दिक्कत हुई थी। लेकिन, धीरे-धीरे दिक्कतें घट रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टमेंट प्रोसेस से जुड़े सभी पक्षों के नियम का पालन शुरू कर देने से दिक्कतें खत्म हो जाने की उम्मीद है।


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म्यूचुअल फंड्स इनवेस्टर्स और डिस्ट्रिब्यूटर्स ने नए नियम की शिकायत की थी। उनका कहना था कि यूनिट्स एलॉटमेंट के कंफर्मेशन में देर, चेक, RTGS, NEFT से पेमेंट में दिक्कत, SIP ट्रांजेक्शंस फेल करने सहित कई मुश्किलें आ रही थी।

जब पैसा सीधे इनवेस्टर के बैंक अकाउंट से म्यूचुअल फंड हाउस के अकाउंट में जाता है तो ट्रांजेक्शन प्लेटफॉर्म्स को पेमेंट की डिटेल के लिए पेमेंट प्रोसेसिंग एनटिटी पर डिपेंड होना पड़ता है। इनवेस्टर्स को यूनिट्स तभी एलॉट किए जाते हैं जब फंड हाउस को पैसा मिल जाता है।

म्यूचुअल फंड्स हाउस को मिले पैसे के सोर्स को भी वेरिफाय करना पड़ता है। यह वेरिफाय करना जरूरी है कि पैसा सीधे इनवेस्टर के बैंक अकाउंट से आया है। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड हाउस को थर्ड-पार्टी पेमेंट एक्सेप्ट करने की इजाजत नही है।

थर्ड-पार्टी पेमेंट का मतलब ऐसे पेमेंट से है, जिसमें पैसा सीधे इनवेस्टर के बैंक अकाउंट से नहीं आता है। इस बीच, MF Utilities ने कहा है कि रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट्स के सिस्टम में सुधार आया है। अब अगर पेमेंट में नियमों का पालन किया गया है तो यूनिट्स के एलॉटमेंट में देर नहीं हो रही है। म्यूचुअल फंड्स डिस्ट्रिब्यूटर्स का कहना है कि पहले ट्रांजेक्शन कनफर्म होने में छह दिन तक का समय लग जाता था। अब एक से दो दिन लग रहा है।

MF Utilities के सीईओ गणेश राम ने कहा, "हमने सेबी से गुजारिश की है कि म्यूचुअल फंड्स में चेक से होने वाले पेमेंट के लिए इनवेस्टर्स को नॉन-स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की इजाजत दी जाए। हम 15 जुलाई को या इससे पहले पेमेंट के लिए NEFT और RTGS की सुविधा फिर से शुरू कर देना चाहते हैं।"

MF Utilities ने 1 अप्रैल से पेमेंट के इन तीनों तरीकों को बंद कर दिया था। इनवेस्टर के बैंक अकाउंट से म्यूचुअल फंड हाउस को NEFT और RTGS के जरिए पेमेंट पर काम चल रहा है।

अब SIP के ऐसे सभी पेमेंट रुक जाएंगे, जिसमें आपका ब्रोकर आपके ब्रोकिंग अकाउंट बैलेंस से पैसा म्यूचुअल फंड हाउस को ट्रांसफर करता था। आपको National Automated Clearing House (NACH) के साथ फ्रेश मैनडेट पर हस्ताक्षर करने होंगे। यह काम ऑनलाइन किया जा सकता है। आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपके म्यूचुअल फंड्स के साथ आपका सही बैंक अकाउंट लिंक्ड हो, क्योंकि रिडेम्पशन का पैसा आपके बैंक अकाउंट में आएगा। यह आपको ब्रोकिंग अकाउंट में नहीं जाएगा।

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