Silver ETF : ICICI Prudential फंड सिल्वर ईटीएफ एनएफओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला, क्या आपको करना चाहिए निवेश?

कीमती मेटल होने के साथ-साथ चांदी इंडस्ट्री में काफी इस्तेमाल होती है। इसलिए, इकोनॉमिक रिकवरी और ग्रोथ को देखते हुए यह अच्छा दांव हो सकती है

अपडेटेड Jan 06, 2022 पर 12:53 PM
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सोने में मजबूती के साथ चांदी की कीमतें बढ़ने की ज्यादा संभावना होती है

ICICI Prudential Mutual Fund Silver ETF NFO : आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) बुधवार यानी 5 जनवरी, 2022 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया। इसके अलावा, मार्केट रेग्युलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) द्वारा कुछ नियमों के अधीन कई म्यूचुअल फंड अपने सिल्वर ईटीएफ लाने के लिए तैयार हैं।

जानिए क्या है स्कीम?

सिल्वर ईटीएफ अपनी सिल्वर होल्डिंग्स के इनवेस्टमेंट रिटर्न को ट्रैक करेगा। सेबी नियमों के तहत सिल्वर ईटीएफ को 99.9 फीसदी शुद्धता वाली चांदी रखनी होती है। म्यूचुअल फंड्स को लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (एलबीएमए) के स्टैंडर्ड्स के तहत चांदी का मूल्यांकन करना होता है।

ईटीएफ का एक्सपेंस रेशियो 50-60 बेसिस प्वाइंट्स होगा। यह एक ईटीएफ है, इसलिए इसमें डीमैट अकाउंट रखने वाले इनवेस्टर ही निवेश करेंगे। इनवेस्टर्स को ब्रोकरेज फीस या एक्सचेंज पर ट्रांजैक्शन की दूसरी कॉस्ट चुकानी होगी। आईसीआईसीआई एमएफ 13 जनवरी, 2022 को सिल्वर ईटीएफ फंड ऑफ फंड लॉन्च करेगी, जिससे इसमें वे लोग भी निवेश कर सकेंगे जिन के पास डीमैट अकाउंट नहीं है।


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यह कैसे करता है काम

कीमती मेटल होने के अलावा, चांदी इंडस्ट्री में काफी इस्तेमाल होती है। इसलिए, इकोनॉमिक रिकवरी और ग्रोथ को देखते हुए यह अच्छा दांव हो सकती है।

चांदी कई इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट – इलेक्ट्रिकल सर्किट्स, बैटरीज, एलईडी चिप्स और आरएफआईडी चिप्स में इस्तेमाल होती है। इसका फोटोवोल्टिक सेल्स (सोलर एनर्जी के लिए), मेडिसिन, न्यूक्लियर रिएक्टर्स, गैजेट, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स आदि में भी इस्तेमाल है।

आईसीआईसीआई म्यूचुअल फंड के हेड-प्रोडक्ट डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटजी चिंतन हरिया ने कहा, “चांदी का इंडस्ट्री में इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस ट्रेंड के कारण चांदी की खपत होती है और यह रिसाइकिल नहीं होती है। इसलिए, यदि मांग बढ़ती है तो चांदी की कीमतें ऊपर जा सकती हैं।”

2020 से चांदी ने सोने की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन 10 साल की अवधि में सोने ने अच्छा रिटर्न दिया है।

मेहता ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज) राहुल कलंत्री ने कहा, “जब सोने की कीमतें चढ़ती हैं तो चांदी में भी डिमांड बढ़ती है और फिर चांदी में मजबूती आने लगती है। इसी प्रकार, जब सोना टूटता है तो चांदी से डिमांड सोने की ओर शिफ्ट होने लगती है और फिर चांदी की कीमतें कमजोर होने लगती हैं।”

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क्या नहीं होता है

भले ही सोना और चांदी की कीमतों के बीच कुछ लिंक है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है। उदाहरण के लिए, महामारी के दौर में मंदी के कारण सोने में सेफ हैवन डिमांड बढ़ सकती है, लेकिन इंडस्ट्री में सुस्ती के चलते चांदी में गिरावट आ सकती है।

फैमिली फर्स्ट कैपिटल के फाउंडर और एमडी रूपेश नागड़ा कहते हैं कि चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते इनवेस्टर इसे लंबी अवधि तक होल्ड करने से बच सकते हैं। हरिया ने कहा, “चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है।”

मनीकंट्रोल का रुख

डायवर्सिफिकेशन और महंगाई के खिलाफ हेजिंग को देखते हुए इनवेस्टर्स के लिए गोल्ड लिंक्ड इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट पर्याप्त होने चाहिए। यह इक्विटी से जुड़े उतार-चढ़ाव के खिलाफ भी अच्छा काम करेंगे। ज्यादा डायवर्सिफिकेशन पर विचार कर रहे इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो में से कम अलोकेशन के लिए सिल्वर ईटीएफ पर विचार कर सकते हैं। एनएफओ 19 जनवरी, 2022 तक खुला रहेगा।

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