बाजार नियामक सेबी (SEBI) एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जो अगर लागू होता है तो इससे निवेशकों का मुनाफा घट सकता है। हालांकि कम रिटर्न देने वाले फंड अच्छा प्रदर्शन भी कर सकते हैं। मामला यह है कि सेबी Mutual Fund Schemes की एक नई कैटेगरी को मंजूरी देने की योजना बना रहा है जिसमें एसेट मैनेजर्स फंड के परफॉरमेंस के आधार पर चार्ज वसूल सकते हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में लगातार ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड पर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) अतिरिक्त चार्ज वसूलने की मंजूरी देना चाहता है। सेबी की योजना के मुताबिक अगर परफॉरमेंस के आधार पर चार्ज वसूलने की मंजूरी मिलती है तो मौजूदा बेस फीस घटाई जाएगी और फिर परफॉरमेंस के आधार पर अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा।
इस योजना पर क्यों हो रहा विचार
रॉयटर्स को सूत्रों ने बताया कि कई ऐसे फंड हैं जिन्हें एक्टिव रूप से मैनेज किया जाता है लेकिन फिर भी ये बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में कमजोर रिटर्न दे रहे हैं। ऐसे में अगर अतिरिक्त चार्ज वसूलने की मंजूरी दे दी जाती है तो यह फंड को बेहतर रिटर्न के लिए काम करने को प्रोत्साहित करेगा। कोई फंड बेंचमार्क की तुलना में कैसा है, इसे उसके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर तय किया जाएगा। इस प्रस्ताव को सेबी के म्यूचुअल फंड पैनल को भेज दिया गया है।
छोटे शहरों में यह चार्ज सिर्फ एक बार वसूलने को मिलेगी मंजूरी
टियर-2 और टियर-3 शहरों में अधिक से अधिक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए फंड हाउस मार्केटिंग और इंटरमीडियरीज पर खर्च करती हैं। सेबी ने इसके लिए अतिरिक्त चार्ज वसूलने की मंजूरी दी है। हालांकि सेबी ने 44 एसेट मैनेजर्स की जांच में कई खामियों को पाया जैसे कि एक ही निवेशक से अलग-अलग फंड बढ़ा हुआ चार्ज वसूलती है। इसे रोकने के लिए सेबी फंडों को सिर्फ तभी अतिरिक्त फीस वसूलने की मंजूरी देगा जब कोई निवेशक पहली बार कोई म्यूचुअल फंड खरीद रहा है।
सेबी की चेयरपर्सन ने पिछले महीने ही दे दिए थे बदलाव के संकेत
पिछले महीने 28 मार्च को सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने कहा था कि म्यूचुअल फंड्स जो चार्ज वसूलते हैं, उसमें पारदर्शिता का जरूरत है। अब सेबी जिस बदलाव पर विचार कर रही है, यह उसी का हिस्सा है। एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री फिलहाल निवेशकों से 39.46 लाख करोड़ रुपये फीस के रूप में वसूलती है। एसेट मैनेजमेंट कंपनियां टोटल एक्सपेंस रेश्यो के रूप में चार्ज वसूलते हैं जो निवेश राशि का 0-2.25 फीसदी तक होता है। यह चार्ज फंड मैनेज करने के लिए लिया जाता है। इसके अलावा ये कंपनियां एक पीरियड से पहले पैसे निकालने पर एक फीसदी का एक्जिट लोड भी वसूलती हैं।