एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और एक्सिस कैपिटल के ग्लोबल रिसर्च हेड नीलकंठ मिश्रा (Neelkanth Mishra, Chief Economist at Axis Bank) ने लिक्विडिटी की स्थिति में सुधार और लोन ग्रोथ में अपेक्षित वृद्धि का हवाला देते हुए निवेशकों को बैंकिंग शेयरों में निवेश करने की सलाह दी है। मिश्रा ने कहा, "...पिछले दो वर्षों में क्ंवाटिटी के मामले में चुनौती देखने मिली। मेरा मतलब है कि बैंक जिस कच्चे माल (जमा या नकदी भंडार) के साथ काम करते हैं। वह एक समस्या बनना शुरू हो गया है।" लिक्वडिटी की कड़ी स्थितियाँ बैंकों की लोन देने की क्षमता पर असर डाल रही हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India (RBI) के लिक्विडिटी के मामले में पिछले सख्त रुख ने, हाई लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो के साथ मिलकर, क्रेडिट और डिपॉजिट ग्रोथ को धीमा कर दिया था। इससे बैंकिंग सेक्टर में "डाउनवर्ड स्पायरल" या नीचे की ओर का मूवमेंट पैदा हो गया था।
उन्होंने कहा, "अगर बैंक लोन में कटौती करना शुरू कर देते हैं या लोन ग्रोथ को धीमा करना शुरू कर देते हैं, तो इससे डिपॉजिट ग्रोथ धीमी हो जाती है। फिर बैंक की गति एक तरह से नीचे की ओर जाती हुई दिखती है।"
RBI ने लिक्विडिटी पर आसान किया अपना रुख
हालांकि आरबीआई ने हाल ही में लिक्विडिटी पर अपना रुख आसान कर दिया है। जिससे उनका मानना है कि इससे बैंक अधिक स्वतंत्र रूप से लोन देने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
जैसे ही बैंक अक्टूबर में आरबीआई (RBI) द्वारा घोषित "न्यूट्रल" रुख को अपनायेंगे, लोन ग्रोथ में तेजी देखने को मिल सकती है। बल्क डिपॉजिट दरों पर दबाव धीरे-धीरे कम हो जाएगा। इससे बैंकों को मार्जिन में सुधार करने और लोन देने का विस्तार करने की अनुमति मिलेगी।
उन्होंने कहा “जैसा कि बैंकिंग सिस्टम को समझ आ रहा है कि आरबीआई का लिक्विडिटी रुख बदल गया है। ये बदलाव बैंकिंग सेक्टर के अच्छे के लिए किया गया है। तभी लोन फ्लो में सुधार होना शुरू हो रहा है।”
लिक्विडिटी की बाधाओं को कम किया जाना बैंकों के लिए बेहतर
हालांकि उन्हें "अप्रैल तक" ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। लेकिन मिश्रा लिक्विडिटी की बाधाओं को कम किया जाना बैंकों की वृद्धि के लिए एक प्रमुख कारक मानते हैं।
उनका मानना है कि इस बदलाव से लोन देने और मुनाफे में वृद्धि हो सकती है। इससे बैंक, विशेष रूप से निजी बैंक, एक आकर्षक निवेश विकल्प बन सकते हैं। इसकी वजह ये है कि भारत साइक्लिकल रिकवरी की ओर बढ़ रहा है।
बता दें कि निफ्टी बैंक इंडेक्स में अब तक 7% से अधिक और पिछले वर्ष में 20% से अधिक की वृद्धि हुई है।
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