म्यूचुअल फंड्स हाउसों (Mutual Funds) ने मई महीने के दौरान जूपिटर वैगन्स (Jupiter Wagons) के शेयरों में जमकर खरीदारी की। यह म्यूचुअल फंड्स की ओर से मई में खरीदे गए 10-शीर्ष स्मॉलकैप शेयरों में से एक हैं। ICICI डायरेक्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, म्यूचुअल फंड्स ने मई में जूपिटर वैगन्स के कुल 62 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। जबकि इससे अप्रैल में उनका इस शेयर में निवेश शून्य रहा था। जूपिटर वैगन्स के शेयरों में सबसे अधिक पैसा लगाने वाली म्यूचुअल फंड्स स्कीमों में टाटा रिटायरमेंट सेविंग्स फंड (मॉडरेट एंड प्रोग्रेसिव प्लान) और टाटा बिजनेस साइकल फंड- रेगुलर प्लान शामिल है।
बीएनपी पारिबा शेयरखान के मुताबिक, यह शेयर फिलहाल अपने वित्त वर्ष 24 और वित्त वर्ष 25 के अनुमानित अर्निंग प्रति शेयर (EPS) के क्रमश: 17.4 गुना और 12.8 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो काफी आकर्षक वैल्यूएशन है। इस आकर्षक वैल्यूएशन के अलावा कंपनी के ग्रोथ की मजबूत संभावनाओं ने इसे छोटी कैपिटल गुड्स कंपनियों में एक शानदार स्थान दिलाया है। शेयर की कीमतों में उछाल के साथ इसमें निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ती जा रही है।
सिर्फ पिछले एक महीने में यह शेयर 25 फीसदी चढ़ा है। जबकि पिछले तीन महीने में इसमें करीब 50 फीसदी की तेजी आई है। पिछले एक और तीन सालों में इस शेयर ने क्रमश: 214 प्रतिशत और 1,000 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है।
मई में जिन म्यूचुअल फंड्स ने जूपिटर वैगन्स के शेयर खरीदे हैं, उन्हें आप नीचे देख सकते हैं-
जूपिटर वैगन्स के बारे में
यह कंपनी रेल वैगन, रेल कोच के पुर्जे, रोलिंग स्टॉक के लिए स्टील कास्टिंग और ट्रैक बनाती है। यह मरीन और रेफ्रिजरेटेज कंटेनर भी बनाती है। इसके ग्राहकों में भारतीय रेलवे, प्राइवेट वैगन एग्रीगेटर, कमर्शियल व्हीकल कंपनियां, डिफेंस सेक्टर की कंपनियां और लॉजिस्टिक कंपनियां शामिल हैं।
कोलकाता मुख्यालया वाली यह अमेरिका नॉर्थ-अमेरिका में भी अपने उत्पादों का निर्माण करती है। वहीं इसकी सब्सिडियरी कंपनी जूपिटर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही तक हल्के कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण की योजना है।
मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड शुद्ध बिक्री 96 फीसदी बढ़कर 711.70 करोड़ रुपये रहा, जबकि इसका शुद्ध मुनाफा 184 फीसदी बढ़कर 39.21 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का मार्च तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) 189 फीसदी बढ़कर 93.23 करोड़ रुपये रहा। पिछले 3 सालों में कंपनी का रेवेन्यू और अर्निंग प्रति शेयर (EPS) दो-गुना बढ़ा है, जबकि इसका नेट प्रॉफिट दोगुना हुआ है।